भगवान राम की मूंछों पर विवाद: अयोध्या के राम मंदिर में अब आस्था बनाम जाति की लड़ाई

भगवान राम की मूंछों पर विवाद: अयोध्या के राम मंदिर में अब आस्था बनाम जाति की लड़ाई
उग्र हिंदुत्ववादी नेता संभाजी भिडे की फाइल फोटो

उग्र हिंदुत्ववादी के नेता भिडे ने मांग की कि क्षत्रिय समुदायों (Kshatriya communities) के पुरुषों के बीच सदियों पुरानी रणप्रिय परंपरा (martial convention) को ध्यान में रखते हुए भगवान राम और लक्ष्मण की मूर्तियों (idols of Lord Ram and Lakshman) को मूंछें रखनी चाहिए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 9, 2020, 6:29 PM IST
  • Share this:
(धवल कुलकर्णी)

मुंबई. इससे पहले कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में राम मंदिर के भूमि पूजन (Ram Mandir Bhoomi Pujan) समारोह में शामिल होते, हिंदुत्वादी नेता संभाजीराव भिडे गुरुजी (Sambhajirao Bhide Guruji) ने एक अजीब मांग कर दी. भिडे एक ऐसे नेता हैं, जिनके बारे में कहा जाता है कि उनकी प्रशंसा पीएम मोदी भी करते हैं. अस्सी साल से अधिक की उम्र के नेता ने, जो 'शिवप्रतिष्ठान हिंदुस्तान’ (Shivaprathisthan Hindustan) के अध्यक्ष हैं और सामूहिक लामबंदी के लिए छत्रपति शिवाजी महाराज (Chatrapati Shivaji Maharaj) की छवि का उपयोग करते हैं, उन्होंने मांग की थी कि मंदिर में भगवान राम (Lord Ram) की मूर्ति की मूंछ अवश्य होनी चाहिए.

हिंदुत्ववादी नेता भिडे ने मांग की कि क्षत्रिय समुदायों (Kshatriya communities) के पुरुषों के बीच सदियों पुरानी रणप्रिय परंपरा (martial convention) को ध्यान में रखते हुए भगवान राम और लक्ष्मण की मूर्तियों की मूंछें रखनी चाहिए. भिडे ने कहा कि उन्होंने इस बारे में श्री राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र के ट्रस्ट (Shri Ram Janmabhoomi Teertha Kshetra trust) के गोविंद गिरी महाराज से भी बात की थी और कहा था कि यदि मूर्तियों में मूंछ नहीं हुई, तो उनके जैसे भक्तों के लिए मंदिर का कोई मूल्य नहीं होगा.



अयोध्या के राम लला मंदिर के मुख्य पुजारी ने खारिज की भिडे की मांग
भिडे के समर्थकों का कहना है कि नासिक के तीर्थस्थलों जैसे कालाराम मंदिर जैसे मंदिरों में भगवान राम और लक्ष्मण की मूर्तियों के मूंछ हैं. ऐसी ही एक और मूर्ति काशी में प्रतिष्ठित है. वे दावा करते हैं कि फिल्मों और टेलीविजन धारावाहिकों में भगवान के चेहरे का बिना दाढ़ी-मूंछ का चित्रण शुरू किया गया था इसलिए अयोध्या में (जो राम के जन्मस्थान के रूप में प्रतिष्ठित हैं) मूर्तियों को चीजें सही करके प्रदर्शित करनी चाहिए.

इस मांग को अयोध्या में राम लला मंदिर के मुख्य पुजारी महंत सत्येंद्र दास ने खारिज कर दिया है, जिन्होंने दावा किया है कि जो लोग इस पर जोर दे रहे हैं, वे हिंदू धर्म के बारीक पहलुओं से परिचित नहीं हैं. दास ने दावा किया कि देवता राम, कृष्ण और शिव की आयु 16 वर्ष थी और कहा कि मूंछों वाली ऐसी मूर्तियों के लिए कोई पूर्व की मिसाल नहीं है.

यह भी पढ़ें: नहीं मान रहे ओली, कहा- नेपाल में ही है अयोध्या, मेरे पास हैं सबूत, करें प्रमोट

भिड़े के विरोधियों ने उन पर अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से मुसलमानों को निशाना बनाने और शिवाजी महाराज को बदनाम करने के लिए इतिहास को विकृत और हथियार बनाने का आरोप लगाया, जो 17 वीं सदी के योद्धा-राजा की उपलब्धियों को दिखाता है. वे भिडे पर आरोप लगाते हैं कि भिडे एक ब्राह्मण, जो शिवाजी की छवि का उपयोग करके बहुजन (गैर-ब्राह्मण) युवाओं को उकसाते हैं. (यह लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं.)
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज