कांग्रेस सांसद बाजवा बोले- "हमें राष्ट्रवाद न सिखाएं, पंजाब व हरियाणा बच्चे तिरंगे में लिपटकर लौटते हैं घर"

 किसानों को राष्ट्र विरोधी और खालिस्तानी रूप में प्रचारित किए जाने का भी कांग्रेस सांसद ने कड़ा विरोध किया.

किसानों को राष्ट्र विरोधी और खालिस्तानी रूप में प्रचारित किए जाने का भी कांग्रेस सांसद ने कड़ा विरोध किया.

शिरोमणि अकाली SAD नेता सांसद सुखदेव सिंह ढींडसा (MP Sukhdev Singh Dhindsa) ने कहा कि प्रधानमंत्री को हस्तक्षेप करना चाहिए और किसानों की मांगों को सुनना चाहिए.उन्होंने कहा कि, “सरकार को तीन कानूनों को रद्द करने की किसानों की मांग को स्वीकार करना चाहिए.

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  • Last Updated: February 5, 2021, 8:24 PM IST
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चंडीगढ़. संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर प्रस्ताव के धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस में भाग लेते हुए पंजाब से राज्यसभा सांसद प्रताप सिंह बाजवा (Rajya Sabha MP Pratap Singh Bajwa) ने 26 जनवरी को दिल्ली में हुई हिंसक घटनाओं की जांच दो माह के भीतर सुप्रीम कोर्ट के सीटिंग जज से करवाने की मांग की है.उन्होंने कहा कि 26 जनवरी को लाल किले पर जो हुआ, एक पंजाबी और सिख होने के नाते उसका दुख है. उन्होंने आगे कहा, कि हमें राष्ट्रवाद न सिखाएं. हर महीने में पंजाब और हरियाणा का एक बच्चा (जवान) तिरंगे में लिपटकर घर लौटता है. आप हमें राष्ट्रवाद सिखाएंगे?

सरकार वो कर रही है, जो सद्दाम ने इराक में किया

उन्होंने गाजीपुर में किसानों के विरोध स्थल पर बर्लिन की दीवार की तुलना किसान शिविरों में स्थापित किए गए बैरिकेड्स से की और कहा कि किसानों के प्रदर्शन स्थल को सरकार नजरबंदी कैंप बना रही है. किसानों को राष्ट्र विरोधी और खालिस्तानी रूप में प्रचारित किए जाने का भी उन्होंने कड़ा विरोध किया. कांग्रेस सांसद ने कहा कि सरकार किसानों की बिजली काट रही है, पानी सप्लाई बंद किया जा रहा है, इंटरनेट बंद कर रहे हैं. उन्होंने कहा, “किसानों के साथ सरकार जो कर रही है, ऐसी चीजें अफगानिस्तान में देखी गई, ये चीजें इराक में सद्दाम हुसैन और लीबिया में जनरल गद्दाफी ने किया था.”

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सिखों को आतंकवादी और खालिस्तानी बताना दुखद

उधर शिरोमणि अकाली SAD नेता सांसद सुखदेव सिंह ढींडसा (MP Sukhdev Singh Dhindsa) ने कहा कि प्रधानमंत्री को हस्तक्षेप करना चाहिए और किसानों की मांगों को सुनना चाहिए.उन्होंने कहा कि, “सरकार को तीन कानूनों को रद्द करने की किसानों की मांग को स्वीकार करना चाहिए. सभी विपक्षी दल भी यही मांग कर रहे हैं. ढींडसा ने कहा कि जब अध्यादेश लाया गया तो उन्होंने प्रधान मंत्री को लिखा था लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला.

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उन्होंने आगे बताया कि कृषि एक राज्य-विषय है और केंद्र इन कृषि कानूनों को लाकर संघीय व्यवस्था को कमजोर कर रहा है. देश के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सिखों द्वारा किए गए बलिदान पर प्रकाश डालते हुए, ढींडसा ने कहा कि यह दुखद है कि सिखों को आतंकवादी और खालिस्तानी बताया जा रहा है.
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