इन 5 वजहों से तेलंगाना में जल्द चुनाव कराना चाहते हैं KCR, बनाई 105 उम्मीदवारों की लिस्ट

राज्यपाल से मुलाकात के बाद केसीआर ने प्रेस कांफ्रेंस की, जिसमें उन्होंने विधानसभा चुनाव के लिए 105 उम्मीदवारों की सूची भी जारी कर दी है.

News18Hindi
Updated: September 6, 2018, 10:04 PM IST
इन 5 वजहों से तेलंगाना में जल्द चुनाव कराना चाहते हैं KCR, बनाई 105 उम्मीदवारों की लिस्ट
केसीआर ने राज्यपाल ईएसएल नरसिम्हन को अपना इस्तीफा भी सौंप दिया है,
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Updated: September 6, 2018, 10:04 PM IST
तेलंगाना में तय समय से पहले चुनाव कराने के सियासी रणनीति के बीच मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव (KCR) ने गुरुवार (6 सितंबर) को कैबिनेट मीटिंग की और विधानसभा भंग करने का फैसला लिया. केसीआर ने इसके साथ ही राज्यपाल ईएसएल नरसिम्हन को अपना इस्तीफा भी सौंप दिया है, जिसे राज्यपाल ने मंजूर भी कर लिया है. राज्यपाल से मुलाकात के बाद केसीआर ने प्रेस कांफ्रेंस की, जिसमें उन्होंने विधानसभा चुनाव के लिए 105 उम्मीदवारों की सूची भी जारी कर दी है. इन सबके बीच बड़ा सवाल ये है कि आखिर केसीआर तेलंगाना में जल्द चुनाव कराना क्यों चाहते हैं?

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दरअसल, राज्य विधानसभा का कार्यकाल मई 2019 में लोकसभा के साथ पूरा हो रहा. ऐसे में अगला लोकसभा चुनाव के साथ ही कराया जाना है, लेकिन केसीआर चाहते हैं कि इस साल के आखिर में 4 में होने वाले विधानसभा चुनाव के साथ ही तेलंगाना के चुनाव करा लिए जाएं. साल के अंत में राजस्थान, मध्य प्रदेश, छ्त्तीसगढ़ और मिजोरम में एक साथ विधानसभा चुनाव होने हैं.

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, केसीआर के तेलंगाना में तय समय से पहले चुनाव कराने को लेकर ये 5 वजहें हैं:-

1##कांग्रेस की आधी-अधूरी तैयारी
दरअसल, राज्य में सत्ताधारी तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) विधानसभा और लोकसभा चुनाव अलग-अलग कराए जाने में राजनीतिक लाभ देख रही है. टीआरएस प्रमुख और कार्यवाहक सीएम केसीआर चाहते हैं कि अचानक विधानसभा भंग करा दिए जाने से चुनाव की तैयारियों के लिए विपक्षी दलों को ज्यादा मौका न मिले. केसीआर को इस बात बखूबी एहसास है कि राज्य में आज की तारीख में विपक्ष के पास उनके बराबर का कोई भी नेता नहीं है. लोकसभा चुनाव से पहले विधानसभा चुनाव कराए जाने से उन्हें खासी मेहनत नहीं करनी पड़ेगी और अपनी छवि का राज्यस्तरीय चुनाव में फायदा उठा सकेंगे. लिहाजा टीआरएस प्रमुख केसीआर ऐसा रिस्क नहीं लेना चाहेंगे.

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2##जनता के समर्थन को भुनाना
केसीआर चुनाव में जनता के समर्थन को भुनाना भी चाहते हैं. हाल के दिनों में केसीआर ने राज्य के लोगों के लिए कई लोक-लुभावनी परियोजनाएं शुरू करने का ऐलान किया है. ताकि, वोट बैंक को 'पक्का' किया जा सके. केसीआर को लगता है कि आम चुनाव के दौरान राष्ट्रीय मुद्दा हावी रह सकता है. मुख्य मुकाबला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी के बीच होने के कारण स्थानीय मुद्दों की जगह राष्ट्रीय मुद्दे जगह बना सकते हैं जिससे स्थानीय पार्टियों को नुकसान उठाना पड़ सकता है. लेकिन, अगर चुनाव उससे पहले हो जाते हैं, तो मुकाबला सीमित होगा.

3##अच्छा मॉनसून
तेलंगाना में इसबार मॉनसून की अच्छी बारिश हुई है. केसीआर ने मॉनसून के मद्देनज़र किसानों के लिए 'ऋतु बंधु स्कीम' लॉन्च की थी. जिसके तहत सरकार ने कृषि कार्यों के लिए 58 लाख किसानों को दो इंस्टॉलमेंट में 8-हजार रुपये दिए थे. केसीआर सरकार को इस स्कीम का सकारात्मक प्रभाव मिल रहा है. केसीआर को लगता है कि अगर इसी साल अक्टूबर-नवंबर में चुनाव हो जाते हैं, तो लोक-लुभावनी परियोजनाओं की बदौलत उन्हें जनता का साथ मिलेगा.

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4##लोकसभा-विधानसभा चुनाव एक साथ होने का रिस्क
अगर केसीआर चुनाव के लिए अगले साल अप्रैल तक रुकते हैं, तो आम चुनाव के माहौल में राज्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का फैक्टर तेलंगाना समेत शेष भारत में फैल सकता है. कांग्रेस वहां पर मुख्य विपक्षी दल है और पार्टी राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर देती है, तो लोकसभा वोटिंग के दौरान विधानसभा वोटिंग पर इसका असर पड़ सकता है. लोकसभा चुनाव से पहले राज्य में विधानसभा चुनाव कराए जाते हैं तो ऐसे में मुख्यमंत्री राव को दोनों चुनाव की तैयारियों के लिए भरपूर समय मिल जाएगा.

5##किंगमेकर केसीआर
सियासी रणनीति के तहत केसीआर आने वाली संभावनाओं को भांपते हुए सेफ गेम खेलने के मोड में हैं. तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के मुखिया और मुख्यमंत्री राव को इस बात का डर है कि साल के अंत में 4 राज्यों (राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मिजोरम) में होने वाले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस अच्छा प्रदर्शन करती है, तो 2019 में आम चुनाव में कांग्रेस को लेकर माहौल बनने का खतरा बन सकता है, जो टीआरएस के लिए खतरनाक साबित हो सकता है.

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माना जा रहा है कि इस समय पार्टी की जो मजबूत स्थिति जनता के बीच है उसका फायदा चुनाव में देखने को मिलेगा. सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ने एक सर्वे भी करवाया है, जिसके मुताबिक समय से पहले चुनाव होने से टीआरएस को 119 सीटों में से 78 सीटें मिल सकेंगी, जो कि मैजिक फिगर से अधिक है

2014 में मिली थीं 63 सीटें
बता दें कि मई 2014 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में केसीआर की पार्टी तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) ने 119 सीटों में से 63 जीती थीं. इस बार देखना दिलचस्प होगा कि सीएम केसीआर की ओर से 6 सितंबर को विधानसभा भंग करने का फैसला सही साबित होता है या उन्हें इसपर पछताना पड़ेगा.
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