कृषि कानूनों के खिलाफ राहुल की अगुआई में कांग्रेस सांसदों ने संसद भवन परिसर में किया प्रदर्शन

संसद में प्रदर्शन करते राहुल गांधी

Monsoon Session: संसद भवन परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष आयोजित इस प्रदर्शन में कांग्रेस के दोनों सदनों के कई सदस्यों ने हिस्सा लिया.

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    नई दिल्ली. कांग्रेस (Congress) के सांसदों ने तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग करते हुए गुरुवार को पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की अगुआई में संसद भवन परिसर में प्रदर्शन किया. संसद भवन परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष आयोजित इस प्रदर्शन में कांग्रेस के दोनों सदनों के कई सदस्यों ने हिस्सा लिया. राहुल गांधी के अलावा लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी, लोकसभा सदस्य मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, रवनीत बिट्टू, राज्यसभा सदस्य प्रताप सिंह बाजवा और कई अन्य सांसद इस धरने में शामिल हुए. कांग्रेस सांसदों ने ‘काले कानून वापस लो’ और ‘प्रधानमंत्री न्याय करो’ के नारे लगाए.

    मुख्य विपक्षी पार्टी के सांसदों ने संसद भवन परिसर में यह धरना उस वक्त दिया जब मानसूत्र सत्र के दौरान केंद्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसान संगठन जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की तैयारी में हैं. गौरतलब है कि दिल्ली से लगे टिकरी बॉर्डर, सिंघु बॉर्डर तथा गाजीपुर बॉर्डर पर किसान पिछले साल नवंबर से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. उनकी मांग है कि तीनों कृषि कानूनों को वापस लिया जाए और न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी दी जाए. हालांकि सरकार का कहना है कि ये कानून किसानों के हित में हैं. सरकार और प्रदर्शन कर रहे किसानों के बीच कई दौर की वार्ता बेनतीजा रही है.



    किसान प्रदर्शन: जंतर-मंतर पर सुरक्षा बढ़ाई गई
    उधर, संसद के मानसूत्र सत्र के दौरान केंद्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों की प्रदर्शन की योजना के मद्देनजर मध्य दिल्ली में जंतर-मंतर पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है. जंतर-मंतर, संसद भवन से कुछ ही दूरी पर है. अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. पुलिस और अर्द्धसैनिक बल के जवानों को तैनात किया गया है. पुलिस की सुरक्षा के साथ 200 किसानों का एक समूह बसों में सिंघु बॉर्डर से जंतर-मंतर आएगा और वहां पूर्वाह्न 11 बजे से शाम पांच बजे तक विरोध प्रदर्शन करेगा.

    संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) को इस बारे में एक शपथपत्र देने के लिए कहा गया है, जिसमें कहा जाए कि कोविड-19 के सभी नियमों का पालन किया जाएगा और आंदोलन शांतिपूर्ण होगा. इस साल 26 जनवरी को एक ट्रैक्टर परेड के दौरान राष्ट्रीय राजधानी में हुई हिंसा के बाद यह पहली बार है, जब अधिकारियों ने विरोध प्रदर्शन करने वाले किसानों को शहर में प्रवेश की अनुमति दी है.

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