वैक्सीन लगवा चुके लोगों में अस्पताल में भर्ती होने की आशंका 80% हुई कमः स्वास्थ्य मंत्रालय

स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने शुक्रवार को कहा कि हम 3 मई से रिकवरी दर में वृद्धि देख रहे हैं. (File pic)

देश में कोरोना की वर्तमान स्थिति को लेकर हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा, 'पिछले 24 घंटे में देश में 62,480 नए मामले सामने आए हैं. पिछले 11 दिनों से एक लाख से कम मामले रिपोर्ट हो रहे हैं. कोरोना मामलों के पीक में 85% की कमी देखी गई है.'

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    नई दिल्ली. भारत में कोरोना का कहर अब कम हो रहा है. स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने बताया कि 3 मई से रिकवरी रेट में तेजी देखी जा रही है, जो अब 96% है. उन्होंने कहा कि हम एक्टिव केसों में भी गिरावट देख रहे हैं. 11 जून से 17 जून के बीच 513 जिलों में कुल पॉजिटिव केस 5% से भी कम थे. देश में कोरोना की वर्तमान स्थिति को लेकर हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में लव अग्रवाल ने कहा, 'पिछले 24 घंटे में देश में 62,480 नए मामले सामने आए हैं. पिछले 11 दिनों से एक लाख से कम मामले रिपोर्ट हो रहे हैं. कोरोना मामलों के पीक में 85% की कमी देखी गई है.'

    वहीं, नीति आयोग के स्वास्थ्य सदस्य डॉ. वीके पॉल ने बताया कि अध्ययनों से पता चलता है कि कोरोना वैक्सीन लगवा चुके व्यक्तियों में अस्पताल में भर्ती होने की आशंका 75-80 फीसदी कम होती है. ऐसे व्यक्तियों को ऑक्सीजन सपोर्ट की आशंका लगभग 8 फीसदी है और टीकाकरण वाले व्यक्तियों में आईसीयू में प्रवेश का जोखिम केवल 6 फीसदी है.

    डॉक्टर वीके पॉल ने कहा, 'ग्रामीण क्षेत्रों में 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों में सेरोपोसिटिविटी दर 56 फीसद और 18 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों में 63 फीसद है. जानकारी से पता चलता है कि बच्चे संक्रमित थे लेकिन यह बहुत हल्का था. बच्चों में संक्रमण के केवल अलग-अलग मामले हो सकते हैं.'

    डब्ल्यूएचओ और एम्स ने किया सर्वेक्षण
    उन्होंने कहा कि डब्ल्यूएचओ और एम्स के सर्वेक्षण से पता चलता है कि 18 वर्ष से कम और 18 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों में सेरोपोसिटिविटी लगभग बराबर है. 18 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों में, 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों में सेरोपोसिटिविटी दर 67 फीसदी और 59 फीसदी है. शहरी क्षेत्रों में, यह 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों में 78 फीसदी और 18 वर्ष से ऊपर के व्यक्तियों में 79 फीसदी है.

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    क्या कोरोना की तीसरी लहर का होगा बच्चों पर असर?
    कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों को ज्यादा कोरोना प्रभावित होने के सवाल पर लव अग्रवाल ने कहा कि यह सच नहीं हो सकता है कि तीसरी लहर में बच्चे अनुपातहीन रूप से प्रभावित होंगे क्योंकि सीरो सर्वे से पता चलता है कि सभी आयु समूहों में सेरोपोसिटिविटी लगभग समान थी. लेकिन सरकार तैयारियों में कोई कसर नहीं छोड़ रही है.

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