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    मिनटों में कोरोना इंफेक्शन का पता लगा लेगा फेलूदा स्ट्रिप, जानें इसके बारे में सबकुछ

    फेलूदा FNCAS9 Editor Linked Uniform Detection Assay का शॉर्टफॉर्म है. यह स्वदेशी सीआरआईएसपीआई जीन-एडिटिंग टेक्नोलॉजी पर आधारित है.
    फेलूदा FNCAS9 Editor Linked Uniform Detection Assay का शॉर्टफॉर्म है. यह स्वदेशी सीआरआईएसपीआई जीन-एडिटिंग टेक्नोलॉजी पर आधारित है.

    भारत में ड्रग रेगुलेटर ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने 30 मिनट से कम समय में कोविड-19 की सटीक टेस्ट रिपोर्ट देने वाले सस्ते पेपर-बेस्ड टेस्ट स्ट्रिप (Feluda paper strip test) को मंजूरी दे दी है. इस टेस्ट का नाम फिल्ममेकर सत्यजीत रे के काल्पनिक जासूसी चरित्र फेलूदा के नाम पर रखा गया है.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 12, 2020, 2:07 PM IST
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    Covid 19 Vaccine in India: भारत में कोरोना संक्रमितों की संख्या 71 लाख पार कर गई है. सभी को कोरोना वैक्सीन (Covid 19 Vaccine) का इंतजार है. इस बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन (Dr. Harsh Vardhan) ने कहा कि ‘सार्स कोव-2’ का पता लगाने के लिए फेलूदा पेपर स्ट्रिप (Feluda paper strip test) जांच अगले कुछ हफ्ते में शुरू की जा सकती है. स्वास्थ्य मंत्री सोशल मीडिया पर अपने प्रशंसकों के साथ ‘संडे संवाद’ प्लेटफॉर्म पर बातचीत कर रहे थे. आइए जानते हैं क्या है फेलूदा पेपर स्ट्रिप टेस्ट और इससे क्या होगा फायदा?

    • क्या है फेलूदा पेपर स्ट्रिप टेस्ट?

      भारत में ड्रग रेगुलेटर ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने 30 मिनट से कम समय में कोविड-19 की सटीक टेस्ट रिपोर्ट देने वाले सस्ते पेपर-बेस्ड टेस्ट स्ट्रिप को मंजूरी दे दी है. इसे काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआईआर) और टाटा ग्रुप की रिसर्च टीम ने डेवलप किया है. इस टीम का नेतृत्व डॉ. देबज्योति चक्रबर्ती और सौविक मैत्री कर रहे थे. इस टेस्ट का नाम फिल्ममेकर सत्यजीत रे के काल्पनिक जासूसी चरित्र फेलूदा के नाम पर रखा गया है.


    • कोरोना के खिलाफ कैसे काम करेगा ये स्ट्रिप?

      फेलूदा FNCAS9 Editor Linked Uniform Detection Assay का शॉर्टफॉर्म है. यह स्वदेशी सीआरआईएसपीआई जीन-एडिटिंग टेक्नोलॉजी पर आधारित है. यह नोवल कोरोना वायरस SARS-CoV2 के जेनेटिक मटेरियल को पहचानता है और उसे ही टारगेट करता है. यह टेस्ट उतना ही सटीक है जितना आरटी-पीसीआर टेस्ट. अब तक पूरी दुनिया में आरटी-पीसीआर टेस्ट को ही कोविड-19 के डायग्नोसिस में गोल्ड स्टैंडर्ड समझा जा रहा है. अंतर यह है कि फेलूदा के नतीजे जल्दी आते हैं और इसमें इस्तेमाल होने वाला डिवाइस बेहद सस्ता है. फेलूदा टेस्ट नोवल कोरोना वायरस की पहचान करने में 96% सेंसिटिव और 98% स्पेसिफिक रहा है. फेलूदा दुनिया का पहला डायग्नोस्टिक टेस्ट है, जो वायरस को पहचानने के लिए Cas9 प्रोटीन का इस्तेमाल करता है
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    • CRISPR टेक्नोलॉजी क्या है?

      सीआरआईएसपीआर (CRISPR) यानी क्लस्टर्ड रेगुलरली इंटरस्पेस्ड शॉर्ट पैलिंड्रॉमिक रिपीट्स जीन एडिटिंग टेक्नोलॉजी है. इससे जेनेटिक डिफेक्ट्स दूर किए जाते हैं. किसी रोग को फैलने से रोकने और उसके इलाज में इस्तेमाल होता है. CRISPR टेक्नोलॉजी जीन में डीएनए के स्पेसिफिक सिक्वेंस की पहचान सकती है. यह डीएनए सिक्वेंस और जीन फंक्शन को बदलती है. इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल भविष्य में अन्य बीमारियों को डायग्नोज करने में भी किया जा सकता है.


    • फेलूदा टेस्ट किस तरह काम करता है?

      फेलूदा टेस्ट प्रेग्नेंसी स्ट्रिप टेस्ट की तरह है. अगर कोरोना वायरस होगा तो कलर बदल जाएगा. इसका इस्तेमाल पैथ लैब में भी किया जा सकता है. इसमें Cas9 प्रोटीन को बारकोड किया गया है, ताकि वह मरीज के जेनेटिक मटेरियल में कोरोना वायरस सिक्वेंस का पता लगा सके. इसके बाद Cas9-SARS-CoV2 कॉम्प्लेक्स को पेपर स्ट्रिप पर रखा जाता है, जहां दो लाइन (एक कंट्रोल, एक टेस्ट) बताती है कि मरीज को कोविड-19 है या नहीं.


    • इस टेस्ट की लागत क्या है?

      फेलूदा टेस्ट पर 500 रुपये खर्च आता है, जबकि आरटी-पीसीआर टेस्ट पर 1,600 रुपये से 2,000 रुपये तक लग रहे हैं. एंटीबॉडी टेस्ट का रिजल्ट 20-30 मिनट में आता है और उस पर 500 से 600 रुपये का खर्च है. वहीं, रैपिड एंटीजन टेस्ट किट 30 मिनट में पॉजिटिव या निगेटिव टेस्ट रिपोर्ट देती है, उसकी लागत 450 रुपये है.
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