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क्या हैं एंटीबायोटिक, स्टेरॉयड और पैरासीटामॉल, जानें इस्तेमाल से लेकर साइड इफेक्ट्स तक सबकुछ

क्या हैं एंटीबायोटिक, स्टेरॉयड और पैरासीटामॉल, जानें इस्तेमाल से लेकर साइड इफेक्ट्स तक सबकुछ

टैबलेट्स, सिरप और लिक्विड, इन्हेलर्स, नेजल स्प्रे, इंजेक्शन, क्रीम, लोशन और जैल स्टेरॉयड के मुख्य प्रकार हैं. अगर स्टेरॉयड्स को कम समय के लिए या छोटे डोज में लिया जाए, तो इनके खास साइड इफेक्ट्स नहीं होते. (सांकेतिक तस्वीर: Shutterstock)

टैबलेट्स, सिरप और लिक्विड, इन्हेलर्स, नेजल स्प्रे, इंजेक्शन, क्रीम, लोशन और जैल स्टेरॉयड के मुख्य प्रकार हैं. अगर स्टेरॉयड्स को कम समय के लिए या छोटे डोज में लिया जाए, तो इनके खास साइड इफेक्ट्स नहीं होते. (सांकेतिक तस्वीर: Shutterstock)

Coronavirus Treatment New Guidelines: सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के अनुसार, एंटीबायोटिक्स दवाएं होती है, जो इंसानों और जानवरों में बैक्टीरिया से फैले संक्रमण से लड़ने का काम करती हैं. यह बैक्टीरिया को मारती हैं या उसके बढ़ने में मुश्किलें पैदा करती हैं. खास बात है कि एंटीबायोटिक्स बैक्टीरिया से होने वाले स्ट्रेप थ्रोट, काली खांसी, यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन जैसे संक्रमणों का ही इलाज करती हैं. इसके अलावा बैक्टीरिया से होने वाले सेप्सिस जैसी घातक स्थिति में भी एंटीबायोटिक्स की मदद ली जाती है.

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नई दिल्ली. कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus) को करीब दो साल का वक्त पूरा होने आया है, लेकिन अभी तक इसके इलाज से जुड़ी कोई पुख्ता जानकारी वैज्ञानिकों को नहीं मिल सकी है. महामारी की पहली, दूसरी और अब तीसरी लहर के बीच जानकारों की तरफ से रेमडेसिविर और टोसिलीजुमाब जैसी दवाओं के नामों का जिक्र किया, लेकिन बाद में इन्हें लेकर भी दिशा निर्देश बदलते रहे. हाल ही में कोविड टास्क फोर्स ने गाइडलाइंस में बदलाव किए हैं. इसमें डॉक्टर्स को स्टेरॉयड के इस्तेमाल को लेकर चेताया गया है और कहा गया है कि अनुचित उपयोग दूसरे संक्रमण (म्यूकरमाइकोसिस या ब्लैक फंगस) का कारण बन सकता है.

संशोधित दिशानिर्देशों में रोगियों में मामूली से लेकर गंभीर लक्षण होने पर रेमडेसिवर के आपातकालीन या ‘ऑफ लेबल’ उपयोग की अनुमति दी गयी है. इसका उपयोग केवल उन्हीं रोगियों पर किया जा सकता है जिनको कोई भी लक्षण होने के 10 दिन के भीतर ‘रेनल’ या ‘हेप्टिक डिस्फंक्शन’ की शिकायत न हुई हो. इसमें आगाह किया गया है कि जो रोगी ऑक्सीजन कृत्रिम तरीके से नहीं ले रहे हैं या घर में हैं, उन पर इस दवा का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए.

संशोधित दिशानिर्देशों के अनुसार, रोग से बुरी तरह प्रभावित होने और विशेष रूप से रोग की गंभीरता या गहन चिकित्सा केंद्र (आईसीयू) में भर्ती होने के 24 से 48 घंटे के बीच रोगी को आपात उपयोग या ‘ऑफ लेबल’ उपयोग के लिए टोसिलीजुमाब दवा दी जा सकती है. कोविड की नई लहर और संशोधित दिशा निर्देशों के बीच आम लोगों का भी स्टेरॉयड्स और एंटीबायोटिक्स के बारे में दोबारा जानकारी हासिल करना जरूरी हो गया है.

