News 18 Chaupal: कांग्रेस की रंजीत रंजन बोलीं- अपनी सनक में संविधान की धज्जियां उड़ा रही सरकार, सुधांशु त्रिवेदी ने किया पलटवार

News 18 Chaupal: कांग्रेस की रंजीत रंजन बोलीं- अपनी सनक में संविधान की धज्जियां उड़ा रही सरकार, सुधांशु त्रिवेदी ने किया पलटवार
News18 के कार्यक्रम चौपाल में बीजेपी के सुधांशु त्रिवेदी और कांग्रेस की रंजीता रंजन ने नागरिकता कानून समेत कई मुद्दों पर चर्चा की.

News 18 Chaupal: नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Amendment Act) के खिलाफ देश भर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. हर तरफ इस कानून को लेकर बहस और चर्चा हो रही है. News18 के कार्यक्रम चौपाल में बीजेपी के वरिष्‍ठ नेता सुधांशु त्रिवेदी और कांग्रेस नेता रंजीत रंजन ने न्‍यूज एंकर अमीष देवगन से नागरिकता कानून, जामिया हिंसा और एनआरसी समेत कई मुद्दों पर चर्चा की.

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  • Last Updated: December 18, 2019, 1:09 PM IST
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नई दिल्‍ली. नागरिकता (संशोधित) कानून 2019 (CAA 2019) को लेकर देश भर में बहस छिड़ी हुई है. कुछ लोगों का कहना है कि ये देशहित में है. वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि ये मुस्लिमों के खिलाफ है. News18 के कार्यक्रम चौपाल में पहुंचे बीजेपी (BJP) के वरिष्‍ठ नेता सुधांशु त्रिवेदी (Sudhanshu Trivedi) ने जहां नागरिकता कानून का बचाव किया. वहीं, कांग्रेस (Congress) नेता रंजीत रंजन (Ranjita Ranjan) ने कहा कि सरकार अपनी सनक में संविधान (Constitution) की धज्जियां उड़ा रही है. कुल मिलाकर दो लोगों की सनक देश को खतरनाक मोड़ पर ले जा रही है.

'श्रीलंका के तमिल ब्राह्मणों की बात क्‍यों नहीं की'
कांग्रेस नेता रंजीत रंजन ने कहा कि आपने अपनी सनक में संविधान के अनुच्‍छेद-14, 21, 25 और 26 की धज्जियां उड़ा दी हैं. उन्‍होंने सवाल उठाया कि धर्म के आधार पर नागरिकता कानून और नेशनल रजिस्‍टर ऑफ सिटिजनशिप (NRC) क्‍यों लागू किया गया? संसद में दिया गया गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) का भाषण सुना. वह कह रहे थे कि तीन देशों के प्रताडि़त अल्‍पसंख्‍यकों को शरण देना चाहते हैं. अगर ऐसा है तो आप श्रीलंका (Sri Lanka) के तमिल ब्राह्मणों की बात क्‍यों नहीं करते हैं? नेपाल (Nepal) के शरणार्थियों की बात क्यों नहीं हो रही है?

'एनआरसी के कारण आम लोगों में डर बैठ गया है'
रंजीत रंजन ने कहा कि कांग्रेस ने पाकिस्तानी मुसलमानों (Pakistani Muslims) को नागरिकता देने की मांग कभी नहीं की. कांग्रेस अपनी सनक का मुद्दा लेकर नहीं चलती है. कांग्रेस के लिए युवाओं का रोजगार (Jobs) मुद्दा है. क्या देश में उत्पीड़न कम हो गया है? क्या युवाओं को रोजगार दे दिया गया है? क्या देश सक्षम हो गया है? बीजेपी बताए कि अपने लोगों को एनआरसी से क्यों प्रताड़ित करना चाहते हैं? अपने नागरिकों, आदिवासी, अल्पसंख्यक, ग्रामीण डरे हुए हैं. इस चक्‍कर में 17 लोगों ने आत्महत्या कर ली. लोगों में डर बैठ गया है कि हमारा आई कार्ड कहीं खो गया तो क्या होगा?



'सीएए-एनआरसी को जोड़ने पर खोट नजर आता है'
कांग्रेस नेता रंजीत रंजन ने कहा कि असम (Assam) जल रहा है, क्योंकि उनकी संस्कृति और रोजगार खत्म हो जाएगा. आप फिर धर्म खोजने की तैयारी कर रहे हैं. 22 यूनिवर्सिटी के युवा सड़क पर हैं. क्या अब बीजेपी उनको धर्म के आधार पर सुनेगी? सीएबी और एनआरसी को जोड़कर देखेंगे तो नीयत में खोट दिखता है. साजिश की बू आ रही है. असम में एनआरसी की अंतिम सूची से बाहर हुए 19 लाख में से 14 लाख हिंदू हैं. इसी मुसीबत से छुटकारे के लिए नागरिकता कानून लेकर आए हैं. एनआरसी से असम संभाल नहीं पाए और अब कह रहे हैं कि इसे पूरे देश में लागू करेंगे.

