कोरोना के खिलाफ गांवों में राज्य सरकारों ने केंद्र के साथ मिलकर उठाये ये कदम

इलाज के दौरान अस्पताल में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज. (पीटीआई फाइल फोटो)

इलाज के दौरान अस्पताल में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज. (पीटीआई फाइल फोटो)

Coronavirus in Rural Area: हिमाचल प्रदेश में संजीवनी ओपीडी की व्यवस्था की गई है जिसके तहत ऑनलाइन मुफ्त चिकित्सा सलाह का प्रावधान है.

  • Last Updated: May 13, 2021, 12:48 PM IST
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नई दिल्ली. कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए केंद्र सरकार के पंचायती राज मंत्रालय की सलाह पर विभिन्न राज्यों ने कई कदम उठाएं हैं. इसमें केरल द्वारा उठाए गए ट्रांसपोर्ट प्लान और कुटुंबाश्री कम्युनिटी नेटवर्क काफी महत्वपूर्ण हैं. ट्रांसपोर्ट प्लान के तहत केरल सरकार ने सभी ग्राम पंचायत में एक एंबुलेंस की व्यवस्था की है, वहीं कम्युनिटी नेटवर्क के तहत गरीब महिलाओं तक सुविधा पहुंचाने की कोशिश की गई है. इसके साथ ही असम ने सभी प्रवासियों का डाटा तैयार किया है, जबकि  हिमाचल प्रदेश में संजीवनी ओपीडी की व्यवस्था की गई है जिसके तहत ऑनलाइन मुफ्त चिकित्सा सलाह का प्रावधान है.


गुजरात में पीआरआई के द्वारा स्वयं लॉकडाउन लगाने की पहल भी काफी महत्वपूर्ण रही. आंध्र प्रदेश में कोरोना वायरस मॉनिटरिंग सेंटर के जरिए 'नो मास्क, नो एंट्री' का प्रावधान लागू किया गया है. साथ ही घर-घर जाकर प्रोएक्टिव सैनिटाइजेशन की भी व्यवस्था की गई. बिहार सरकार द्वारा ग्रामीण परिवारों को मास्क का वितरण, स्थानीय स्तर पर मास्क की खरीदारी ताकि रोजगार को बढ़ावा दिया जा सके.. कि व्यवस्था की गई है.


हरियाणा सरकार ने ग्रामीण स्तर पर निगरानी समिति का गठन किया, वहीं झारखंड सरकार ने जागरूकता फैलाने के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उपयोग किया. इसके साथ ही झारखंड सरकार ने पंचायत भवन, सरकारी स्कूल, सामुदायिक भवन को क्वारंटाइन सेंटर के रूप में विकसित किया. महाराष्ट्र सरकार द्वारा 'माय फैमिली माय रिस्पांसिबिलिटी' नामक अवेयरनेस कैंपेन चलाया गया. इसके साथ ही कोरोना प्रीवेंशन कमेटी का भी गठन किया गया है. महाराष्ट्र सरकार ने मेडिकल इमरजेंसी को लेकर 'डोर टू डोर कैंपेन' भी चलाया.


उत्तर प्रदेश द्वारा ग्रामीण निगरानी समिति का गठन किया गया है, जिसका कार्य सैनिटाइजेशन के प्रति जागरूकता फैलाना है. उत्तराखंड सरकार ने 24 * 7 हेल्पडेस्क का गठन किया, वहीं पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा ग्रास रूट लेवल तक जागरूकता अभियान चलाया गया है, जबकि राजस्थान सरकार ने स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर मेडिकल किट का वितरण किया है.

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