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तो क्या कांग्रेस के G-23 में पड़ गई फूट, जितिन प्रसाद ने दिया आनंद शर्मा को हाथ मिलाकर चलने का संदेश!

बंगाल प्रभारी जितिन प्रसाद के इस ट्वीट से जी-23 में पड़ी दरार भी साफ नजर आती है. फोटोः @JitinPrasada

बंगाल प्रभारी जितिन प्रसाद के इस ट्वीट से जी-23 में पड़ी दरार भी साफ नजर आती है. फोटोः @JitinPrasada

Jitin Prasad on Congress alliance in Bengal: जितिन प्रसाद ने कहा कि समय आ गया है कि सब लोग साथ आएं और चुनावी राज्यों में कांग्रेस के प्रदर्शन को बेहतरीन बनाने की दिशा में मिलकर काम करें.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 2, 2021, 12:26 PM IST
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नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पीरजादा अब्बास सिद्दीकी (Abbas Siddiqui) की पार्टी इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के साथ कांग्रेस के गठबंधन को लेकर जी-23 के नेताओं में फूट दिखाई दे रही है. विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के बंगाल प्रभारी जितिन प्रसाद (Jitin Prasad) ने ट्वीट कर आनंद शर्मा के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए शीर्ष नेतृत्व के फैसले को पार्टी हित में करार दिया है. दरअसल राज्यसभा में कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने सोमवार की शाम ट्वीट कर कहा कि "आईएसएफ और ऐसे अन्य दलों के साथ कांग्रेस का गठबंधन पार्टी की मूल विचारधारा, गांधीवाद और नेहरूवादी धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ है, जो कांग्रेस पार्टी की आत्मा है. इन मुद्दों पर कांग्रेस कार्य समिति में चर्चा होनी चाहिए थी. इसके साथ उन्होंने आगे लिखा, "सांप्रदायिकता के खिलाफ लड़ाई में कांग्रेस चयनात्मक नहीं हो सकती है. हमें सांप्रदायिकता के हर रूप से लड़ना है. पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की उपस्थिति और समर्थन शर्मनाक है, उन्हें अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए."

'ISF से गठबंधन कांग्रेस के हित में'
आनंद शर्मा के इन सवालों पर जितिन प्रसाद ने कहा कि गठबंधन करने का फैसला पार्टी और कार्यकर्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. अब समय आ गया है कि सब लोग साथ आएं और चुनावी राज्यों में कांग्रेस के प्रदर्शन को बेहतरीन बनाने की दिशा में मिलकर काम करें. जितिन प्रसाद के इस ट्वीट में पार्टी नेतृत्व का समर्थन तो दिखता है, लेकिन इससे जी-23 में पड़ी दरार भी साफ नजर आती है. प्रसाद उन नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर पूर्णकालिक और सक्रिय लीडरशिप की मांग की थी. साथ ही इन नेताओं ने अपने पत्र में पार्टी में संगठनात्मक चुनाव की भी मांग की थी.

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जी-23 के नेताओं में फूट


बता दें कि पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा और गुलाम नबी आजाद पार्टी नेतृत्व के खिलाफ काफी मुखर हैं. गुलाम नबी आजाद तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिल खोलकर तारीफ भी कर रहे हैं, जिन पर राहुल गांधी लगातार निशाना साधते हैं. अब जितिन प्रसाद के ट्विटर पर आनंद शर्मा से खुलकर असहमति व्यक्त करने के बाद साफ हो गया है कि जी-23 के नेताओं के विचारों में काफी अंतर है, क्योंकि कोलकाता में सोमवार को लेफ्ट के साथ सीटों के बंटवारे के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए जब अधीर रंजन चौधरी से आईएसएफ के साथ तालमेल पर जवाब मांगा गया तो उन्होंने कहा कि वे कोई भी फैसला व्यक्तिगत रूप से नहीं करते हैं और पार्टी हाईकमान की स्वीकृति लेते हैं.

