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संक्रमित लोगों के पास रहने का यह मतलब नहीं कि कोरोना हो ही जाए, रिसर्च में कोरोना नहीं होने का कारण पता चला

संक्रमित लोगों के पास रहने का यह मतलब नहीं कि कोरोना हो ही जाए, रिसर्च में कोरोना नहीं होने का कारण पता चला

. टी सेल्स संक्रमित सेल्स को मार सकती है और गंभीर बीमारी होने से बचा भी सकती है. (Shutterstock)

. टी सेल्स संक्रमित सेल्स को मार सकती है और गंभीर बीमारी होने से बचा भी सकती है. (Shutterstock)

Corona news update: दुनिया भर में कोरोना (Corona cases) का विस्फोट हो गया है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक पिछले 24 घंटों में 17.36 लाख नए मामले सामने आए हैं. इतने अधिक मामले आने के बावजूद इस बार पूरे विश्व में उस तरह का पैनिक नहीं है जिस तरह की अफरा तफरी पिछले साल अप्रैल में मची थी. इस बीच वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्ति के पास रहने से जरूरी नहीं है कि उसे कोरोना हो ही जाए. क्योंकि उसके शरीर में पहले से विकसित टी कोशिका बीमारी से बचाने में महत्वपूणर्ण भूमिका निभाती है.

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नई दिल्ली. दुनिया भर में कोरोना (Corona cases) का विस्फोट हो गया है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक पिछले 24 घंटों में 17.36 लाख नए मामले सामने आए हैं. इतने अधिक मामले आने के बावजूद इस बार पूरे विश्व में उस तरह का पैनिक नहीं है जिस तरह की अफरा तफरी पिछले साल अप्रैल में मची थी. हालांकि अमेरिका, यूरोप सहित कई देशों में कोरोना के नए मामलों में तेज वृद्धि हो रही है. इसके बावजूद इन देशों में नियमों में ढील दी जाने लगी है. ऐसा आखिर क्यों हो रहा है. वैज्ञानिक ने इसका संभावित कारण खोज निकाला है. इंपीरियल कॉलेज लंदन (Imperial College London) के शोधकर्ताओं ने अपनी रिसर्च में यह पाया है कि इस बार कुछ लोगों में कोरोना होने का जोखिम बहुत कम है.

शरीर में टी कोशिका की महत्वपूर्ण भूमिका
शोधकर्ताओं ने कहा है कि दरअसल, सामान्य सर्दी-जुकाम से लड़ने के लिए लोगों के शरीर में रक्षात्मक इम्यून सेल्स का स्तर बहुत बढ़ गया है, जिसके कारण कोविड-19 संक्रमण का जोखिम बहुत कम हो गया है. सोमवार को प्रकाशित रिपोर्ट में दावा किया गया कि जिन लोगों को पहले कभी कोरोना नहीं हुआ, उनके शरीर में सामान्य सर्दी-जुकाम से लड़ने के लिए टी सेल्स (T cells) के स्तर में काफी वृद्धि हो गई, इसलिए कोरोना संक्रमित व्यक्ति के साथ रहते हुए भी इन लोगों को कोरोना नहीं हुआ. इस अध्ययन को नेचर कम्युनिकेशन जर्नल में प्रकाशित किया गया है.

कोरोना वायरस के संपर्क में आने का मतलब यह नहीं कि हमेशा कोरोना ही हो जाए
इंपीरियल नेशनल हार्ट एंड लंग्स इंस्टीट्यूट की रिया कुंदू (Rhia Kundu) ने बताया कि अगर कोई व्यक्ति सार्स कोविड -2 वायरस (SARS-CoV-2 virus) के संपर्क में आता है, तो इसका मतलब यह नहीं कि उसे हमेशा कोरोना हो ही जाए. हालांकि ऐसा क्यों होता है, अभी इसका पूरा कारण पता नहीं चला है लेकिन हमें बहुत जल्दी इसके कारण का पता चल जाएगा. फिलहाल हमने अपनी रिसर्च में पाया है कि शरीर में पहले से बनी टी कोशिकाओं का उच्च स्तर कोरोना वायरस से रक्षा में महत्वपूर्ण रूप से काम करता है. यह टी कोशिका सामान्य सर्दी से रक्षा करने के दौरान बनती है.

टी कोशिकाएं संक्रमित सेल्स को मार गिराती है
ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने 52 लोगों के सैंपल का परीक्षण करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला है. ये लोग कोरोना संक्रमित व्यक्ति के साथ रह रहे थे. लेकिन इनमें से आधे को कोरना नहीं हुआ. उन्होंने अध्ययन में पाया कि इसमें टी कोशिकाओं की प्रतिरक्षात्मक भूमिका होती है. यह अन्य तरह के कोरोना वायरस से संपर्क में आने के दौरान बनी थी. वैज्ञानिकों ने कहा कि एंटीबॉडी की तुलना में टी सेल्स के ज्यादा समय तक जीवित रहने की संभावना है. यही कारण है कि उनमें टी सेल्स तो बहुत पहले विकसित हो गया लेकिन उसका असर बहुत बाद तक रहा. टी सेल्स संक्रमित सेल्स को मार सकती है और गंभीर बीमारी होने से बचा भी सकती है.

Tags: Corona, Corona Cases, Health, Research

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