इन तीन राज्यों में कांग्रेस की सरकार गिराना नहीं बल्कि ये है बीजेपी की प्राथमिकता!

इन तीन राज्यों में कांग्रेस की सरकार गिराना नहीं बल्कि ये है बीजेपी की प्राथमिकता!
अभी कांग्रेस सरकारों को चिंता करने की जरूरत नहीं है.

भारतीय जनता पार्टी के अंदरूनी सूत्रों पर भरोसा करें तो पार्टी की प्राथमिकता फिलहाल इस साल के अंत तक होने वाले राज्य विधानसभाओं के चुनाव हैं.

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लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को मिले प्रचंड बहुमत के बाद कांग्रेस की कई राज्यों में अल्पमत में चल रही सरकारों को खतरे का अंदेशा सताने लगा है. कर्नाटक में कांग्रेस समर्थित जेडीएस की सरकार हो या राजस्थान और मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकारें तीनों के मुखिया तख्ता पलट की आशंका के साये में जी रहे हैं, लेकिन बीजेपी कैंप से आ रही खबरों को सही माने तो फिलहाल वो इन सरकारों को गिराने की हड़बड़ी में नहीं है.

फिलहाल यहां लगा है बीजेपी का ध्यान
हालांकि पार्टी की राज्य इकाइयां जल्दी से जल्दी सत्ता में वापसी चाहती हैं. भारतीय जनता पार्टी के अंदरूनी सूत्रों पर भरोसा करें तो पार्टी की प्राथमिकता फिलहाल इस साल के अंत तक होने वाले राज्य विधानसभाओं के चुनाव हैं. पार्टी का शीर्ष नेतृत्व फिलहाल उस पर ही फोकस करना चाहता है. साथ ही पार्टी पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनावों में मिली सफलता के बाद कार्यकर्ताओं के उत्साह को विधानसभा चुनाव तक कायम रखना चाहती है. इसलिए पार्टी वहां राजनीतिक कार्यक्रम जारी रखेगी.

सुनाई देने लगे शिवसेना से अलग चुनाव लड़ने के सुर
इस साल के अंत तक महाराष्ट्र, झारखंड और हरियाणा में विधानसभा चुनाव होने हैं. महाराष्ट्र में पिछला विधानसभा चुनाव बीजेपी और शिवसेना ने अलग-अलग लड़ा था और बीजेपी को उम्मीद से ज्यादा सीटें मिली थीं. ऐसे में पार्टी के सामने विधानसभा चुनाव की रणनीति तय करना मुश्किल काम है.





बीजेपी के कुछ स्थानीय नेता अकेले चुनाव लड़ने की बात भी करने लगे हैं. हालांकि मीडिया में इस मामले पर कोई नेता बोलने को तैयार नहीं है. झारखंड और हरियाणा का चुनाव बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती नहीं है फिर भी 5 साल सरकार में रहने के बाद चुनाव में जाते समय किसी भी दल को सावधानी बरतनी ही होती है.

चुनाव से बड़ी चुनौती बीजेपी के सामने है ये
ऐसे में पार्टी नेतृत्व कांग्रेस शासित राज्यों पर फोकस करने से पहले उन राज्यों पर फोकस करना चाहता है जहां सत्ता में वापसी होनी है. इन सबके बीच बीजेपी को सबसे पहले पार्टी अध्यक्ष अमित शाह का उत्तराधिकारी तलाशना है. बीजेपी में एक व्यक्ति एक पद का सिद्धांत है. इसलिए अमित शाह लंबे अर्से तक पार्टी अध्यक्ष और गृह मंत्री दोनों जिम्मेदारियां नहीं संभाल सकते.

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