सोनिया गांधी ने कांग्रेस के बाद विपक्ष को भी किया राहुल गांधी के हवाले!

क्या सोनिया गांधी ने राहुल गांधी को कांग्रेस की बागडोर सौंपने के बाद विपक्ष की भी जिम्मेदारी उन्हीं को सौंप दी है? यह सवाल इसलिए अहम है, क्योंकि सोनिया गांधी मंच पर आईं तो जरूर, लेकिन चुपचाप बैठी रही एक आध बार मनमोहन सिंह से जरूर बातचीत की.

Arun Singh | News18Hindi
Updated: September 10, 2018, 7:23 PM IST
सोनिया गांधी ने कांग्रेस के बाद विपक्ष को भी किया राहुल गांधी के हवाले!
राहुल गांधी के साथ सोनिया गांधी
Arun Singh | News18Hindi
Updated: September 10, 2018, 7:23 PM IST
पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर कांग्रेस ने आज मोदी सरकार के खिलाफ विपक्ष का संयुक्त बंद बुलाया है. बेशक यह बंद कांग्रेस ने बुलाया, लेकिन विपक्ष के तमाम नेता मंच पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ मौजूद रहे. थोड़ी देर बाद पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष और यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गांधी की एंट्री हुई, लेकिन उन्होंने न तो मंच से भाषण दिया और न ही वहां पर वह ज्यादा देर रुकीं.

अब सवाल यह है कि क्या सोनिया गांधी ने राहुल गांधी को कांग्रेस की बागडोर सौंपने के बाद विपक्ष की भी जिम्मेदारी उन्हीं को सौंप दी है? यह सवाल इसलिए अहम है, क्योंकि सोनिया गांधी मंच पर आईं तो जरूर, लेकिन चुपचाप बैठी रही एक आध बार मनमोहन सिंह से जरूर बातचीत की. मंच पर राहुल गांधी ने ही विपक्ष के सारे नेताओं से बात की और उनके बोलने का क्रम भी निर्धारित किया.

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शरद पवार ने दिया पहला भाषण

भारत बंद की शुरुआत से पहले वरिष्ठता के क्रम को देखते हुए सबसे आखिर में शरद पवार को भाषण देने के लिए बुलाया गया. उसके ठीक बाद राहुल गांधी ने भाषण दिया. यानी कांग्रेस की तरफ से यह तय करने की कोशिश की गई कि गठबंधन का सबसे बड़ा नेता सबसे बाद में बोलता है और इस गठबंधन का चेहरा राहुल गांधी ही हैं. सोनिया गांधी कुछ देर तक विपक्ष के नेताओं के बीच बैठीं जरूर, लेकिन सब कुछ ठीक-ठाक देख मंच की जिम्मेदारी राहुल गांधी को सौंप निकल गईं.

राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर शरद पवार सरीखे नेताओं का विरोध नया नहीं है. यह बात सोनिया गांधी बखूबी जानती हैं और यही वजह है कि इसके पहले विपक्ष के नेताओं की बैठक की अध्यक्षता सोनिया गांधी ही किया करती थीं. आज की घटना से साफ है कि सोनिया गांधी अब राहुल गांधी को ही विपक्ष के साथ समन्वय की जिम्मेदारी भी पूरी तरह सौंपना चाहती हैं.
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राजघाट से पेट्रोल पंप तक पैदल चले राहुल गांधी
भारत बंद में शिरकत करने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मानसरोवर की अपनी यात्रा खत्म कर दिल्ली लौटे और तुरंत राजघाट का रुख किया. उनकी पार्टी के दिग्गज नेता पहले से ही राजघाट पर मौजूद थे और साथ ही विपक्ष के नेता भी जुटे थे. राहुल गांधी ने कैलाश मानसरोवर से लाया जल बापू की समाधि पर चढ़ाया. उसके बाद विपक्ष के नेताओं के साथ पैदल ही रामलीला मैदान के पास स्थित पेट्रोल पंप पर धरना देने के लिए चल पड़े. राहुल गांधी जब राजघाट से पैदल चले थे तो सबकी नजरें इस बात पर टिकी थी कि उनके साथ विपक्ष के कितने दल शामिल है?

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रामलीला मैदान के पास पेट्रोल पंप के सामने बने मंच पर जब नजर गई, तो वहां विपक्ष के तमाम दिग्गज मौजूद थे. मंच पर शरद पवार, शरद यादव टीएमसी के सुखेंदू शेखर रॉय, आरजेडी से जयप्रकाश नारायण यादव सहित विपक्ष के तमाम दिग्गज मौजूद थे. हालांकि, बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के किसी नुमाइंदे के नहीं पहुंचने पर सवाल तो खड़े हुए ही. यही नहीं लेफ्ट की तरफ से सीपीआई और सीपीएम के भी बड़े नेता मंच से दूर रहे. लेफ्ट की तरफ से कहा गया कि उनका खुद का धरना 12 बजे जंतर-मंतर पर था. लिहाजा उनके नेता वहां नहीं पहुंचे.


क्या पूरी तरह से रिटायर होंगी सोनिया गांधी?
सोनिया गांधी अध्यक्ष पद से रिटायर होने के बाद राजनीति में उस कदर सक्रिय नहीं हैं. ऐसे में वो देर सबेर राहुल गांधी को ही सब कुछ सौंप देंगी, ये कयास तो पहले से ही लगाए जा रहे थे. सोनिया गांधी ने अध्यक्ष पद की कुर्सी पिछले दिसंबर में राहुल गांधी को सौंप दी थी, लेकिन अब विपक्ष के साथ समन्वय की जिम्मेदारी भी जिस तरह से उन्होंने राहुल के हवाले की है. इससे सोनिया गांधी के रिटायरमेंट के कयास भी अब लगने लगे हैं.
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