Home /News /nation /

एक बार फिर विवादों में मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा

एक बार फिर विवादों में मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा

प्रतीकात्मक चित्र

प्रतीकात्मक चित्र

विवाद तह से उठा है जबसे मुख्य न्यायाधीश के चार विरोधी जजों ने प्रेस कांफ्रेंस कर मुख्य न्यायधीश पर आरोप लगाया था. उनका कहना था कि मुख्य न्यायाधीश अपनी पसंद के मामले कुछ चुनिंदा जजों को भेजते हैं.

  • News18.com
  • Last Updated :
    एहतेशाम खान

    सुप्रीम कोर्ट और मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा एक बार फिर विवादों में आ गए हैं. इस बार सुप्रीम कोर्ट के ही दो जजों के अलावा कुछ जाने माने न्यायविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जस्टिस मिश्रा की तीखी आलोचना की है.

    बुधवार को मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली तीन जजों की पीठ ने फैसला दिया था कि मुख्य न्यायधीश ही सुप्रीम कोर्ट के मुखिया है. वह अकेले तय करेंगे की कौन सा मुकदमा किस जज को सुनवाई के लिए दिया जायेगा, और संविधान पीठ के गठन में कौन जज रहेंगे.

    दरअसल इस मुद्दे पर तब से बहस हो रही है जब मुख्य न्यायाधीश के चार विरोधी जजों ने प्रेस कांफ्रेंस कर मुख्य न्यायधीश पर आरोप लगाया था. उनका कहना था कि मुख्य न्यायाधीश अपनी पसंद के मामले कुछ चुनिंदा जजों को भेजते हैं.

    इसके बाद पूर्व कानून मंत्री और सीनियर वकील शांति भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की और इस बाबत कई मांगे रखी. उन्होंने मांग की कि सुप्रीम कोर्ट एक नियम बनाए की किस तरह के मामले किस जज को भेजे जाएंगे. साथ ही ये तय करने का अधिकार सिर्फ मुख्य न्यायाधीश के बजाए कोल्लिजिम के पांच सीनियर जजों को दिया जाये. उन्होंने ये मांग रखी कि उनकी याचिका की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश न करें क्योंकि ये मामला उनसे जुड़ा है. कोई भी जज खुद अपना फैसला नहीं कर सकता.

    लेकिन उस याचिका को सुनवाई के लिए अभी तक मंज़ूर नही किया गया है. गुरुवार को इसकी शिकायत शांति भूषण की तरफ से वकील प्रशांत भूषण ने जस्टिस चेलामेश्वर की अदालत में की. उन्होंने ने कहा कि शांति भूषण की याचिका को दरकिनार करने के लिए ही किसी और याचिका पर आनन फानन में फैसला दे दिया गया. जबकि इस मुद्दे पर विस्तृत बहस होनी चाहिए थी.

    जस्टिस चेलामेश्वर ने प्रशांत भूषण को दो टूक जवाब देते हुए मुख्य न्यायाधीश की भूमिका पर सवाल खड़ा कर दिया.जस्टिस चेलामेश्वर ने कहा कि मैं आप की याचिका नहीं सुन सकता और इसकी वजह जग ज़ाहिर है. मैं नहीं चाहता की मैं कोई फैसला दूँ और उसे 24 घंटे में पलट दिया जाये.

    इससे पहले जस्टिस चेलामेश्वर ने मेडीकल कॉलेज घोटाले की जाँच की सुनवाई करने को स्वीकार कर ली थी। लेकिन बाद में मुख्य न्यायाधीश ने इस मामले को किसी और जज के पास भेज दिया। और सिर्फ दो घण्टे के अंदर पाँच जजों की पीठ का गठन किया। इस पीठ ने घंटे भर की सुनवाई के बाद तय कर दिया की मुख्य न्यायधीश ही सारा काम तय करेंगे।

    इस परिपेक्ष में गुरुवार को जस्टिस चेलामेश्वर ने कहा "देश अपना रास्ता खुद ढूंढ लेगा. मैं अपने रिटायरमेंट के समय इस में नही पड़ना चाहता." जस्टिस चेलामेश्वर की तीखी टिपण्णी के बाद प्रशांत भूषण अपनी गुहार लगाने मुख्य न्यायाधीश के पास गए जहां मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि वह इस मामले को देखेंगे.

    जुस्टिस चेलामेश्वर का ये हमला अकेला नही है. इससे पहले जस्टिस कुरियन जोसेफ ने भी मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिख कर सुप्रीम कोर्ट में अपॉइंटमेंट का मामला उठाया. सुप्रीम कोर्ट ने तीन महीने पहले हाई कोर्ट के जज जस्टिस के.एम. जोसेफ और वकील इंदु मल्होत्रा की सुप्रीम कोर्ट में नियूक्ति की सिफारिश की थी. लेकिन सरकार जस्टिस जोसेफ की नियुक्ति नहीं करना चाहती.

    इस पर जस्टिस कुरियन जोसफ ने लिखा "सुप्रीम कोर्ट का अस्तित्व खतरे में है. अगर कोर्ट सरकार के दबाव में रही तो इतिहास हमे माफ़ नहीं करेगा. कोई भी जज सरकार के खिलाफ आदेश देने से डरेगा".

    सुप्रीम कोर्ट के बुधवार के फैसले की कुछ बड़े न्यायविद और समाजसेवियों ने भी कड़ी आलोचना की है. इन में जस्टिस पी बी सावंत, जस्टिस एच सुरेश, शांति भूषण, कामनी जैस्वाल, अरुंधति रॉय शामिल हैं.

    Tags: Supreme Court

    विज्ञापन

    राशिभविष्य

    मेष

    वृषभ

    मिथुन

    कर्क

    सिंह

    कन्या

    तुला

    वृश्चिक

    धनु

    मकर

    कुंभ

    मीन

    प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
    और भी पढ़ें
    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर