Exclusive: अश्विनी चौबे बोले- कोरोना का रिकवरी रेट 5 से बढ़कर 30% हुआ, यह शुभ संकेत

Exclusive: अश्विनी चौबे बोले- कोरोना का रिकवरी रेट 5 से बढ़कर 30% हुआ, यह शुभ संकेत
केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे के साथ टिकटैक

केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य राज्‍य मंत्री अश्विनी चौबे (Ashwini Choubey) ने कोरोना वायरस (CoronaVirus) पर कहा कि मामलों का घटना-बढ़ना लगा रहेगा, लेकिन सावधानी बरतनी जरूरी है.

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नई दिल्‍ली. केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य राज्‍य मंत्री अश्विनी चौबे (Ashwini Choubey) ने सोमवार को कोरोना वायरस महामारी (CoronaVirus) पर न्‍यूज18 से बातचीत की. इस दौरान उन्‍होंने कहा कि बढ़ते मामलों को लेकर पैनिक होने की जरूरत नहीं है. मामलों का घटना-बढ़ना लगा रहेगा, लेकिन सावधानी बरतना  जरूरी है. उन्‍होंने कहा कि पहले कोरोना वायरस के 5-6 प्रतिशत मरीज ठीक हो रहे थे, आज ये आंकड़ा बढ़कर 30 फीसदी से ज्‍यादा है. देश के लिए यह शुभ संकेत है.

केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य राज्‍य मंत्री ने कहा कि देश में 69 जिले ऐसे हैं जहां पिछले 13 दिनों में कोई नया केस सामने नहीं आया है. 35 जिले ऐसे हैं जहां 14 से 20 दिनों में कोई केस नहीं आया. जबकि 28 जिले ऐसे हैं जहां 21 से 28 दिनों से कोई केस नहीं सामने आया. 53 जिले ऐसे हैं जहां 28 दिनों से भी ज्यादा समय से कोई केस नहीं आया है. यह शुभ संकेत है.

अश्विनी चौबे ने कहा क‍ि धीरे-धीरे हम रेड जोन से ऑरेंज और ऑरेंज से ग्रीन जोन में प्रवेश कर रहे हैं. यह सब शुभ संकेत है. इस दौरान अश्विनी चौबे से न्‍यूज़18 के कुछ सवालों के जवाब दिए.



अश्विनी चौबे से सवाल-जवाब
सवाल: भारत ने अपना खुद का एंटीबॉडी टेस्टिंग किट तैयार किया है ये कितना फायदेमंद होगा देश के लिए?
जवाब: एनआईएवी पुणे ने जो कोविड कवच तैयार किया है वो लाभकारी होगा और जल्द उससे जांच शुरू हो जाएगी.

सवाल: धीरे-धीरे ढील दी जा रही है लाकडाउन में. क्या ये माना जाए कि इस वायरस के साथ जीने की आदत डालनी होगी?
जवाब: प्रधानमंत्री ने पहले भी कहा है कि जान है तो जहान है. जान को भी बचाना है और जहान को भी बचाना है. इसलिए प्रधानमंत्री ने सभी से फीडबैक लेकर. राज्यों से फीडबैक लेकर फिर संतुलित प्रयास किया है. जान भी देखा जा रहा है और आर्थिक दृष्टिकोण को लेकर भी फैसला किया जा रहा है.

सवाल: बिहार में अचानक मामले बढ़े हैं. क्या माइग्रेंट इसकी बड़ी वजह हैं और वहां सरकार के कंट्रोल से बाहर हो रहा है मामला?
जवाब: बिहार में अच्छी तैयारी की गई है. केंद्र सरकार के सहयोग से हम वहां पर मामलों को कंट्रोल करने में सक्षम हो पा रहे हैं? संख्या बढ़ी है लेकिन लगभग 48 फ़ीसदी लोग ठीक हो कर घर जा चुके हैं. वहां पर रिकवरी रेट बढ़ा है. मृत्यु भी कम हुई है.

उन्‍होंने कहा कि जो लोग बाहर से गांव पहुंचे और वहां पर किसी को बताया नहीं, उनकी वजह से कुछ हद से बीमारी बढ़ी है. बिहार में टेस्टिंग क्षमता बढ़ाई गई है और वहां सात टेस्ट लैब हैं. बिहार में 34500 जांच की जा चुकी है.

अश्विनी चौबे ने कहा कि बड़ी संख्या में राज्य सरकार माइग्रेंट को लाने का प्रयास कर रही है. भारत सरकार व्यापक पैमाने पर ट्रेन भेजने का काम कर रही है. श्रमिक ट्रेन चलाने में टिकट के अलावा भी बड़ा खर्च होता है. श्रमिक ट्रेन के माध्यम से 400000 से ज्यादा लोग भेजे गए हैं. बिहार के अभी भी लाखों लोग फंसे हुए हैं. सभी राज्यों से आग्रह किया गया है कि जहां भी श्रमिक भाई हैं उनकी स्क्रीनिंग की जाए जांच की जाए. श्रमिकों का घर जाना चुनौती जरूर है लेकिन जांच अगर सही तरीके से हो तो कोई दिक्कत नहीं होगी.

सवाल: बिहार में खाने की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हुए?
जवाब: राज्य सरकार खाने की गुणवत्ता पर ध्यान दे रही है और देना भी चाहिए.

(रवि सिंह की रिपोर्ट)

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