रोमिला थापर से बायोडाटा मांगने पर शशि थरूर बोले- क्या और नीचे गिर सकता है JNU?

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Updated: September 2, 2019, 12:28 PM IST
रोमिला थापर से बायोडाटा मांगने पर शशि थरूर बोले- क्या और नीचे गिर सकता है JNU?
JNU ने रोमिला थापर समेत उन सभी प्रोफेसर एमिरटस (professor emeritus) को चिट्ठी लिखी है जो 75 वर्ष की उम्र पार कर चुके हैं.

JNU ने रोमिला थापर समेत उन सभी प्रोफेसर एमिरटस (professor emeritus) को चिट्ठी लिखी है जो 75 वर्ष की उम्र पार कर चुके हैं.

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  • Last Updated: September 2, 2019, 12:28 PM IST
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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) की ओर से इतिहासकार और विश्वविद्यालय की मानद प्रोफेसर रोमिला थापर (Romila Thapar)से उनका बायोडाटा मांगने के फैसले पर आलोचना के सुर उठ रहे हैं. जवाहरलाल नेहरू शिक्षक संघ (जेएनयूटीए - JNUTA) के बाद अब तिरवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर (Shashi Tharoor)ने ट्वीट कर इस पूरे घटनाक्रम पर टिप्पणी की है.

थरूर ने ट्वीट किया कि 'जेएनयू ने रोमिला थापर को उनकी प्रोफ़ेसर एमरिटा स्थिति जारी रखने के लिए सीवी प्रस्तुत करने के लिए कहा, यह अपमान से भी बदतर है, यह शिक्षा के मूल्यों और सिद्धांतों और बौद्धिक योग्यता के लिए एक अपराध है. क्या JNU इससे भी नीचे गिर सकता है?'

वहीं इस मामले पर JNU ने कहा कि 'जेएनयू में प्रोफेसर एमेरिटस (professor emeritus)के पद पर नियुक्ति के लिए अपने अध्यादेश का पालन कर रहा है. अध्यादेश के मुताबिक, विश्वविद्यालय के लिए यह जरूरी है वह उन सभी को पत्र लिखे जो 75 साल की उम्र पार कर चुके हैं ताकि उनकी उपलब्धता और विश्वविद्यालय के साथ उनके संबंध को जारी रखने की उनकी इच्छा का पता चल सके. यह पत्र सिर्फ उन प्रोफेसर एमेरिटस को लिखे गए हैं जो इस श्रेणी में आते हैं.'

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थापर ने दिया यह  जवाब

थापर ने इस आशय की पुष्टि की कि उन्हें जुलाई में पत्र मिला था और उन्होंने इसका जवाब दिया है ‘यह जीवन भर का सम्मान है.’ उन्होंने और जानकारी नहीं दी.
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हालांकि, जेएनयूटीए ने कहा कि यह एक 'जानबूझकर किया गया प्रयास है और उन लोगों को बेइज्जत करना है जो वर्तमान प्रशासन के आलोचक हैं.' उसने इस कदम की औपचारिक वापसी और थापर के लिए व्यक्तिगत माफी जारी करने की मांग की.

JNUTA ने कहा- यह  राजनीति से प्रेरित कदम

एसोसिएशन ने प्रशासन द्वारा थापर को अपने ‘ओछे पत्र’ के माध्यम से जेएनयू के शिक्षण और सीखने की परंपराओं को ‘बदनाम’ करने के प्रयासों पर नाराजगी व्यक्त की. जेएनयूएटी ने कहा कि प्रोफेसर थापर का अपमान राजनीतिक रूप से प्रेरित एक और कदम है.

शिक्षक संघ ने कहा कि थापर और जेएनयू के प्रत्येक अन्य प्रोफेसर एमेरिटस / एमिरिटा, को एक संस्थान के तौर पर जेएनयू के निर्माण में उनके योगदान के लिए उन्हें इस पद पर जीवन भर के लिए नामित किया गया है. विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ने जुलाई में थापर को पत्र लिखकर बायोडाटा देने को कहा था ताकि वे इस बात का मूल्यांकन कर सकें कि थापर को प्रोफेसर एमेरिटस के तौर पर जारी रखना चाहिए या नहीं.

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First published: September 2, 2019, 12:23 PM IST
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