कोरोना वायरस से लड़ने में आखिर केरल मॉडल से कहां हुई चूक?

7 अक्टूबर को केरल एक बार फिर कोरोना के दैनिक मामलों की संख्या में देश का चौथा राज्य बन गया.
7 अक्टूबर को केरल एक बार फिर कोरोना के दैनिक मामलों की संख्या में देश का चौथा राज्य बन गया.

30 जनवरी को चीन से लौटे एक छात्र में कोरोना वायरस (Coronavirus) की पुष्टि हुई थी. राज्य में यह पहला पॉजिटिव केस था. इस दौरान राज्य में दो दिनों में तीन मामले सामने आए थे जिन्हें नियंत्रित करने में राज्य सरकार सक्षम थी. 7 अक्टूबर को केरल एक बार फिर कोरोना के दैनिक मामलों की संख्या में देश का चौथा राज्य बन गया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 16, 2020, 1:09 PM IST
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नई दिल्ली. केरल में कोरोना वायरस (Coronavirus) का पहला मामला 30 जनवरी 2020 को दर्ज हुआ था. उसके बाद से राज्य दैनिक मामलों की संख्या (11,755 केस) की लिस्ट में सबसे ऊपर पहुंच गया. 29 जनवरी से 28 जुलाई तक राज्य में 10 हजार कोरोना के सक्रिय मामले देखे गए. अगले 70 दिनों में राज्य ने दैनिक मामलों की संख्या में 10 हजार की सीमा को भी पार कर दिया. 7 अक्टूबर को केरल एक बार फिर कोरोना के दैनिक मामलों की संख्या में देश का चौथा राज्य बन गया. मौजूदा स्थिति में महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश और कर्नाटक दैनिक मामलों की संख्या की श्रेणी में शीर्ष पर हैं. सवाल यह है कि आखिर कोरोना से लड़ने में केरल के मॉडल को लेकर कहां चूक हुई.

विशेषज्ञ समिति की बैठक के बाद राज्य के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने कहा "याद रखें, हम बीमारी के प्रसार के चरम पर देरी कर सकते हैं लेकिन हम अपने प्रयासों से देश में मृत्यु दर को और कम कर सकते हैं." बता दें कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य सरकार की कई बार प्रशंसा हुई है, लेकिन जब केरल कोरोना के मामलों में तीसरे स्थान पर पहुंचा तो विपक्ष के रूप में भाजपा और कांग्रेस ने उसे घेरना शुरू कर दिया, जबकि 19 से 26 सितंबर तक राज्य में कोरोना के केवल 150 मामले ही सामने आए थे.

9 मार्च से 8 मई का चरण
बता दें कि 30 जनवरी को चीन से लौटे एक छात्र में कोरोना वायरस की पुष्टि हुई थी. राज्य में यह पहला पॉजिटिव केस था. इस दौरान राज्य में दो दिनों में तीन मामले सामने आए थे जिन्हें नियंत्रित करने में राज्य सरकार सक्षम थी. वहीं, इसके बाद 9 मार्च तक राज्य में कोई मामला सामने नहीं आया. 9 मई से 7 जुलाई के चरण में जब राज्य में अंतरराज्यीय और अंतरदेशीय यात्रा की अनुमति दी गई, तब बड़ी संख्या में केरलवासी विदेशों से घर की तरफ दौड़े, इसके बाद मामलों में वृद्धि हुई. इसके अनलॉक 1.0 के तहत 8 जून को लॉकडाउन हटने के बाद भी कंटेनमेंट जोन में सख्ती बरकरार रही.
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6 जुलाई से 16 अगस्त
यह चरण राजनीतिक आरोपों के रूप में महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि 6 जुलाई को तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे पर सोने की तस्करी का खुलासा हुआ था. संयोगवश उसी दिन तिरुवनंतपुरम में एक सप्ताह के ट्रिपल लॉकडाउन की घोषणा की गई. वहीं, 17 अगस्त से 5 सितंबर के फेस में केरल में 'चिंगम का मलयालम महीना' शुरू हुआ जिसे शादी के शुभ मुहूर्त के लिए जाना जाता है. इस दौरान राज्य सरकार ने शादी में मेहमानों की संख्या नियत की.

कोरोना मामलों में तीसरे स्थान पर पहुंचा राज्य
6 सितंबर से 26 सितंबर के चरण में राज्य में कोरोना के मामले दोगुने (1 लाख) हो गए जिसमें 371 लोगों की मौत हुई. इसके बाद 27 सितंबर से 10 अक्टूबर के चरण में राज्य कोरोना के एक लाख मामले की सीमा को पार करने वाला तीसरा राज्य बन गया. बता दें कि 7 अक्टूबर को राज्य में दैनिक कोरोना मामलों की संख्या 10 हजार को पार कर गई थी, जिससे कोरोना पॉजिटिव मामलों की दर 13 से 14 फीसदी हो गई. लेकिन 8 अक्टूबर को यह दर घटकर 8.4 फीसदी हो गई, क्योंकि 63,146 मामलों में से केवल 5,445 में कोरोना की पुष्टि हुई थी.



कोविड-19 पर सरकार को सलाह देने के लिए विशेषज्ञ समिति के अध्यक्ष और प्रबंधन और राज्य योजना बोर्ड के सदस्य डॉ. इकबाल से जब पूछा गया, 'क्या कोरोना मामलों की इस घटती दर को सकारात्मक रूप से देख सकते हैं.' तो इस पर उन्होंने कुछ भी बोलने को जल्दबाजी बताया.
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