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कोरोना के बाद बेचैनी और निराशा बनी बड़ी परेशान, इन तरीकों को अपनाकर दूर करें जिंदगी का खालीपन

कोरोना के बाद बेचैनी और निराशा बनी बड़ी परेशान, इन तरीकों को अपनाकर दूर करें जिंदगी का खालीपन

अधिकांश लोगों के जीवन में हताशा, निराशा, बेचैनी और खालीपन का एक बुरा दौर आ गया है. (Shutterstock)

अधिकांश लोगों के जीवन में हताशा, निराशा, बेचैनी और खालीपन का एक बुरा दौर आ गया है. (Shutterstock)

Corona side effect: कोरोना के बाद दुनिया भर के लोगों में निराशा और सुस्ती की भावना बढ़ी है. लोग बेचैन और खालीपन महसूस कर रहे हैं. एक इंटरनेशनल स्टडी में दुनिया भर के 10 प्रतिशत लोगों को इस तरह की हताशा का शिकार होना पड़ रहा है. इसमें व्यक्ति भवनात्मक रूप से बहुत कमजोर हो जाता है और जीवन के प्रति निरुत्साह होने लगा है. इसमें मूड बहुत निचले स्तर पर आ जाता है और जीवन के प्रति निराशा की भावना बढ़ जाती है. कुछ उपाय अपनाकर इसे दूर किया जा सकता है.

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नई दिल्ली. कोरोना महामारी (Covid pandemic) के बाद लोग भावनात्मक (Emotionally) तौर पर बहुत कमजोर हुए हैं. अधिकांश लोगों के जीवन में हताशा, निराशा, बेचैनी और खालीपन का एक बुरा दौर आ गया है जिसके कारण जीवन के प्रति निरुत्साह या उत्साहविहीन होने लगे हैं. एक तरह से जीवन में निस्तेज या लैग्विशिंग आने लगा है. यह स्थिति languishing कहलाता है. यानी ऐसी स्थिति जिसमें कुछ भी करने का मन नहीं करता और जीवन सुस्त हो जाता है. जीवन में खालीपन बढ़ जाता है. एक तरह से यह भावनात्मक रूप से जीवन का यथास्थितिवाद है. इसमें आदमी के सामने कोई लक्ष्य नहीं रहता है और लंबे समय तक हमेशा मूड लो रहता है. हालांकि इस स्थिति को अब तक मानसिक स्वास्थ्य (mental health) में शामिल नहीं किया गया है लेकिन अगर इससे छुटकारा न मिले तो इसका परिणाम एंग्जाइटी (Anxiety) और डिप्रेशन (Depression) के रूप में सामने आता है.

दुनिया भर के 10 प्रतिशत लोग इस भावना के शिका हैं
कोरोना के बाद अधिकांश लोग या तो इस स्थिति का सामना कर चुके हैं या वर्तमान में भी कर रहे हैं. जीवन के प्रति निराशा की यह भावना क्यों विकसित हो रही है इसके बारे में हम खुद नहीं जानते हैं. लेकिन एक इंटरनेशनल स्टडी में कहा गया है कि दुनिया भर के 10 प्रतिशत लोग निरुत्साह की इस भावना के शिकार हैं और उनका जीवन ठहर सा गया है. उन्हें खालीपन सता रहा है. पिछले साल अप्रैल और जून में 78 देशों से जुटाए गए आंकड़ों के आधार पर यह अध्ययन किया गया था. अध्ययन के मुताबिक हताशा की यह भावना अलग-अलग लोगों में अलग-अलग तरह से होती है. इसके कई कारक भी है. स्ट्रेस, सदमा और रूटीन में परिवर्तन भी इसके कारक हो सकते हैं. हालांकि अगर कुछ उपाय शुरू किए जाए तो इस निराशा को जीवन से भगाया जा सकता है.

दूसरों के साथ भावनात्मक लगाव जरूरी
अध्ययन में कहा गया है कि जीवन का निस्तेज या लैग्विशिंग डिप्रेशन से पूर्व की स्थिति है. हालांकि यह साथ-साथ भी हो सकता है. दोनों कई मायनों में अलग अलग होते हैं तो कई मायनों में एक समान होते हैं. अध्ययन में कहा गया है कि कुछ उपाय अपना कर इसे दूर किया जाता है. अपनों के साथ या लोगों के साथ भावनात्मक लगाव जीवन के इस खालीपन को दूर भगा सकता है. आप इसके लिए लोगों के प्रति दयालुता दिखा सकते हैं. दूसरों के दुख दर्द को दूर कर सकते हैं. आप चाहें तो ऑफिस में अपने साथी के काम को आसान कर सकते हैं. उनकी मदद कर सकते हैं. कहीं वॉलेंटियर का काम कर सकते हैं. जितना आपको दूसरों के साथ सकारात्मक रिश्ता होगा, इससे आपको उतना ही निजात मिलेगा.

ग्रेटीट्यूट राइटिंग भी दे सकता है मदद
इसके अलावा ग्रेटीट्यूट राइटिंग भी इससे दूर होने में आपको मदद कर सकता है. ग्रेटीट्यूट राइटिंग में दिन भर आपको जितने लोगों ने मदद की है, जितने लोगों ने आपके साथ सकारात्मक बातचीत की है, जितने लोगों ने आपकी तारीफ की है, उत्साहवर्धन किया, वह सब आप एक डायरी में उतारें. इसमें सकारात्मक बातों को लिखें और सबको धन्यवाद करें कि आपके कारण आज यह सब हुआ है.

Tags: Corona, Depression, Health

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