COVID-19 in Mumbai: कोरोना की दूसरी लहर से मुंबई बेहाल, सबसे बड़े कोविड अस्पताल में भी कोई बेड खाली नहीं

मुंबई का नेस्को कोरोना अस्पताल.

मुंबई का नेस्को कोरोना अस्पताल.

Coronavirus 2nd Wave: मुंबई के सबसे बड़े कोविड सेंटर NESCO अस्पताल के ICU Ward के हालात देखने लायक नहीं थे. हर बेड पर कोरोना मरीज जिंदगी और मौत की जंग लड़ते नजर आए.

  • Last Updated: April 21, 2021, 1:27 PM IST
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मुंबई. मुंबई में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के बीच कैसी है सरकारी अस्पताल की हालत. मुंबई के सबसे बड़े कोविड सेंटर NESCO अस्पताल के अंदर का जायजा News 18 India ने लिया. वेंटिलेटर से लेकर ICU और जनरल वार्ड में सारे बेड मरीजों से भरे पड़े हैं. डॉक्टरों की जुबानी सरकारी अस्पताल की कहानी...

आज हम आपको दिखाने जा रहे है मुंबई के सबसे बड़े कोरोना अस्पातल में कैसे मरीजों का तांता लगा है. कैसे एक-एक बेड पर मरीज जिंदगी और मौत से जंग लड़ रहे हैं. News 18 India की टीम पहुंची मुंबई के सबसे बड़े कोरोना के अस्पताल NESCO जम्बो कोविड सेंटर में. इस अस्पताल में दो हजार बेड हैं जो आज की तारीख में लगभग पूरी तरह से भरे हुए हैं. हम अपनी पूरी तैयारी के साथ PPE किट पहन कर कोरोना अस्पताल में अंदर गए.

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अंदर आते ही सबसे पहले ICU ward में पहुंचे. जहां के हालात देखने लायक नहीं थे. हर बेड पर कोरोना मरीज जिंदगी और मौत की जंग लड़ते नजर आए. हालात काफी खराब, कोई भी बेड खाली नहीं, कुल 15 ICU के सारे बेड मरीजों से भरे पड़े थे, हर वॉर्ड में 15 बेड... डॉक्टर ने कहा, 'इस बार हालात काफी खराब हैं, देख सकते हैं की बेड खाली नहीं हैं, यहां पर हर मरीज क्रिटिकल है, हम हमारी पूरी कोशिश करते है कि सबको बचा लें, हर कोई 12-15 घंटे से काम कर रहा है.'
एक-एक कर हमने 15 ICU वार्ड में से तीन वार्ड का जायजा लिया, सभी की हालात खराब, सारे वार्ड कोरोना मरिजों से भरे पड़े थे. ICU के बाद हम पहुंचे HDU वार्ड में. यहां पर मरीजों की संख्या काफी ज्यादा थी. HDU वार्ड में उन मरीजों को रखा जाता है, जो ICU के मरीजों के मुकाबले कम गंभीर होते हैं. हालांकि यह पर भी मरीज ऑक्सिजन लगाए बैठे हैं. सारे HDU वार्ड की भी वही हालत है, कोई बेड खाली नहीं.

दवाई रखने वाले स्टोर रुम से डॉक्टरों और वार्ड बॉय की भागम-भाग जारी है, मरीजों तक दवाईयां पहुंचाना सबसे बड़ा चैलेंज है. डॉक्टर ने कहा, 'काफी बड़ा चैलेंज हो गया है. हम दिन-रात काम कर रहे हैं. इस बार सच में हालात काफी खराब हैं. इसकी वजह लोगों की लापरवाही है. लोग बाहर निकले, उनको लगा की कोरोना खत्म हो चुका है. यह सब लापरवाही का ही नतीजा है.'

हम आपको शव गृह की तस्वीरें नहीं दिखाना चाहते थे, पर हम इसलिए दिखा रहे है ताकि लोग समझें कि कोरोना कितनी खतरनाक बीमारी है, कैसे यह बीमारी एक पूरे परिवार को खत्म कर सकती है. वार्ड गर्ल प्रियंका ने कहा, 'हमें भी नहीं अच्छा लगता है कि किसी की मौत के बाद भी उनके परिजन उनका अंतिम संस्कार न कर सके, पर डेड बॉडी में ज्यादा वायरस होता है, इसलिए सब कुछ हमें ही करना पड़ता है.'



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जनरल वार्ड से सबसे पहले कोरोना मरीज अपना Registration कराता है. फिर मरीज को जनरल वार्ड में शिफ्ट करते हैं. दो हजार वाले जनरल वार्ड में भी शायद ही कोई बेड खाली हो, पूरा जनरल वार्ड मरीजो से भरा पड़ा है. दूसरे हॉल में और बेड लगानी की तैयारी चल रही है. इस बार ऑक्सीजन की पाईप लाईन भी बिछाई जा रही है.

नेस्को जम्बो कोविड सेंटर की डीन डॉ नीलम अंद्राडे के मुताबिक, 'मरीज काफी ज्यादा हैं, बेड खाली नहीं हैं, ऑक्सीजन की सारी जरुरतें हम पूरी कर रहे हैं, स्टाफ क्रंच है, मरीज ज्यादा होने से प्रेशर काफी ज्यादा है, पर हम अपनी जिम्मेदारी से अपना काम कर रह हैं.'
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