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कांग्रेस के G-23 में 'टूट': चिट्ठी लिखने वाले चार नेता बोले- पार्टी के खिलाफ गतिविधियां बर्दाश्त नहीं

कांग्रेस के जी-23 समूह के चार नेताओं ने अपने साथियों के आचरण पर आपत्ति जताई है. (फाइल)

कांग्रेस के जी-23 समूह के चार नेताओं ने अपने साथियों के आचरण पर आपत्ति जताई है. (फाइल)

Rift in Congress: कांग्रेस के जी-23 समूह के चार नेताओं ने अपने साथियों के आचरण पर आपत्ति जताई है. उन्होंने कहा है कि जहां तक चिट्ठी की बात है वह उससे सहमत हैं, लेकिन पार्टी के खिलाफ गतिविधियां गलत हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 4, 2021, 10:52 AM IST
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नई दिल्ली. कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखने वाले जी-23 समूह के चार नेताओं ने अपने साथियों के आचरण पर आपत्ति जताई है. उन्होंने कहा है कि जहां तक चिट्ठी की बात है वह उससे सहमत हैं, लेकिन अपनी कुछ सीमाएं होनी चाहिएं. चिट्ठी लिखने वाले नेताओं में से एक पूर्व उपसभापति पीजे कुरियन ने कहा कि वह कांग्रेस में सुधार के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन हमें अपनी लक्ष्मण रेखा नहीं भूलनी चाहिए.

जी-23 के कुछ नेता - गुलाम नबी आज़ाद, आनंद शर्मा, कपिल सिब्बल, मनीष तिवारी, भूपिंदर सिंह हुड्डा, राज बब्बर और विवेक तन्खा पिछले हफ्ते जम्मू में थे. उन्होंने एक संयुक्त सार्वजनिक बैठक को संबोधित किया, जहां पार्टी नेतृत्व में आज़ाद जैसे 'अनुभवी' नेता का उपयोग नहीं करने और राज्यसभा से उन्हें सेवानिवृत्त होने देने पर हमला बोला गया.

सम्मेलन के एक दिन बाद जहां शनिवार को गुलाम नबी आजाद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की तो वहीं आनंद शर्मा ने सोमवार को बंगाल इकाई के ISF से गठबंधन के फैसले पर निशाना साधा. सूत्रों का कहना है कि ऐसी ही एक बैठक अब हरियाणा या हिमाचल में हो सकती है.



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लक्ष्मण रेखा का हमेशा पालन करना होगा- कुरियन
अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार पीजे कुरियन ने कहा, 'उनकी गतिविधियां कांग्रेस को मजबूत करने की हद तक ठीक हैं लेकिन यह असंतुष्टों की गतिविधि नहीं बननी चाहिए. निश्चित रूप से, कांग्रेस में सुधार की आवश्यकता है… और अगर गतिविधियां उस दिशा में हैं तो मैं इसके साथ हूं. उन्हें यह बात ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ना चाहिए. मुझे जम्मू के घटना की जानकारी नहीं है. जब मुझे पूरी जानकारी मिल जाएगी, तभी मैं कह सकता हूं कि यह एक असंतुष्टों की गतिविधि थी या पार्टी को मजबूत करने का प्रयास था. हमें लक्ष्मण रेखा का हमेशा पालन करना होगा.'

पूर्व लोकसभा सांसद संदीप दीक्षित ने कहा, 'कोई समूह नहीं है. 23 नेताओं ने पत्र पर हस्ताक्षर किए थे.  अब वे क्या कर रहे हैं ... ये 5-6 कुछ कर रहे होंगे. यह एक समूह नहीं है. यह सिर्फ उन लोगों की जगह है जिन्होंने एक राय जाहिर की. हम उस राय  के साथ खड़े हैं. अब समूह के लोग या समूह के भीतर बने समूह क्या कर रहे हैं, यह वो जानें.'' दीक्षित ने कहा कि उन्हें विश्वास नहीं है कि आजाद ने मोदी की प्रशंसा की. पूर्व सांसद ने कहा, 'आजाद से पूछना होगा. मैं उनके संपर्क में नहीं हूं.'

'सोनिया गांधी के नेतृत्व पर पूरा भरोसा'
मध्यप्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय सिंह ने कहा, 'सभी मंचों के चुनाव के संबंध में जो मुद्दे उठाए गए थे. उसमें मैं एक हिस्सा हूं. मुझे यह कहने में कोई दिलचस्पी नहीं है कि प्रधानमंत्री बहुत अच्छे हैं. हमारी चिट्ठी  पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र के लिए थी. मुझे सोनिया गांधी के नेतृत्व पर पूरा भरोसा है, यह बात पत्र में भी कही गई है.'

इसके साथ ही पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एम वीरप्पा मोइली ने कहा कि यह पत्र सीमित उद्देश्य के लिए था. मोइली ने कहा, 'जी 23 जी 20 जैसी संस्था नहीं है. जब पांच राज्यों के लिए चुनाव होने वाले हैं, तो पार्टी से संबंधित किसी भी मामले पर चर्चा करने के लिए यह उपयुक्त समय नहीं है. जैसे ही हमने ज्ञापन दिया, मैडम सोनिया गांधी ने तुरंत कार्य समिति की बैठक बुलाई.'
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