क्या होती हैं एंटीबायोटिक्स
सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार, एंटीबायोटिक्स दवाएं होती है, जो इंसानों और जानवरों में बैक्टीरिया से फैले संक्रमण से लड़ने का काम करती हैं. यह बैक्टीरिया को मारती हैं या उसके बढ़ने में मुश्किलें पैदा करती हैं. खास बात है कि एंटीबायोटिक्स बैक्टीरिया से होने वाले स्ट्रेप थ्रोट, काली खांसी, यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन जैसे संक्रमणों का ही इलाज करती हैं. इसके अलावा बैक्टीरिया से होने वाले सेप्सिस जैसी घातक स्थिति में भी एंटीबायोटिक्स की मदद ली जाती है.

एंटीबायोटिक्स से होने वाले साइड इफेक्ट्स
एंटीबायोटिक्स से रैश, उल्टी की इच्छा, दस्त, यीस्ट इंफेक्शन जैसे आम से लेकर बेहद गंभीर साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं. एंटीबायोटिक लेते वक्त साइड इफेक्ट्स होने पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

एंटीबायोटिक्स को केवल तब ही लेना जरूरी क्यों है, जब उनकी अवश्यकता हो?
एंटीबायोटिक्स संक्रमण के इलाज में जरूरी हैं और इसने कई जानें बचाई हैं. हालांकि, एंटीबायोटिक्स के इस्तेमाल से साइड इफेट्स हो सकते हैं और यह एंटीबायोटिक रेजिजटेंस या प्रतिरोध में योगदान कर सकते हैं. एंटीबायोटिक रेजिजटेंस भी बड़े खतरे में से एक है. आमतौर पर जरूरत पड़ने पर एंटीबायोटिक्स साइड इफेक्ट्स या एंटीबायोटिक्स रेजिजटेंस के जोखिम से ज्यादा जरूरी हो जाती हैं. लेकिन कई बार एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल बगैर वजह और गलत तरीके से होता है, जिससे जो जरूरी दवाओं की अहमियत पर असर होता है. ऐसे में यह बेहद जरूरी है कि एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल जरूरत पड़ने पर ही किया जाए.

क्या होते हैं स्टेरॉयड
यूनाइटेड किंगडन नेशनल हेल्थ सर्विस के अनुसार, स्टेरॉयड्स को कॉर्टिकोस्टेरॉयड्स भी कहा जाता है. ये एंटी-इंफ्लेमैट्री दवाएं होती हैं, जो अस्थमा, क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिसीज (COPD), हे फीवर, हाइव्स और एक्जीमा, जोड़ों या मांसपेशियों में दर्द जैसी कई तरह की परेशानियों के इलाज में इस्तेमाल होती हैं.

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कैसे काम करते हैं स्टेरॉयड्स
स्टेरॉयड्स, हार्मोन्स का इंसान का बनाया हुआ वर्जन है, जिसे किडनी के ऊपर पाए जाने वाले दो छोटे ग्लैंड्स, एडरीनल ग्लैंड्स तैयार करते हैं. अगर शरीर के स्टेरॉयड तैयार करने वाली मात्रा से ज्यादा डोज लिया जाए, तो यह लालपन और सूजन को कम कर देता है. यह अस्थमा और एक्जीमा जैसी स्थिति के लिए फायदेमंद होता है. स्टेरॉयड्स इम्यून सिस्टम की गतिविधि को भी कम कर देते हैं.

कितने तरह के होते हैं स्टेरॉयड्स
टैबलेट्स, सिरप और लिक्विड, इन्हेलर्स, नेजल स्प्रे, इंजेक्शन, क्रीम, लोशन और जैल स्टेरॉयड के मुख्य प्रकार हैं. अगर स्टेरॉयड्स को कम समय के लिए या छोटे डोज में लिया जाए, तो इनके खास साइड इफेक्ट्स नहीं होते.

क्या होती है पैरासीटामॉल
NHS के अनुसार, पैरासीटामॉल एक आम पैनकिलर है, जिसका इस्तेमाल दर्द के इलाज में किया जाता है. इसके अलावा बढ़े हुए तापमान को कम करने में इन्हें लिया जाता है. सर्दी और फ्लू के इलाज में इन्हें शामिल किया जाता है. पैरासीटामॉल टैबलेट्स और कैप्सूल्स के तौर पर उपलब्ध हैं.

Tags: Coronavirus, Omicron

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