अवमानना केस: प्रशांत भूषण के ट्वीट्स पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- क्या इन्हें हटाने के लिए हमारे आदेश का इंतजार कर रहा ट्विटर?

अवमानना केस: प्रशांत भूषण के ट्वीट्स पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- क्या इन्हें हटाने के लिए हमारे आदेश का इंतजार कर रहा ट्विटर?
सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बुधवार को सुझाव दिया कि ट्विटर (Twitter ) को वकील प्रशांत भूषण (Prashant Bhushan) द्वारा किये गये दो विवादास्पद ट्वीट्स को डिसएबल कर देना चाहिए.

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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बुधवार को सुझाव दिया कि ट्विटर को वकील प्रशांत भूषण द्वारा किये गये दो विवादास्पद ट्वीट्स को डिसएबल कर देना चाहिए. इन ट्वीट्स पोस्ट करने को लेकर ट्विटर और भूषण (Prashant Bhushan) को अवमानना ​का नोटिस जारी किया गया था. जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने विवादित ट्वीट डिलीट करने के लिए अदालत के आदेश के इंतजार को लेकर ट्विटर इंक पर सवाल उठाया.

ट्विटर की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश वकील सजन पूवैया से पीठ ने कहा - 'आप इसे अपने दम पर क्यों नहीं कर सकते? हमारे द्वारा अवमानना की​​ कार्यवाही शुरू करने के बाद भी क्या आप औपचारिक आदेश की प्रतीक्षा करना चाहते हैं? हमें लगता है कि हम इस पर कोई आदेश पारित नहीं करेंगे और इसे आपकी बुद्धिमता पर छोड़ते हैं.'

सुनवाई की तारीख पांच अगस्त, प्रशांत भूषण को नोटिस
इस पर पुवैया ने कहा कि वह समझ गए कि अदालत क्या कह रही है और वह अपने क्लाइंट को इस बारे में बताएंगे. उन्होंने कहा, ' जब अदालत ने इस मामले में संज्ञान लिया है, तो मुझसे जो भी कहा जा रहा है वह संदेश मैं अपने क्लाइंट को दे दूंगा.' पीठ ने एक्टिविस्ट और वकील को कारण बताओ का औपचारिक नोटिस भी जारी किया और सुनवाई की अगली तारीख 5 अगस्त तक उसका जवाब मांगा.
अपने आदेश में पीठ ने दर्ज किया कि अदालत ने भूषण द्वारा दो विवादास्पद सोशल मीडिया पोस्ट का स्वतः संज्ञान लिया. भूषण के दो ट्वीट्स में से एक 27 जून का है जिसमें उन्होंने अघोषित आपातकाल और सुप्रीम कोर्ट की भूमिका और बीते 4 CJI के बारे में ट्वीट किया था. दूसरा ट्वीट 29 जून का था जिसमें भूषण ने 'अदालत को बंद रखने' और 'न्याय तक पहुंच से वंचित रखने' पर पोस्ट किया था.
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