6 महीने में कोरोना से एक करोड़ से ज्यादा लोग संक्रमित, अब तक नहीं मिले इन 6 सवालों के जवाब

देश में कोविड संक्रमितों की संख्या 7 लाख पार कर गई है.
देश में कोविड संक्रमितों की संख्या 7 लाख पार कर गई है.

साइंस जर्नल नेचर (Nature) ने दुनिया के वैज्ञानिकों के हवाले से एक स्टडी रिपोर्ट पब्लिश की है. इसमें कोरोना वायरस (Covid-19 Pandemic) को लेकर 6 सवालों का जिक्र किया गया है. आइए जानते हैं आखिर क्या हैं वो 6 सवाल:-

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नई दिल्ली. कोरोना वायरस महामारी (Covid-19 Pandemic) बड़ी भारत समेत दुनियाभर के लिए अब तक की सबसे बड़ी चुनौती बनती जा रही है. छह महीनों में पूरी दुनिया में 1.19 करोड़ से ज्यादा लोग कोरोना महामारी की चपेट में आ चुके हैं. वर्ल्डोमीटर के मुताबिक, दुनिया में एक करोड़ 19 लाख 41 हजार से ज्यादा लोग संक्रमित हैं, जबकि मरने वालों की संख्या पांच लाख 45 हजार के पार पहुंच गई है. वहीं, देश में कोविड संक्रमितों की संख्या 7 लाख पार कर गई है. हालांकि, अब तक वैज्ञानिक अभी तक कोविड-19 को लेकर 6 सवालों के जवाब नहीं खोज पाए हैं.

साइंस जर्नल नेचर (Nature) ने दुनिया के वैज्ञानिकों के हवाले से एक स्टडी रिपोर्ट पब्लिश की है. इसमें कोरोना वायरस को लेकर 6 सवालों का जिक्र किया गया है. स्टडी में कहा गया है कि इन सवालों के जवाब खोजे बिना इस महामारी को काबू में नहीं किया जा सकता. आइए जानते हैं आखिर क्या हैं वो 6 सवाल:-

1##कोरोना वायरस आखिर कहां से आया?
>> कोरोना वायरस को लेकर अभी तक सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ये कहां से आया? अभी तक यही मानते हैं कि यह चमगादड़ से आया, क्योंकि एक कोरोना वायरस आरएटीजी 13 चमगादड़ से आया है. दोनों की जीनोम संरचना 96 फीसदी मिलती है. सवाल ये है कि अगर कोरोना वायरस चमगादड़ से सीधे इंसान में पहुंचा है, तो वायरस के जीनोम में 4 फीसदी का अंतर कैसे है? वैज्ञानिकों का मानना है कि 4 फीसदी बदलाव में लंबा वक्त लगता है. लिहाजा ऐसा लगता है कि कोरोना वायरस चमगादड़ से पहले किसी दूसरे जानवर में गया. वहां से फिर इंसान में आया. हालांकि, अभी ये साबित नहीं किया जा सका है.
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2##क्या हमें कोरोना का वैक्सीन मिलेगा और क्या ये काम करेगा?
>>6 महीनों में कोरोना वायरस दुनियाभर में एक करोड़ से ज्यादा लोगों को संक्रमित कर चुका है. इसकी वैक्सीन के लिए दुनिया में 200 प्रोजेक्ट चल रहे हैं. इनमें से सिर्फ 20 वैक्सीन ह्यूमन ट्रायल तक पहुंचे हैं. अभी तक इन वैक्सीन के एनिमल-बर्ड टेस्टिंग और शुरुआती ह्यूमन ट्रायल से यही नतीजा निकलता है कि यह फेफड़ों को संक्रमण से बचाने में कारगर है. यानी इस वैक्सीन से निमोनिया तो नहीं होगा, लेकिन बीमारी का संक्रमण वैक्सीन से नहीं रुकेगा. वैक्सीन पर तो कई देश काम कर रहे हैं, लेकिन इनमें से सबसे पहले लंदन के ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी का टीका आ सकता है, लेकिन सिर्फ वह फेफड़ों का संक्रमण बचा पाएगा.

3##कोरोना से कुछ लोग ज्यादा बीमार हो रहे हैं और बाकी कम, ऐसा क्यों?
>>इस वायरस का मानव शरीर पर अलग-अलग प्रभाव है. बीमार और बूढ़ों को छोड़ भी दें, तो यह स्पष्ट हो चुका है कि एक ही उम्र, समान शारीरिक क्षमता के दो लोगों को वायरस संक्रमित करे, तो दोनों पर इसका प्रभाव अलग-अलग होता है. अब ऐसा क्यों हो रहा है. इसका फिलहाल पता नहीं चल पाया है. इटली और स्पेन के 4000 लोगों के जीनोम की स्टडी करने के बाद कहा है कि जिन लोगों पर वायरस का गंभीर प्रभाव हुआ, उनमें एक या दो अतिरिक्त जीन हो सकते हैं. जेनेटिक कारणों पर रिसर्च जारी है.

4##दुनिया के किसी हिस्से में वायरस ज्यादा घातक और किसी हिस्से में कम घातक क्यों है?
>>कोरोना वायरस में बदलावों को लेकर कई स्टडी की गई है. इनमें छोटे बदलावों के संकेत तो मिले हैं, लेकिन इन मामूली बदलावों से वायरस की कार्यप्रणाली कैसे बदल रही है और वह कैसे घातक हो रहा है, इसका पता नहीं चल रहा.
5##संक्रमित होने के बाद कोविड के खिलाफ कब तक इम्यूनिटी बनी रहेगी?
>> अन्य कोरोना वायरस के मामले में यह कुछ महीनों की ही पाई गई. इसलिए आज भी कोविड-19 के बाद संक्रमितों में उत्पन्न एंडीबॉडीज पर स्टडी करके यह जानने की कोशिश की जा रही है कि वे कितने समय तक बीमारी से प्रतिरक्षा प्रदान कर सकते हैं.

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6##सर्दी के मौसम में क्या होगा?
>>कोरोना वायरस गर्मी या धूप की तरह नहीं है, जो समय के साथ चली जाती है. वायरस सर्दियों के मौसम में भी अटैक कर सकता है. क्योंकि आमतौर पर सर्दी के मौसम में इम्यूनिटी वीक वाले लोग ज्यादातर बीमार पड़ने लगते हैं. ऐसे में सर्दी के मौसम में इस महामारी से क्या हालत होगी, इसका जवाब नहीं मिल पाया है.
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