ब्लैक फंगस के मरीजों के लिए 48 घंटे सबसे अहम, जानिए आपके सवालों के जवाब

ब्लैक फंगस देश के 18 राज्यों में फैल चुका है (PTI)

ब्लैक फंगस देश के 18 राज्यों में फैल चुका है (PTI)

Black Fungus Cases in India: म्यूकोरमाइकोसिस काले रंग का दुर्लभ फंगल इंफेक्शन है. यह स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं वाले लोगों को प्रभावित करता है और नाक बंद होना, आंखों/गालों पर सूजन व नाक में काले सूखे क्रस्ट जमना इसके लक्षण हैं.

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Black Fungus Cases in India: कोरोना वायरस महामारी के बीच तेजी से फैल रहे ब्लैक फंगस (Black Fungus) यानी म्यूकोरमाइकोसिस (Mucormycosis) ने लोगों की नींद उड़ा रखी है. ऐसे फंगल जो ट्रू पैथोजेनिक सिस्टेमिक होते हैं वो खतरनाक होते हैं, क्योंकि उनके बढ़ने और फैलने की तीव्रता अधिक होती है. कोरोना के बाद मिले तीनों फंगस उसी श्रेणी के हैं. इन्हें फास्ट ग्रोइंग फंगस भी कहा गया है. इससे संक्रमित मरीज के लिए 24 से 28 घंटे सबसे अहम होते हैं. अगर इतने वक्त में सही इलाज नहीं मिला, तो ये फंगस सीने, दिल और शरीर के अन्य अंगों तक पहुंच जाता है. इसलिए इसमें जान जाने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है.

आइए जानते हैं क्या है ब्लैक फंगस के लक्षण और कौन सी दवा से होगा इसका इलाज:-

  • क्या है ब्लैक फंगस?

    म्यूकोरमाइकोसिस काले रंग का दुर्लभ फंगल इंफेक्शन है. यह स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं वाले लोगों को प्रभावित करता है और नाक बंद होना, आंखों/गालों पर सूजन व नाक में काले सूखे क्रस्ट जमना इसके लक्षण हैं.

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  • शरीर को कैसे नुकसान पहुंचाता है फंगस?

    चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में माइक्रोबॉयोलाजी के प्रोफेसर रहे और शोभित विवि के कुलपति डॉ. एपी गर्ग बताते हैं कि ब्लैक, सफेद और यलो फंगस तो जानलेवा है ही लेकिन स्प्रेलॉजिक फंगस सबसे खतरनाक है जो छाती को जकड़ लेता है. यह शरीर में सबसे तेजी से फैलता है. इसे मेडिकल साइंस की भाषा में ग्रीन मोल्ड भी कहा जाता है. कभी कभी यह यलो ग्रीन मोल्ड के प्रकृति में भी मिलता है, लेकिन यह फंगस करोड़ों केस में से किसी एक के अंदर पाया जाता है.


  • ऐसे केस में ऑपरेशन कितना जरूरी है?

    डॉ. एपी गर्ग बताते हैं कि अकेले दवा या इंजेक्शन के दम पर मरीज के ठीक होने की संभावना बेहद कम रहती है, क्योंकि दवा को फंगस वाली जगह तक पहुंचने में समय लगता है. इसलिए ऑपरेशन करना जरूरी होता है.


  • कौन सा फंगस सबसे खतरनाक है?

    कैंडिडा ऑरिश को दुनिया का सबसे खतरनाक फंगस माना जाता है. हालांकि, इसका प्रसार बेहद सीमित है, लेकिन इस पर एंटी फंगल दवाएं भी ज्यादा असर नहीं करती हैं. इस फंगस को ग्लोबल थ्रेट यानी वैश्विक खतरा घोषित किया जा चुका है. इस पर एंटीफंगल दवाओं असर नहीं करती.


  • क्या मास्क से भी फंगस फैल सकता है?

    डॉ. एपी गर्ग बताते हैं कि किसी भी फंगस को बढ़ाने के लिए नमी सबसे ज्यादा मददगार होती है. नमी या फिर पसीने वाली गर्मी में भी फंगस बढ़ता है. ब्लैक और सफेद फंगस इंफेक्शन के मामले आने के पीछे एक वजह लंबे समय तक एक ही मास्क को पहने रखना भी हो सकता है. कई बार फंगस कपड़े पर होती है लेकिन दिखाई नहीं देता है. खासकर सफेद फंगस को पता नहीं किया जा सकता. इसलिए मास्क नियमित रूप से बदले.


  • ब्लैक फंगस को रोकने के लिए और क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

    पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी एडवाइजरी के अनुसार, चूंकि लोग पर्यावरण में फंगल बीजाणुओं के संपर्क में आने से संक्रमण की चपेट में आ जाते हैं, इसलिए लोगों को मिट्टी, खाद और मलमूत्र के अलावा सड़ी हुई रोटी, फल और सब्जियों के संपर्क में आने के प्रति आगाह किया गया है. बागवानी को संभालते समय जूते, लंबी पैंट, लंबी बाजू की शर्ट और दस्ताने पहनें. व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखनी चाहिए और नहाते समय पूरी तरह से स्क्रब करनी चाहिए. नमी वाली जगहों से बचें. खिड़की दरवाजों का कुछ देर खुला रखें, ताकि घर में नमी न रहे. फ्रिज में रखा खाना न खाएं.

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