जामिया हिंसा पर पीएम के ट्वीट का रंजीत रंजन ने किया जिक्र
रंजीत रंजन ने नागरिकता संशोधित कानून 2019 के खिलाफ जामिया मिलिया इस्‍लामिया (Jamia Millia Islamia) के छात्रों के प्रदर्शन में हुई हिंसा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के ट्वीट का जिक्र करते हुए कहा, 'वह ट्वीट करते हैं कि कपड़ों से पहचानो. क्या ये पीएम की भाषा है. इन बातों से लोगों को गुमराह करके डायवर्ट करने की कोशिश हुई है. पाकिस्तान में बंटवारे से पहले जितने अल्पसंख्यक थे, उसकी बात कर रहे हैं, जबकि बंटवारे के बाद वहां अल्पसंख्यकों की संख्या में 3-4 फीसदी ही कमी आई है. गांधी ने शरणार्थियों की बात कही थी. अब उसे अल्पसंख्यकों से जोड़ने की कोशिश की जा रही है.'

बीजेपी के सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस की रंजीत रंजन पर पलटवार किया.


सुधांशु त्रिवेदी ने अमेरिका के CAA पर बोलने को लेकर कसा तंज
पलटवार करते हुए बीजेपी के वरिष्‍ठ नेता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि सबसे पहली बात नागरिकता कानून का चुनाव (Election) से कोई लेनादेना नहीं है. चुनाव तो 6 महीने पहले खत्म हो चुके हैं. उन्‍होंने सवाल उठाया कि बेल्जियम, पोलैंड, फ्रांस में क्या हो रहा है. अमेरिका के राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप (Donald Trump) पर तंज कसते हुए कहा कि चचा ट्रंप मेक्सिको में दीवार बना रहे हैं. सूप बोले तो बोले, छलनी भी बोलेगी. वो खुद अप्रवासियों के बारे में क्या कर रहे हैं. अब वो हमें नसीहत दे रहे हैं.

'पहले भी दी लोगों को शरण, हमने नहीं पूछा - इनको क्‍यों नहीं दी'
सुधांशु त्रिवेदी ने एनआरसी को लेकर दस्‍तावेजों के खो जाने के डर पर सवाल किया कि आपमें से किसने बिना आईडी के वोट डाले हैं? अगर चुनाव आयोग के मुताबिक, भारत में इतने लोग वोट डाल रहे हैं, तो क्या कांग्रेस ये कहना चाहती है कि लोगों ने बिना आईडी के वोट डाले हैं. नागरिकता कानून पर कहा कि 1961 में तिब्बत से आए लोगों को भारत सरकार ने शरण दी तब हमने तो नहीं पूछा कि दूसरों को क्यों नहीं दे रहे. युगांडा के लोगों को शरण दी तो हमने घाना के लोगों की बात तो नहीं उठाई. बांग्लादेशियों को शरण दी, तो हमने तो नहीं पूछा कि श्रीलंका के लोगों को क्यों नहीं दी जा रही है.

अनुच्‍छेद-370 से लेकर CAA तक हर मुद्दे पर बवाल करती है कांग्रेस
नागरिकता कानून पर त्रिवेदी ने कहा कि जब श्रीलंका के शरणार्थियों को 1987 में शरण दी गई थी तब भारत की ग्रोथ रेट क्या थी? बंटवारे के बाद हिंदू, सिख, जैन पाकिस्तान में फंस गए थे. जिन्होंने सिविल वॉर करवा के पाकिस्तान हासिल किया, क्या विपक्ष उनको शरण दिलाना चाहता है. आप कहिए कि मोदी सरकार में मुसलमान महफूज हैं, तो हम बात करने के लिए तैयार हैं. कांग्रेस सिर्फ बवाल कर रही है. तीन तलाक पर संसद में वोट, सड़क पर बवाल, फिर अनुच्‍छेद-370 पर संसद में वोट, सड़क पर बवाल. अब नागरिकता कानून पर भी यही रवैया है.

तरुण गोगोई, मनमोहन सिंह और महात्‍मा गांधी की इच्‍छा पूरी हो रही है
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, 'ये सबको पता है कि महाराष्ट्र (Maharashtra) में विपक्ष कैसे खड़ा है. नागरिकता पर भी विपक्ष विचित्र ढंग से खड़ा है. 20 अप्रैल 2012 को तरुण गोगोई (Tarun Gogoi) लिखते हैं कि हिंदू, बौद्ध और ईसाई बंटवारे के बाद उत्पीड़ित हुए हैं. इसलिए उन्हें शरण मिलनी चाहिए. पूर्व पीएम डॉ. मनमोहन (Dr. Manmohan Singh) सिंह राज्यसभा में कहते हैं कि पाकिस्तान के अल्पसंख्यक प्रताड़ितों को नागरिकता मिलनी चाहिए. महात्‍मा गांधी (Mahatma Gandhi) लिखते हैं कि शरण देना ही नहीं, सहायता देना भी उद्देश्य होना चाहिए. अब कांग्रेस अपना स्टैंड बदल ले तो हम क्या करें.

जामिया हिंसा में कपड़े देखकर ही पता चलता है, कौन छात्र और कौन बवाली
जामिया हिंसा मुद्दे पर कहा कि कौन छात्र है कौन पेशेवर बवाली है ये तो मुंह पर कपडा रखे लोगों को देखकर पहचाना जा सकता है. जामिया प्रदर्शन में शामिल भीड़ के कपड़े, हाव-भाव से पता चल जाता है कि कौन स्टूडेंट था और कौन बवाली है. कुछ लोग कपड़ों मे ही फंसकर रह गए. आजादी के समय सैयद मुसलमानों की साक्षरता दर 24 परसेंट थी यानी राष्ट्रीय दर से तीन गुना ज्‍यादा थी. अब देखिए क्या हाल है, क्योंकि वो कपड़ों में उलझ कर रह गए.

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