महाराष्ट्र में कृषि विधेयकों के खिलाफ कांग्रेस और NCP, शिवसेना का फैसला बाकी

अभी शिवसेना ने कृषि विधेयकों पर स्टैंड साफ नहीं किया है. (फाइल फोटो)
अभी शिवसेना ने कृषि विधेयकों पर स्टैंड साफ नहीं किया है. (फाइल फोटो)

महाराष्ट्र के सत्ताधारी गठबंधन की दो पार्टियों (Congress-NCP) ने साफ कर दिया है कि वो कृषि विधेयक के विरोध में हैं. हालांकि उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (Shiv Sena) ने अपना स्टैंड साफ नहीं किया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 26, 2020, 11:38 AM IST
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पुणे. महाराष्ट्र की गठबंधन सरकार में शामिल कांग्रेस (Congress) और NCP ने शुक्रवार को कहा कि वे यह सुनिश्चित करने की कोशिश करेंगे कि राज्य में कृषि क्षेत्र में सुधार से संबंधित विधेयक लागू नहीं हों. उपमुख्यमंत्री और NCP नेता अजित पवार (Ajit Pawar) ने पुणे में कहा कि किसानों के साथ-साथ राकांपा और अन्य दल भी नए विधेयकों के खिलाफ हैं. उन्होंने कहा, ‘किसानों को लगता है कि कानून उनके लिए लाभकारी नहीं हैं. उन्हें (उन्हें पारित करने की) कोई जल्दी नहीं थी.' हालांकि हिंदुस्तान टाइम्स की एक खबर के मुताबिक अभी शिवसेना (Shiv Sena) ने स्टैंड साफ नहीं किया है.

यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें महाराष्ट्र में लागू किया जाएगा, पवार ने कहा, 'हम यह सुनिश्चित करने की कोशिश करेंगे कि वे लागू नहीं हों. लेकिन साथ ही हमें यह भी देखना होगा कि कौन से नए मुद्दे सामने आते हैं.’ पवार ने कहा, 'हम अध्ययन कर रहे हैं कि अगर मामला अदालत में जाता है तो क्या हो सकता है.' उन्होंने कहा कि सरकार ने कानूनी विभाग से भी राय मांगी है. उन्होंने इस मुद्दे पर बैठक की जिसमें जल संसाधन मंत्री जयंत पाटिल, सहकारिता मंत्री बालासाहेब पाटिल, श्रमिकों के नेता और अन्य पक्षों के लोग उपस्थित थे.

'नए कृषि विधेयकों को लागू नहीं करने का फैसला लेंगे'
इससे पहले दिन में राज्य के कांग्रेस प्रमुख और राजस्व मंत्री बालासाहेब थोराट ने कहा कि वे 'मिलकर काम करेंगे और नए कृषि विधेयकों को लागू नहीं करने का फैसला लेंगे.' उन्होंने कहा कि राज्य कांग्रेस के नेता 28 सितंबर को राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मिलेंगे और दो अक्टूबर को नए विधेयकों के खिलाफ राज्यव्यापी धरना दिया जाएगा.




नए विधेयकों का मकसद कृषि उपज बाजार समितियों (एपीएमसी) को समाप्त करना है
थोराट ने कहा कि कांग्रेस चाहती है कि कृषि क्षेत्र से संबंधित दोनों विधेयक और श्रम सुधार विधेयकों को रद्द किया जाए. उन्होंने आरोप लगाया कि नए विधेयकों का मकसद कृषि उपज बाजार समितियों (एपीएमसी) को समाप्त करना है. उन्होंने कहा कि सरकार एपीएमसी प्रणाली को ध्वस्त करना चाहती है और विपणन प्रणाली व्यापारियों को सौंपना चाहती है. इस वजह से किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिलेगा. कांग्रेस नेता और पीडब्ल्यूडी मंत्री अशोक चव्हाण ने कहा कि नए विधेयकों से केवल अमीरों और कार्पोरेट जगत को फायदा होगा.
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