पृथ्वीराज को मिली असम में जिम्मेदारी
खबरों के मुताबिक अधीर रंजन चौधरी सहित बंगाल कांग्रेस के नेताओं ने मौलाना अब्बास सिद्दीकी के साथ गठबंधन को लेकर अपनी चिंताओं को पार्टी हाईकमान के सामने रखा था, लेकिन शीर्ष नेतृत्व ने गठबंधन को हरी झंडी दे दी. आनंद शर्मा पर चौधरी ने पलटवार करते हुए ANI से कहा, "दिल्ली में पार्टी लीडरशिप के हस्ताक्षर के बिना कोई भी फैसला व्यक्तिगत रूप से नहीं लिया. हम एक राज्य के प्रभारी हैं और व्यक्तिगत रूप से फैसला नहीं लेते हैं." जितिन प्रसाद की तरह जी-23 में शामिल रहे पृथ्वीराज चव्हाण को कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व ने सोमवार को असम विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी की स्क्रीनिंग कमेटी का चेयरमैन बनाया.

चव्हाण को जिम्मेदारी दिए जाने से साफ है कि शीर्ष नेतृत्व जी-23 के नेताओं को तोड़ना चाहता है, क्योंकि जम्मू में गुलाम नबी आजाद के साथ मंच पर मौजूद नेताओं की संख्या सिर्फ 8 थी और बाकी नेता कार्यक्रम से गैरहाजिर रहे. शायद यही वजह है कि पत्र लिखने के सिवा चुप्पी साधे रखने वाले दूसरे नेताओं को जिम्मेदारी देकर पार्टी नेतृत्व गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा, कपिल सिब्बल, भूपिंदर सिंह हुड्डा, राज बब्बर जैसे नेताओं को अलग-थलग करना चाहता है.

विवादित बयानों के लिए कुख्यात हैं ISF नेता
बता दें कि पीरजादा अब्बास सिद्दीकी को बंगाल में उनके चाहने वाले 'भाईजान' कहकर बुलाते हैं, लेकिन उनकी पहचान विवादित बयान देने के लिए है. पिछले कई सालों से अपने धार्मिक कार्यक्रमों में सिद्दीकी शब्दबाण छोड़ते रहे हैं. सिद्दीकी को लेकर कांग्रेस नेता भले सवाल उठाते रहे हों, लेकिन लेफ्ट के नेताओं को नहीं लगता कि इंडियन सेक्युलर फ्रंट सांप्रदायिक पार्टी है. कांग्रेस के लिए लेफ्ट का साथ बंगाल में जरूरी है.

कौन-कौन हैं जी-23 में
बंगाल में कांग्रेस की रणनीति पर आनंद शर्मा के सवाल उठाने के एक दिन पहले उनके वरिष्ठ साथी गुलाम नबी आजाद ने जम्मू-कश्मीर में खुले दिल से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की थी. जी-23 के नेताओं में कपिल सिब्बल, मनीष तिवारी, शशि थरूर, विवेक तन्खा, मुकुल वासनिक, जितिन प्रसाद, आनंद शर्मा, गुलाम नबी आजाद, भूपिंदर सिंह हुड्डा, एम. वीरप्पा मोइली, पृथ्वीराज चव्हाण, पीजे कुरियन, अजय सिंह, रेणुका चौधरी, मिलिंद देवड़ा, राज बब्बर, अरविंदर सिंह लवली, कौल सिंह ठाकुर, अखिलेश प्रसाद सिंह, कुलदीप शर्मा, योगानंद शास्त्री और संदीप दीक्षित शामिल हैं.

केरल के जानी दुश्मन, बंगाल में दोस्त
पश्चिम बंगाल में कांग्रेस का आईएसएफ के अलावा लेफ्ट के साथ गठबंधन है. इसके तहत राज्य में 92 सीटों पर कांग्रेस चुनाव लड़ेगी और बाकी सीटें गठबंधन के अन्य साथियों को दी जाएंगी. बंगाल में इस बार का मुकाबला बहुकोणीय है और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ बीजेपी सहित तमाम पार्टियों ने मोर्चा खोल रखा है. असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी भी बंगाल चुनाव में उतर रही है. वहीं, तेजस्वी यादव की आरजेडी ने ममता को समर्थन दिया है. बीजेपी ने ममता बनर्जी के खिलाफ आक्रामक अभियान छेड़ रखा है, जिनके मुकाबले लेफ्ट और कांग्रेस का गठबंधन स्वयं को तीसरे विकल्प के रूप में पेश कर रहा है.

दिलचस्प ये है कि बंगाल में साथ चुनाव लड़ रहे लेफ्ट और कांग्रेस, केरल में एक दूसरे के जानी दुश्मन हैं.
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