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congress facing economic crisis is considering kerala model to raise funds

आर्थिक संकट से जूझ रही कांग्रेस, फंड जुटाने के लिए 'केरल मॉडल' पर कर रही है विचार

कांग्रेस पार्टी. ( सांकेतिक फोटो)

कांग्रेस पार्टी. ( सांकेतिक फोटो)

कांग्रेस पार्टी ( Congress) बड़े पैमाने पर धन की कमी का सामना कर रही है. फंड रेजिंग के लिए वह केरल (Kerala) मॉडल को अपना सकती है. इस मॉडल के बारे में केरल कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष रमेश चेन्नीथला ने सुझाव दिया था.

नई दिल्ली. कांग्रेस पार्टी ( Congress) बड़े पैमाने पर धन की कमी का सामना कर रही है. फंड रेजिंग के लिए वह केरल (Kerala) मॉडल को अपना सकती है. इस मॉडल को सीपीएम ने शुरू किया था जिसमें डोर-टू-डोर मास कॉन्टैक्ट फंडिंग ड्राइव के माध्यम से जनता से धन जमा किया जाता है और दानदाताओं को पर्चियां जारी की जाती हैं. इस बारे में उदयपुर में आयोजित ‘चिंतन शिविर’ में भी चर्चा की गई थी. इस मॉडल के बारे में केरल कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष रमेश चेन्नीथला ने सुझाव दिया था. आगामी लोकसभा चुनाव 2024 से पहले पार्टी के लिए संसाधन जुटाने को लेकर विस्तृत चर्चा हुई थी.

पार्टी के एक सूत्र के हवाले से ‘ द न्‍यू इंडियन एक्‍सप्रेस’ की खबर में कहा गया है कि केरल मॉडल पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है. कुछ मुद्दे हैं, जैसे कि इसे कैसे लागू किया जा सकता है और फंड प्रबंधन और पारदर्शिता कैसे होगी ? इनको लेकर टास्क फोर्स 2024 की बैठकों में चर्चा की जाएगी. इधर, चुनाव आयोग को सौंपी गई एक ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) की आय वित्तीय वर्ष 2020-21 में 58 प्रतिशत से अधिक घट गई, जो पिछले वित्त वर्ष में 682.2 करोड़ रुपये से घटकर 285.7 करोड़ रुपये हो गई है. वित्त वर्ष 2018-19 में कांग्रेस की आय 918 करोड़ रुपये थी.

ऐसा बताया गया है कि कांग्रेस को फंड की कमी सबसे ज्यादा परेशान कर रही है. खासकर पार्टी कोषाध्यक्ष अहमद पटेल के निधन के बाद, जो अपने कॉर्पोरेट और अन्य संपर्कों के माध्यम से पार्टी फंडिंग को संभालते थे. हालांकि पार्टी के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्‍यक्ष कमलनाथ, फंड जनरेशन को संभालते रहे हैं, लेकिन मोदी शासन में कमाई कम हो गई है.

बकेट कलेक्‍शन वाला ऐसा है केरल मॉडल
अपनी केंद्रीय पार्टी के लिए माकपा की केरल इकाई अधिकतम धन का योगदान देती रही है. ऐसा कहा भी जाता है कि पार्टी तो केरल के धन से चलती है. यहां पार्टी का सामान्‍य नियम है कि 70 प्रतिशत फंडिंग डोर टू डोर मास कॉन्‍टैक्‍ट फंडिंग ड्राइव से होनी चाहिए. इस तरह के कलेक्‍शन को बकेट कलेक्‍शन के रूप में जाना जाता है. हालांकि आलोचक इस तरह के फंड जुटाने की विश्वसनीयता पर सवाल पर उठाते रहे हैं. यहां तक की पार्टी ने खुद भी फंड के उचित रखरखाव का आह्वान किया है. 2013 में, सीपीआई (एम) की केरल इकाइयों ने हरकिशन सिंह सुरजीत भवन और ईएमएस रिसर्च सेंटर की स्थापना के लिए केवल दो दिनों में 8 करोड़ रुपये एकत्र किए. 8 करोड़ रुपये में से केवल 3 करोड़ रुपये पार्टी के सदस्यों का प्रत्यक्ष योगदान था और बाकी बकेट कलेक्शन के माध्यम से था.

Tags: Congress, Economic crisis, Kerala

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