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खत्‍म नहीं हो रही कांग्रेस की आफत यूपी! राजस्‍थान, पंजाब के बाद अब जम्‍मू-कश्‍मीर में दो फाड़

खत्‍म नहीं हो रही कांग्रेस की आफत यूपी! राजस्‍थान, पंजाब के बाद अब जम्‍मू-कश्‍मीर में दो फाड़

कांग्रेस में खत्‍म नहीं हो रहा संकट का दौर. (File pic)

कांग्रेस में खत्‍म नहीं हो रहा संकट का दौर. (File pic)

Jammu Kashmir Congress: कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी और जम्मू-कश्मीर के प्रभारी सचिव रजनी पाटिल को भेजे गए इस्‍तीफे में नेताओं ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गुलाम अहमद मीर (Ghulam Ahmad Mir) द्वारा पार्टी का नेतृत्व करने के तरीके पर आपत्ति जताई है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि मीर पार्टी को संकट की ओर ले जा रहे थे. इस्‍तीफे में इन नेताओं ने आरोप लगाया है कि उन्हें प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व के शत्रुतापूर्ण रवैये के चलते यह कदम उठाना पड़ा.

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    नई दिल्‍ली. देश के 5 राज्‍यों के 2022 में होने वाले विधानसभा चुनावों (Assembly Elections 2022) की जंग से पहले ही कांग्रेस (Congress) को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. कांग्रेस का संकट कम होने का नाम नहीं ले रहा है. पहले से ही उत्‍तर प्रदेश, पंजाब और राजस्‍थान में संकट से जूझ रही कांग्रेस को अब जम्‍मू-कश्‍मीर (Jammu Kashmir) में बड़ा झटका लगा है. राज्‍य में कांग्रेस नेता  (Jammu Kashmir Congress) बड़ी संख्‍या में पार्टी का साथ छोड़ रहे हैं.

    कांग्रेस की जम्मू-कश्मीर इकाई के सात प्रमुख नेताओं ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को अपना त्यागपत्र भेजा और दावा किया है कि प्रदेश में उन्हें पार्टी से संबंधित मामलों को लेकर अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया गया. सूत्रों का कहना है कि इस्तीफा देने वाले नेताओं में से, चार पूर्व मंत्री और तीन पूर्व विधायक हैं. ये सभी पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद के करीबी हैं. पार्टी से इस्तीफा देने वाले नेताओं में जीएम सरूरी, जुगल किशोर, विकार रसूल और डॉक्टर मनोहर लाल शामिल हैं.

    कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी और जम्मू-कश्मीर के प्रभारी सचिव रजनी पाटिल को भेजे गए इस्‍तीफे में नेताओं ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गुलाम अहमद मीर द्वारा पार्टी का नेतृत्व करने के तरीके पर आपत्ति जताई है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि मीर पार्टी को संकट की ओर ले जा रहे थे. इस्‍तीफा पत्र में इन नेताओं ने आरोप लगाया है कि उन्हें प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व के शत्रुतापूर्ण रवैये के चलते यह कदम उठाना पड़ा.

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    उत्‍तर प्रदेश में भी संकट में कांग्रेस
    उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के कई प्रमुख लोगों ने पार्टी छोड़ दी है. वे इसके पीछे पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व पर सवाल उठाते हैं. इस साल अगस्त में पार्टी के वरिष्ठ सदस्यों शैलेंद्र सिंह और राजेश सिंह ने पार्टी पर पुराने और वफादार नेताओं की उपेक्षा किए जाने का आरोप लगाते हुए सोनिया गांधी को अपना इस्तीफा भेज दिया था.

    इसके बाद सितंबर में उत्तर प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष और पूर्व विधायक ललितेश पति त्रिपाठी के भी पार्टी छोड़ने की बात सामने आई. उन्‍हें भी यह लगा था कि उनकी उपेक्षा की जा रही है. वह अब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में शामिल हो गए हैं. अक्टूबर में उत्तर प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष और पूर्व विधायक गयादीन अनुरागी और पार्टी के पूर्व विधायक विनोद चतुर्वेदी ने समाजवादी पार्टी में शामिल होने के लिए पार्टी छोड़ दी. बाद में पूर्व सांसद हरेंद्र मलिक और उनके बेटे पंकज ने भी इस्तीफा दे दिया.

