जम्मू-कश्मीर बार एसोसिएशन अध्यक्ष की हिरासत पर केंद्र ने कहा- शर्त्तों के साथ किया जा सकता है रिहा

जम्मू-कश्मीर बार एसोसिएशन अध्यक्ष की हिरासत पर केंद्र ने कहा- शर्त्तों के साथ किया जा सकता है रिहा
सुप्रीम कोर्ट बुधवार को मामले पर सुनवाई करेगा.(फाइल फोटो)

जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) को जानकरी देते हुए कहा कि कयूम की हिरासत को 6 अगस्त के बाद बढ़ाया नहीं जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कयूम को जमानत पर रिहा किया जा सकता है और जमानत की शर्त के तौर पर कहा जा सकता है कि वो 7 अगस्त तक कश्मीर नहीं जाएंगे बल्कि दिल्ली में ही रहेंगे और वह कोई भी बयान जारी नहीं करेंगे.

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नई दिल्ली. सार्वजनिक सुरक्षा कानून (Public Saftey Act) के तहत जम्मू-कश्मीर बार एसोसिएशन (Jammu Kashmir Bar Association) के प्रेसीडेंट मियां अब्दुल कयूम को हिरासत में रखने में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सुनवाई हुई. जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट को जानकरी देते हुए कहा कि कयूम की हिरासत को 6 अगस्त के बाद बढ़ाया नहीं जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कयूम को जमानत पर रिहा किया जा सकता है और जमानत की शर्त के तौर पर कहा जा सकता है कि वो 7 अगस्त तक कश्मीर नहीं जाएंगे बल्कि दिल्ली में ही रहेंगे और वह कोई भी बयान जारी नहीं करेंगे. कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर से इस पर सुझाव देने के लिए कहा है. सुप्रीम कोर्ट बुधवार को मामले पर सुनवाई करेगा.

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के हिरासत की अवधि बढ़ाने के लेकर जवाब मांगा था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि कयूम की नजरबंदी समाप्त हो चुकी है और वह 73 वर्ष के हैं. कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल को इस पर गौर करने को कहा था. सार्वजनिक सुरक्षा कानून के तहत अपनी नजरबंदी को खत्म करने के लिए कयूम ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है. याचिकाकर्ता के लिए सीनियर वकील दुष्यंत दवे ने जम्मू कश्मीर प्रशासन द्वारा मांगे गए समय का विरोध किया और कहा कि एक साल की हिरासत पहले ही खत्म हो चुकी है. जस्टिस के के कौल ने जम्मू और कश्मीर प्रशासन से कहा कि हिरासत की अवधि समाप्त हो गई है. पहले की प्राथमिकी 2010 के आसपास थी उसके बाद कुछ भी नहीं.

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कयूम ने दी है हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती
कोर्ट ने कहा था कि कोरोना वायरस महामारी का समय चल रहा है और वह हिरासत की अवधि समाप्त होने के साथ 73 साल के हैं. इस मामले पर गौर किया जाना चाहिए. कयूम ने हाईकोर्ट के 28 मई के फैसले की वैधता को चुनौती दी और हिरासत के खिलाफ उसकी याचिका खारिज कर दी.

कयूम के वकील ने दिया ये तर्क
73 साल मियां कयूम की तरफ़ से एक वरिष्ठ वकील ने तर्क दिया कि हाईकोर्ट का आदेश गैरकानूनी और असंवैधानिक था क्योंकि वर्ष 2008 और 2010 में उनके खिलाफ दर्ज चार एफआईआर पर भरोसा करते हुए ये किया गया जो गलत है. सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में नोटिस जारी करते हुए तिहाड़ जेल के अधिकारियों को यहां निर्देश दिया था, जहां कयूम फिलहाल मौजूद हैं, जिससे उन्हें गर्मियों के कपड़े और अन्य जरूरी चीजें मुहैया कराई जा सकें.
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