एक वेंटिलेटर से 2 मरीजों का इलाज करती है ये मशीन, कोरोना काल में साबित होगी वरदान

वर्तमान में उपयोग किए जाने वाले वेंटिलेटर पर एक समय में केवल एक व्यक्ति का ही इलाज किया जा सकता है,

वर्तमान में उपयोग किए जाने वाले वेंटिलेटर पर एक समय में केवल एक व्यक्ति का ही इलाज किया जा सकता है,

वर्तमान में उपयोग किए जाने वाले वेंटिलेटर पर एक समय में केवल एक व्यक्ति का ही इलाज किया जा सकता है, लेकिन इस परियोजना की मुख्य विशेषता यह है कि एक ही समय में 2 मरीजों का आसानी से इलाज किया जा सकता है.

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अहमदाबाद. कोरोना की दूसरी लहर के बीच अस्पताल में वेंटिलेटर की कमी देखी जा रही है. वेंटिलेटर की कमी को देखते हुए गुजरात के छात्रों ने ऐसी मशीन बनाई है जो एक से दो मरीजों का इलाज कर सकती है. गुजरात के बारडोली में एसएन पटेल इंजीनियरिंग कॉलेज के यांत्रिक विभाग के छात्रों ने एक प्रोटोटाइप विकसित किया है जो कोरोना महामारी से निपटने के लिए एक ही वेंटिलेटर पर दो मरीजों का इलाज कर सकता है.

प्रोटोटाइप के बारे में जानकारी देते हुए छात्रों ने बताया कि कोविड-19 स्थिति में हमेशा वेंटिलेटर की कमी रहती है और वर्तमान में उपयोग किए जाने वाले वेंटिलेटर बहुत महंगे हैं और उनका उत्पादन समय भी अधिक है, इसलिए हमारे प्रोजेक्ट का उद्देश्य है कम लागत में और कम समय में बड़े पैमाने पर वेंटिलेटर का उत्पादन किया जा सके.

पोर्टेबल और कॉम्पैक्ट वेटिंलेटर

वर्तमान में उपयोग किए जाने वाले वेंटिलेटर पर एक समय में केवल एक व्यक्ति का ही इलाज किया जा सकता है, लेकिन इस परियोजना की मुख्य विशेषता यह है कि एक ही समय में 2 मरीजों का आसानी से इलाज किया जा सकता है.  इस परियोजना में वेंटिलेटर पोर्टेबल और कॉम्पैक्ट है. ताकि वेंटिलेटर को आसानी से स्थानांतरित किया जा सके और मरीज इस सुविधा के कारण घर पर इलाज भी कर सके. यह वेंटिलेटर गंभीर रूप से बीमार कोविड -19 रोगियों के जीवन को बचाने के लिए आवश्यक कार्य और आवश्यक श्वास सहायता प्रदान कर सकता है.
छात्रों ने इस प्रोटोटाइप को प्रोडक्ट में बदलने और परियोजना को पेटेंट कराने के उद्देश्य से स्टूडेंट स्टार्टअप इनो वेसन नीति में अनुदान के लिए आवेदन किया है. एक बार अनुदान आवंटित होने के बाद, वे एक विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में प्रोटोटाइप को प्रोडक्ट में बदल देंगे. यदि इस प्रोटोटाइप को सफलतापूर्वक एक उत्पाद में बदल दिया जाता है, तो इसका उपयोग भविष्य में एक समय में दो से अधिक रोगियों के इलाज के लिए किया जा सकता है. छात्रों का कहना है कि प्रोटोटाइप को प्रोडक्ट में बदलने की लागत बहुत कम है.

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