Analysis: बिना तैयारी UAPA बिल का विरोध कर Confuse दिखी कांग्रेस

UAPA बिल पर चर्चा के दौरान कांग्रेस एक बिंदु के विरोध में थी, लेकिन कांग्रेस ने पूरे बिल का विरोध किया. कांग्रेस नेताओं में आपस में संवाद की कमी भी दिखाई दी, बाद में कांग्रेस ने बिल का समर्थन भी कर दिया, कंफ्यूजन साफ दिखाई पड़ रहा था

Arun Singh | News18India
Updated: August 3, 2019, 3:53 PM IST
Analysis: बिना तैयारी UAPA बिल का विरोध कर Confuse दिखी कांग्रेस
कांग्रेस संसद में एक तरह से कंफ्यूज होकर चौराहे पर खड़ी दिख रही है
Arun Singh | News18India
Updated: August 3, 2019, 3:53 PM IST
कांग्रेस पार्टी संसद में बिना तैयारी और रणनीति के कुछ इस कदर कंफ्यूज है कि उसे कई बार पता ही नहीं होता कि किस तरफ जाना है. मतलब कांग्रेस संसद में एक तरह से कंफ्यूज होकर चौराहे पर खड़ी दिख रही है. हाल में ये बात उस समय सामने आई जब सदन में UAPA बिल पर बहस चल रही थी. कांग्रेस बिल के केवल एक प्रस्ताव से असहमत थी, लेकिन पार्टी ने संकेत ऐसे दिए मानो पूरे बिल के खिलाफ है. उसके बाद प्रस्ताव का समर्थन भी कर दिया. यानी समर्थन भी कर रहे हैं लेकिन ये बताकर कि विरोध कर रहे हैं.

UAPA बिल पर कांग्रेस की थी आपत्ति
राज्य सभा में लोकसभा से पास होकर आए आतंकरोधी बिल, 'अनलॉफुल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) अमेंडमेंट एक्ट 2019' (UAPA) पर चर्चा शुरू हुई. कांग्रेस के सदस्य कपिल सिब्बल, पूर्व गृहमंत्री पी चिदंबरम और वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने हिस्सा लिया. कांग्रेस के हर नेता ने बिल के कुछ प्रावधानों पर आपत्ति जताते हुए समूचे बिल का विरोध कर डाला. गृहमंत्री अमित शाह और दिग्विजय सिंह के बीच बहस भी हुई, चिदंबरम के साथ भी अमित शाह के सवाल जवाब हुए. कांग्रेस के वक्ताओं ने जिस तरह से बिल के कुछ बदलावों पर दलील दी उससे ये संदेश गया कि पार्टी बिल के विरोध में है.

बिल के केवल एक प्रस्ताव के खिलाफ थी कांग्रेस

दरअसल कांग्रेस किसी व्यक्ति को आतंकी घोषित करने के प्रस्ताव के खिलाफ थी, उसका तर्क था कि बिना ट्रायल के किसी व्यक्ति को कैसे आतंकी घोषित कर सकते हैं? ऐसा हुआ तो आप सरकार से असहमति रखने वाले किसी भी व्यक्ति को आतंकी घोषित कर देंगे. इसका जवाब देते हुए जब अमित शाह ने कहा कि ये प्रावधान इसलिए लाना पड़ा क्योंकि अगर हम किसी संगठन को आतंकी संगठन कह के प्रतिबंधित करते हैं तो वो तुरंत नाम बदल के दूसरा संगठन खड़ा कर देते हैं.

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अमित शाह के तर्कों से निरूत्तर हो गई कांग्रेस


अमित शाह की दलील पर चुप्पी साध ली
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अमित शाह ने कहा कि अगर ट्रायल के बाद आतंकी घोषित करेंगे तो हाफिज और दाऊद को हम कभी भी आतंकी घोषित नहीं कर पाएंगे. शाह ने कहा कि अगर आतंक में लिप्त किसी व्यक्ति को आतंकी घोषित कर दिया जाए तो वो हर जगह पकड़ा जाएगा और संगठन का नाम बदलने से कुछ नहीं होगा. अमित शाह के इस जवाब पर कांग्रेस ने चुप्पी साध ली मतलब पहले से तैयारी और चर्चा नहीं हुई थी.

तर्कविहिन कांग्रेस ने बिल के पक्ष में वोट दिया
इसके पहले सिब्बल और चिदंबरम दोनों ने कहा था कि इस बिल को कोई भी सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज कर देगा और ये बिल खारिज़ हो जाएगा. अमित शाह ने जब कांग्रेस नेताओं की आपत्तियों को एक एक कर खारिज़ कर दिया तब सभी बगलें झांकने लगे. यानी दो दिन की बहस में तमाम आपत्तियां उठाने वाली कांग्रेस अंत तक इतनी तर्कविहीन हो गई कि उसे बिल के पक्ष में वोट देना पड़ा.

बिना तैयारी के बहस में शामिल हुई कांग्रेस
मतलब ये है कि कांग्रेस के नेता सदन गुलाम नबी आजाद और बिल पर बोलने वाले नेताओं के बीच कोई तैयारी वाली बैठक ठीक से हुई ही नहीं. अगर कांग्रेस को बिल का आखिरकार समर्थन ही करना था तो सिर्फ कुछ प्रावधानों का विरोध करते लेकिन ये कहकर की वो बिल का समर्थन करते हैं. हुआ उल्टा बिल के विरोध करने के बाद अचानक बिल के पक्ष में वोटिंग का फैसला ले लिया. यानी बिल के पक्ष में वोट तो दिया लेकिन कांग्रेस बिल का विरोध कर रही है ये संदेश चले जाने के बाद. इसे कहते हैं माया मिली न राम. इस तरह चौराहे पर खड़ी कांग्रेस के कुछ नेताओं ने एक बार फिर पार्टी को पलीता लगवा दिया.

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First published: August 3, 2019, 3:53 PM IST
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