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जम्मू-कश्मीर को लेकर में कन्फ्यूज्ड क्यों है कांग्रेस?

कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सोनिया गांधी. (फाइल फोटो)
कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सोनिया गांधी. (फाइल फोटो)

2019 के लोकसभा चुनावों में लाख कोशिशों के बाद भी कांग्रेस इतनी सीटें भी इकठ्ठा नहीं कर पाई जिससे उसको लोकसभा में नेता विरोधी दल की कुर्सी मिल सके.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 8, 2019, 2:25 PM IST
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2014 को लोकसभा चुनाव में मिली हार से कांग्रेस अब तक उबरती नहीं दिख रही है. 2019 के लोकसभा चुनावों में लाख कोशिशों के बाद भी कांग्रेस इतनी सीटें भी इकठ्ठा नहीं कर पाई जिससे उसको लोकसभा में नेता विरोधी दल की कुर्सी मिल सके, लोकसभा चुनावों के बाद कर्नाटक की सत्ता भी हाथ से जाती रही और एक-एक कर कांग्रेस के नेता पार्टी का साथ छोड़ रहे हैं. राहुल गांधी के पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से इस्तीफे के बाद से ही पार्टी उहापोह में है, लाख कोशिशों के बाद पार्टी अब तक अध्यक्ष पद के लिए सर्वमान्य नेता नहीं तलाश पाई है, अब पार्टी में नया संकट अनुच्छेद 370 और जम्मू-कश्मीर  को लेकर है.


संसद और बाहर अलग-अलग है कांग्रेस की राय
जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 में संशोधन और राज्य के पूनर्गठन को लेकर कांग्रेस पार्टी मे मतभेद सार्वजिनक हो गया है, पार्टी सदन में भले ही मोदी सरकार के फैसले के खिलाफ हो लेकिन कांग्रेस के दिग्गज नेता पार्टी के इस फैसले के साथ नहीं है, ज्योतिरादित्य सिंधिया और जनार्दन द्विवेदी जैसे दिग्गज नेता सार्वजिन रुप से पार्टी के खिलाफ बयान दे चुके हैं, खबरे तो यहां तक आ रही है कि लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी के बयान पर यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी भी नाराज हैं. ऐसे में सवाल ये है कि आखिर पार्टी के शीर्ष नेतत्व की इस पूरे मामले में भूमिका क्या है क्योंकि राहुल गांधी ने भी इस पूरे मामले पर नपा-तुला बयान दिया है.


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संसद में सरकार के विरोध की ये है असली वजह


पार्टी के दो दिग्गज नेता राज्यसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता गुलाम नबी आजाद और लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी इस पूरे मामले पर खुलकर बोल रहे हैं. लेकिन आखिर क्यों ये जानने के लिए इन दोनों नेताओं की राजनीतिक जमीन को देखना पड़ेगा, गुलाम नबी आजाद जम्मू-कश्मीर तो खुद कश्मीर से आते हैं,जबकि अधीर रंजन चौधरी पश्चिम बंगाल से आते हैं दोनों राज्यों में कांग्रेस की राजनीति अल्पसंख्यक वोट बैंक पर टिकी है ऐसे में 370 हटाने का विरोध करना इन दोनों नेताओं की स्थानीय राजनीति की मजबूरी है.


क्या सिर्फ अल्पसंख्यक वोट के डर से सरकार का विरोध


ऐसा नहीं कि मजबूरी इन दोनों नेताओं के सामने ही है मजबूरी कांग्रेस नेतृतव के सामने भी है 2019 के लोकसूभा चुनावों में कांग्रेस ने जिन राज्यों में अच्छा प्रदर्शन किया उन सभी राज्यों में मजबूत अल्पसंख्यक वोट बैंक है ऐसे में पार्टी नहीं चाहेगी कि जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर पार्टी कोई ऐसी लाइन ले जिससे उसका ये कोर वोट बैंक नाराज हो जाए.


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