NEET-JEE परीक्षा को आगे बढ़ाने के लिए NSUI की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जारी

NEET-JEE परीक्षा को आगे बढ़ाने के लिए NSUI की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जारी
एनएसयूआई की भूख हड़ताल जारी. (Pic- Twitter nsui)

JEE-NEET: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में याचिकाकर्ताओं ने अर्जी दाखिल कर कहा है कि यह स्टूडेंट्स की सेफ्टी का मामला है जो स्टूडेंट एग्जाम में बैठेंगे उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 29, 2020, 2:40 PM IST
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नई दिल्‍ली. कोरोना काल (Coronavirus pandemic) में NEET और JEE परीक्षा पर संग्राम जारी है. एक तरफ मोदी सरकार परीक्षाओं को तय समय पर ही कराना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस (Congress) और दूसरी विपक्षी पार्टियां इसके विरोध में हैं. सरकार के फैसले के खिलाफ कांग्रेस का छात्र संगठन एनएसयूआई चार दिन से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर है. आज चौथे दिन कांग्रेस के कई बड़े नेता इस भूख हड़ताल में शामिल होकर इसे अपना समर्थन दे देंगे. इससे पहले कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और कई नेता हड़ताल स्थल पर आ चुके हैं.

वहीं दूसरी तरफ कोरोना महामारी में सुरक्षा का हवाला देते हुए छह राज्य सरकारों ने इस बाबत सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की है. बता दें कि जीएसटी, NEET और JEE परीक्षा के मुद्दे पर कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आज कांग्रेस शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की थी. इस वर्चुअल मीटिंग में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन और महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे के अलावा चार कांग्रेस शासित राज्यों के CM भी बैठक में शामिल थे. इसमें सर्वसम्मति से ये फैसला लिया गया कि केंद्र सरकार अपनी जिद में सिर्फ राज्य सरकारों के लिए परेशानी खड़ी कर रही है. वही छात्रों के भविष्य और स्वास्थ्य के साथ जोखिम भी ले रही है.






सुप्रीम कोर्ट में इन याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील सुनील फर्नांडिस ने अर्जी दाखिल कर कहा है कि यह स्टूडेंट्स की सेफ्टी का मामला है जो स्टूडेंट एग्जाम में बैठेंगे उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता है और इस मसले पर संतुष्ट करने वाला जवाब नहीं है. याचिका में कहा गया है कि केंद्र सरकार के पास वक्त नहीं है कि वह प्रत्येक जिले में नीट और जेईई के लिए एग्जाम सेंटर बनाए.

याचिका में यह भी कहा गया है कि लाखों स्टूडेंट को एग्जाम देना है और वह फिजिकल एग्जाम में बैठना नहीं चाहते. अगर 17 अगस्त के फैसले को रिव्यू नहीं किया गया तो देश की स्टूडेंट कम्युनिटी को जो हानि और डैमेज होगा उसकी भरपाई नहीं हो सकती. अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट में दायर रिव्यू पिटीशन के फैसले पर टिकी है कि आखिर सुप्रीम कोर्ट 17 अगस्त के फैसले को ही दोहराता है या उस फैसले से उलट कोई फैसला लेता है.
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