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50 देश, 23 करोड़ डोज़ : भारत ने 'वैक्सीन मैत्री' के जरिए ऐसे लड़ी कोरोना से जंग, निभाई दोस्ती

कोरोना वैक्सीन के निर्माण में भारत एक मजबूत ताकत की तरह उभरा है. (फाइल फोटो साभार सोशल मीडिया)

कोरोना वैक्सीन के निर्माण में भारत एक मजबूत ताकत की तरह उभरा है. (फाइल फोटो साभार सोशल मीडिया)

Vaccine maitri: भारत ने 'वैक्सीन मैत्री' पहल के तहत दो साल के अंदर दुनियाभर के करीब 50 देशों को 23 करोड़ से ज्यादा कोरोना वैक्सीन भेजी हैं. इसमें से 1.50 करोड़ वैक्सीन देशों को बतौर दान दी गईं. सीरम इंस्टीट्यूट अकेला कोवैक्स को कोविशील्ड की करीब 150 करोड़ डोज की आपूर्ति कर चुका है.

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(हिमानी चांदना) 

नई दिल्लीः भारत ने कोविड-19 महामारी के खिलाफ अपने देशवासियों के लिए ही लड़ाई नहीं लड़ी बल्कि दुनिया का साथ देकर मानवता को बचाने के लिए भी सबसे आगे खड़ा रहा. डेटा बताता है कि भारत की ‘वैक्सीन मैत्री’ पहल के तहत दो साल के अंदर दुनियाभर के करीब 50 देशों को 23 करोड़ से ज्यादा कोविड-19 वैक्सीन भेजी गईं. 2020 में जब महामारी के खिलाफ दुनिया एकजुट हुई तो सबकी निगाहें भारत की ओर थी क्योंकि वैक्सीन निर्माण के मामले में भारत सबसे सशक्त ताकत बनकर उभरा है.

ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) के वैक्सीन ट्रैकर से मिले डेटा के मुताबिक, करीब 17.30 करोड़ डोज व्यापारिक तौर पर बेची गईं जबकि 4.45 करोड़ डोज विश्व स्वास्थ्य संगठन समर्थित कोवैक्स प्लेटफार्म की प्रतिबद्धता के लिए भेजी गईं. डेटा बताता है कि करीब 1.50 करोड़ वैक्सीन दान के तौर पर देशों को दी गईं. वैक्सीन की ये डोज अफ्रीका के 33 देशों, एशिया के 9 देशों और अमेरिका के दो (बोलिविया और निकारागुआ), ओसिनिया (पापुआ न्यू गिनी और सोलोमन आइलैंड) और पश्चिम एशिया (सीरिया और यमन) में वितरित की गईं.

दुनिया की 60% वैक्सीन भारत में बनती हैं
दुनिया में वैक्सीन का लगभग 60 फीसद उत्पादन भारत करता है. संयुक्त राष्ट्र की वार्षिक वैक्सीन खरीद का 60-80 फीसद हिस्सा भी भारत से जाता है. यहां तक कि कोविड के आने से पहले से ही भारत की कंपनियां दुनिया के लिए वैक्सीन बनाने और बांटने में मदद करती रही हैं. ओआरएफ में कोविड ट्रैकर का नेतृत्व करने वाली मोना ने न्यूज 18 को बताया कि कोरोना के खिलाफ भारत की कम लागत वाली वैक्सीन बनाने की क्षमता उसके बड़े पैमाने पर आयोजित टीकाकरण कार्यक्रम से भी साबित हो चुकी है.

‘भारत की वैक्सीन ज्यादा भरोसेमंद’
मोना ने कहा कि 2021 में शुरुआत में सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया की कोरोना वैक्सीन कोविशील्ड पर अत्यधिक निर्भरता की वजह से आपूर्ति प्रभावित हुई थी. लेकिन आज भी तमाम तरह की वैक्सीन और उन्हें बनाने वाली कई कंपनियों में भारत में बनी वैक्सीन को दुनिया में सबसे भरोसेमंद माना जाता है. सीरम इंस्टीट्यूट अकेला कोवैक्स को कोविशील्ड की करीब 150 करोड़ डोज की आपूर्ति कर चुका है. यही नहीं, क्वाड साझेदारी के तहत भारत-प्रशांत क्षेत्र में बायोलॉजिकल ई की वैक्सीन कोर्बेवैक्स की करीब 1 अरब डोज की सप्लाई का फैसला लिया गया है. उन्होंने कहा कि इस वक्त एकमात्र चुनौती ये है कि कोर्बेवेक्स भारत में 15-17 आयु वर्ग के लिए स्वीकृत एकमात्र वैक्सीन है, ऐसे में भारत को ये देखना होगा कि वह इसे देश में सप्लाई करे या विदेश भेजे.

कोवैक्स से कोरोना वैक्सीन का समान वितरण
कोवैक्स की स्थापना विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अप्रैल 2020 में यह सुनिश्चित करने के लिए की थी कि दुनियाभर में कोरोना वैक्सीन का वितरण समान रूप से हो. खासतौर पर निम्न और निम्न-मध्यम अर्थव्यवस्था वाले देशों में जहां कोविड का टीका बनाने का इन्फ्रास्ट्रक्चर या क्षमता नहीं है. अप्रैल 2021 में जब कोविड-19 की दूसरी लहर ने भारत में तबाही मचाई थी, उस दौरान भारत ने वैक्सीन मैत्री कार्यक्रम के तहत कोवैक्स की प्रतिबद्धता को रोक दिया था. ये फैसला तब भारत में डेल्टा वेरियंट के घातक असर से नागरिकों को बचाने के लिए और देश में टीकाकरण की प्राथमिकता दिए जाने की वजह से लिया गया था. बाद में 2021 नवंबर में कोवैक्स को सप्लाई फिर से शुरू कर गई.

कोवैक्स में भारत ने भेजी 4.46 करोड़ डोज़
विदेश मंत्रालय के 22 जून, 2022 तक के आंकड़ों के अनुसार, कोवैक्स के तक भारत की तरफ से 4.46 करोड़ डोज़ भेजी जा चुकी हैं. इनमें से सबसे ज्यादा 3.3 करोड़ अफ्रीकी देशों में बांटी गई हैं. अफ्रीका के तीन देश नाइजीरिया (96 लाख), इथियोपिया (42 लाख) और घाना (26 लाख) को सबसे ज्यादा वैक्सीन दी गईं. इसके अलावा भारत के पड़ोसी देश नेपाल को 63 लाख, बांग्लादेश को 43 लाख, अफगानिस्तान को 4.7 लाख, श्रीलंका को 2.6 लाख और मालद्वीप को 10,000 वैक्सीन भेजी गईं.

भारत ने दान में भी दी कोरोना वैक्सीन
मोना ने बताया कि कोवैक्स के जरिए केवल भारत से केवल कोविशील्ड ही भेजी गई है. कोवैक्सीन और कोवोवैक्स केवल व्यापारिक समझौते और दान के जरिए ही दी गई हैं. म्यामांर और भूटान जैसे पड़ोसी देशों को भी व्यापारिक समझौते और दान में भारत से वैक्सीन मिली हैं. कोविशील्ड बनाने वाली पुणे स्थित सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन निर्माता कंपनी हैं. 50 साल पुरानी यह कंपनी महामारी से पहले हर साल करीब 1.5 अरब वैक्सीन डोज बनाती थी. पोलियो, डिप्थीरिया, टिटनेस, पर्ट्युसिस और बीसीजी जैसी वैक्सीन बनाने में इस कंपनी को महारत हासिल है.

Tags: Corona, Corona vaccine, COVID 19

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