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नागरिकता संशोधन विधेयक: चिदंबरम बोले- CAB संविधान विरूद्ध, अदालत में नहीं टिक पाएगा

News18Hindi
Updated: December 11, 2019, 5:29 PM IST
नागरिकता संशोधन विधेयक: चिदंबरम बोले- CAB संविधान विरूद्ध, अदालत में नहीं टिक पाएगा
राज्यसभा में चिदंबरम ने नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर सरकार पर निशाना साधा.

सत्ता पक्ष ने विपक्ष आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 (Citizenship Amendment Bill) राष्ट्र हित में है और इससे भारतीय मुसलमानों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा

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  • Last Updated: December 11, 2019, 5:29 PM IST
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नई दिल्ली. संसद (Parliament) के शीतकालीन सत्र  (Winter session 2019)के दौरान राज्यसभा (Rajyasabha) में नागरिकता संशोधन विधेयक (Citizenship Amendment Bill) पर चर्चा के दौरान कांग्रेस नेता और सांसद पी. चिदंबरम (P chidambaram) ने केंद्र की मोदी सरकार को घेरा. संसद प्रांगण में पत्रकारों से बात करते हुए चिदंबरम ने कहा- 'यह एक दुखद दिन है कि निर्वाचित सांसदों को कुछ असंवैधानिक करने के लिए कहा जा रहा है. विधेयक असंवैधानिक है.सरकार का कहना है कि '130 करोड़ लोग उनका समर्थन कर रहे हैं लेकिन पूरा पूर्वोत्तर आग की लपटों में है.'

उन्होंने कहा कि इस विधेयक को संसद में पारित होने पर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी. मुझे पूरा यकीन है कि सुप्रीम कोर्ट के जज इसे खत्म कर देंगे.' इससे पहले चिदंबरम ने राज्यसभा में विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए इस विधेयक को मोदी सरकार का ‘हिन्दुत्व का एजेंडा आगे बढ़ाने’ वाला करार कदम देते हुए दावा किया कि यह प्रस्तावित कानून न्यायालय के कानूनी परीक्षण में नहीं टिक पाएगा.

‘असंवैधानिक काम’ पर समर्थन लेना चाहती है सरकार
चिदंबरम ने कहा कि सरकार इस विधेयक के जरिये संसद से एक ‘असंवैधानिक काम’ पर समर्थन लेना चाहती है. उन्होंने कहा कि संसद में निर्वाचित होकर आये सदस्यों का यह प्राथमिक दायित्व है कि वे कानून बनाते समय यह देखें कि यह संविधान के अनुरूप है कि नहीं. चिदंबरम ने कहा कि वह इस बात को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं कि यह प्रस्तावित कानून न्यायालय द्वारा संविधान विरूद्ध करार दिया जाएगा.

उन्होंने कहा कि इस विधेयक के मामले में लोकसभा के बाद यदि राज्यसभा इसे पारित कर देती है तो वह अपने दायित्व को संविधान के तीन अन्य अंगों में से एक (न्यायालय) के लिए ‘त्याग’ रही है. उन्होंने कहा, ‘आप इस मुद्दे को न्यायाधीशों की गोद (विचारार्थ) में डाल रहे हैं.’ पूर्व गृह मंत्री ने कहा कि यह मामला यही नहीं रूकेगा और यह न्यायाधीशों के पास जाएगा. उन्होंने कहा कि निर्वाचित नहीं होने वाले न्यायाधीश और निर्वाचित नहीं होने वाले वकील अंतत: इसके बारे में निर्धारण करेंगे. ‘अत: यह संसद का अपमान होगा.’ एजेंसी इनपुट के साथ

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First published: December 11, 2019, 5:21 PM IST
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