    प्रमुख राष्ट्रीय चेहरे छोड़ रहे पार्टी
    केवल राज्य के नेता ही नहीं, कांग्रेस अन्य दलों के मुकाबले प्रमुख राष्ट्रीय चेहरों को भी खो रही है. उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री जितिन प्रसाद ने बीजेपी में शामिल होने के लिए पार्टी छोड़ दी थी. मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया का छोड़ कर जाना भी बड़ा झटका था. अगस्त में सिलचर की पूर्व सांसद सुष्मिता देव के टीएमसी में शामिल होने के साथ पार्टी को एक और बड़ा नुकसान हुआ.

    पंजाब और राजस्‍थान का हाल
    पंजाब में चुनाव होने के महीनों पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह ने राज्य के मुख्यमंत्री के पद से यह कहते हुए इस्तीफा दे दिया था कि पार्टी आलाकमान को उन पर कोई भरोसा नहीं है. उन्‍होंने कहा था कि जाहिर है कि उन्हें (कांग्रेस आलाकमान) मुझ पर भरोसा नहीं है और मुझे नहीं लगता था कि मैं अपना काम संभाल सकता हूं. लेकिन जिस तरह से उन्होंने पूरे मामले को संभाला, उससे मैं अपमानित महसूस कर रहा था… उन्हें जिस पर भरोसा है, उन्हें नियुक्त करने दें.’

    चरणजीत चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया गया. जबकि नवजोत सिंह सिद्धू को प्रदेश कांग्रेस कमेटी का प्रमुख नियुक्त किया गया. लेकिन सिद्धू ने अपने पद इस्तीफा दे दियाय ऐसा कहा जाता है कि जहां सिद्धू अपने लिए शीर्ष पद चाहते थे, वहीं वह कैबिनेट नियुक्तियों से भी खुश नहीं थे. बाद में मनाने पर सिद्धू ने अपना इस्तीफा वापस ले लिया था. कांग्रेस भले ही आग बुझाने में कामयाब रही हो, लेकिन पंजाब में अभी सब कुछ ठीक नहीं है.

    राजस्थान कांग्रेस के साथ-साथ पार्टी की राज्य में कैबिनेट में फेरबदल की भी योजना है. सचिन पायलट और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कथित तौर पर इस पर आमने-सामने नहीं हैं. पायलट और गहलोत दोनों ने दिल्ली में सोनिया गांधी से मुलाकात की है, जिससे संकट की अटकलें तेज हो गई हैं.

    हालांकि एक मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि हालांकि एक संघर्ष पर विराम लग सकता है. रिपोर्ट में इस सप्ताह की शुरुआत में पायलट के हवाले से कहा गया है, ‘राज्य मंत्रिमंडल में कुछ जगहें हैं जिन्हें भरने की जरूरत है और एक संतुलन स्थापित करने की जरूरत है.’ पायलट ने यह भी उम्मीद जताई कि उनके अनुभव को ध्यान में रखते हुए कैबिनेट नियुक्तियां की जाएंगी.

    जम्‍मू-कश्‍मीर के नेताओं के क्‍या हैं आरोप
    इन नेताओं का कहना है कि वे पिछले करीब एक साल से ज्ञापन के माध्यम से पार्टी नेतृत्व से मिलने का समय मांग रहे थे, लेकिन उन्हें समय नहीं दिया गया. उन्होंने अगस्त 2021 में राहुल गांधी के जम्मू-कश्मीर दौरे पर व्यक्तिगत रूप से पार्टी आलाकमान से मिलने का अनुरोध किया था, लेकिन कुछ नहीं हुआ. मीर पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि मीर के अध्यक्ष रहते हुए पार्टी बहुत दयनीय स्थिति की तरफ बढ़ रही है और पार्टी के बहुत सारे नेता इस्तीफा देकर दूसरे दलों में शामिल हो गए, जबकि कुछ ने खामोश रहने का फैसला किया है. उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस के कामकाज पर कुछ नेताओं ने कब्जा जमा रखा है.

    मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस छोड़ने वाले प्रमुख नामों में गुलाम नबी मोंगा, नरेश गुप्ता, मोहम्मद अमीन भट, सुभाष गुप्ता, जीएम सरूरी, विकार रसूल, प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष अनवर भट और पूर्व जिला अध्यक्ष अन्यातुल्लाह राथर शामिल हैं. यह घटनाक्रम ऐसे समय आया है जब कांग्रेस ने न केवल कई प्रमुख नेताओं को देश भर में पार्टी छोड़ते हुए देखा है, बल्कि कुछ राज्यों में पार्टी सदस्यों के बीच सार्वजनिक गुटबाजी भी देखी है.

    Tags: Congress, Rahul gandhi, Sonia Gandhi

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