गुजरात सरकार को कोर्ट की फटकार, कहा-हमारी सुनते तो नहीं आती कोरोना की सुनामी

गुजरात उच्च न्यायालय ने राज्‍य सरकार को लगाई फटकार.

गुजरात उच्च न्यायालय ने राज्‍य सरकार को लगाई फटकार.

गुजरात उच्च न्यायालय (Gujarat High Court)ने कहा, रेमडेसिविर दवा उपलब्ध है, लेकिन सरकार इसे नियंत्रित कर रही है. लोग इसे क्यों नहीं खरीद सकते? सुनिश्चित करें कि यह हर जगह उपलब्ध हो. रेमडेसिविर की कोई कमी नहीं है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 16, 2021, 5:58 PM IST
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अहमदाबाद. गुजरात उच्च न्यायालय (Gujarat High Court) ने राज्य में कोविड-19 (Covid-19) की स्थिति और लोगों को हो रही कठिनाइयों को लेकर सोमवार को राज्य सरकार की खिंचाई करते हुए कहा कि वास्तविकता, सरकारी दावों के विपरीत है. मुख्य न्यायाधीश विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति भार्गव कारिया की खंड पीठ ने राज्य में कोरोना वायरस (Coronavirus) की स्थिति पर एक जनहित याचिका पर स्वत: संज्ञान लेते हुए कहा, लोग अब मान रहे हैं कि वे भगवान की दया पर हैं. कोर्ट ने कहा, हमारी सुनते तो कोरोना की सुनामी नहीं आती.

उच्च न्यायालय ने विवाह समारोह में अतिथियों की संख्या मौजूदा 100 के बजाय 50 तक सीमित करने, अंतिम संस्कार में लोगों की संख्या सीमित करने, सभी तरह के जमवाड़ों पर रोक लगाने, कार्यालयों में कर्मचारियों की संख्या सीमित करने तथा हर सोसायटी में अधिकारियों के साथ समन्वय करने के लिए एक व्यक्ति नामित करने जैसे कुछ सुझाव भी दिए. गुजरात में पिछले दो दिन से रोजाना पांच हजार से अधिक मामले रिपोर्ट हो रहे हैं.

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महाधिवक्ता कमल त्रिवेदी ने उच्च न्यायालय को उन कदमों के बारे में जानकारी दी जो राज्य सरकार ने कोविड-19 की स्थिति से निपटने के लिए उठाए हैं लेकिन पीठ ने अधिकतर स्पष्टीकरण स्वीकार करने से इनकार दिया. इनमें अस्पतालों में बेड और एंटी वायरल दवा रेमडेसिविर की उपलब्धता शामिल है. वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए की गई सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने कहा, आप जो दावा कर रहे हैं, स्थिति उससे काफी अलग है. आप कह रहे हैं कि सबकुछ ठीक है, लेकिन वास्तविकता उसके विपरीत है. पीठ ने कहा कि लोगों में विश्वास की कमी है.


अदालत ने कहा, लोग सरकार को कोस रहे हैं और सरकार लोगों को कोस रही है. यह मदद नहीं करेगा. हमें संक्रमण की इस श्रृंखला को तोड़ने की जरूरत है. कुछ मीडिया खबरों में दावा किया गया है कि रेमडेसिविर की किल्लत है और लोग इस इंजेक्शन को प्राप्त करने के लिए एक अस्पताल के बाहर कतार में खड़े हैं, जिस पर त्रिवेदी ने अदालत को बताया कि जिन लोगों को इस दवाई की जरूरत नहीं है, वे भी एहतियाती उपाय के तहत इसे खरीदने की कोशिश कर रहे हैं.

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गुजरात सरकार रोजाना 25 हजार रेमडेसिविर इंजेक्शन खरीद रही है

उन्होंने कहा कि यदि मरीज का घर पर इलाज चल रहा है या उसमें संक्रमण का कोई लक्षण नहीं है और वह गंभीर नहीं है तो उसे रेमडेसिविर की जरूरत नहीं है. इंजेक्शन की आपूर्ति भी कम है. त्रिवेदी ने कहा, सिर्फ सात कंपनियां इसे बनाती हैं. इसका उत्पादन 1.75 लाख शीशी प्रति दिन है. हम गुजरात के लिए रोजाना 25000 इंजेक्शन खरीद रहे हैं. उच्च न्यायालय ने पूछा कि जब लोग इस दवाई के लिए यहां और वहां भाग रहे हैं तब सरकार रेमडेसिविर की आपूर्ति को क्यों नियंत्रित कर रही है और यहां तक कि यह इंजेक्शन निर्दिष्ट अस्पतालों में भी नहीं है.

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हर जगह उपलब्‍ध होनी चाहिए रेमडेसिविर

अदालत ने कहा, दवा उपलब्ध है, लेकिन सरकार इसे नियंत्रित कर रही है. लोग इसे क्यों नहीं खरीद सकते? सुनिश्चित करें कि यह हर जगह उपलब्ध हो. रेमडेसिविर की कोई कमी नहीं है. आपके पास सबकुछ उपलब्ध है. हम नतीजे चाहते हैं, कारण नहीं. कोविड-19 जांच पर अदालत ने कहा कि प्रयोगशालाएं आरटी-पीसीआर जांच रिपोर्ट देने में कई दिन का समय ले रही है. पीठ ने कहा कि इससे पहले तो आरटी-पीसीआर की जांच रिपोर्ट आठ, 10 या 12 घंटे में मिल जाती थी और अब यह करीब पांच दिन में मिल रही है.

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अदालत ने गुजरात सरकार को लगाई फटकार

जब त्रिवेदी ने कहा कि जांच रिपोर्ट मिलने में देरी इसलिए हो रही है, क्योंकि प्रयोगशालाओं को हर दिन बड़ी संख्या में नमूने मिल रहे हैं, तो उच्च न्यायालय ने टिप्पणी की, यह इसलिए हो रहा क्योंकि आपके पास बुनियादी ढांचा नहीं है. आपने केंद्र नहीं बढ़ाए. पीठ ने सरकार की यह भी दावा स्वीकार नहीं किया कि अस्पतालों में पर्याप्त बिस्तर उपलब्ध हैं. महाधिवक्ता ने लॉकडाउन की संभावना को लेकर अपनी आशंकाएं जताई और कहा कि यह गरीब और प्रवासी कामगारों की कठिनाई बढ़ाएगा.
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