लाइव टीवी

Opinion: कोरोना संकट से दोराहे पर दुनिया, आखिर पहले किसे बचाएं!

Anil Rai | News18Hindi
Updated: April 1, 2020, 1:18 PM IST
Opinion: कोरोना संकट से दोराहे पर दुनिया, आखिर पहले किसे बचाएं!
कोरोना वायरस से ठीक हो चुके कई मरीजो में अंग खराबी के लक्षण दिखने लगे हैं

Coronavirus Crisis: बात सिर्फ अर्थव्यवस्था और जिंदगी में से एक को चुनने की होती तो संकट बड़ा नहीं था. ज्यादातर देश भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरह जिंदगी ही चुनते. लेकिन कोराना का संकट इससे आगे बढ़ चुका है.

  • Share this:
दुनियाभर में कोराना वायरस (Coronavirus) का संकट गहराता जा रहा है, भले ही चीन (China) इस संकट से पार पाने के दावे कर रहा हो, लेकिन दुनिया अभी भी चीन के इस दावे पर पूरी तरह भरोसा नहीं कर पा रही है. कोराना के कहर के साथ-साथ दुनियाभर में एक साथ कई संकट आ गए हैं. चाहे चीन हो या अमेरिका, भारत हो या ब्रिटेन, विकासशील देश हो या विकसित, सबकी अर्थव्यवस्था पटरी से उतर चुकी है. दुनियाभर में अर्थव्यवस्था पर शोध करने वालों की मानें, तो दुनिया की विकास दर जिसके 3 से 4 फीसदी रहने का अनुमान था इस बार 1 के आस-पास ही रहने की उम्मीद है. कुछ लोगों का तो दावा है कि दुनिया की विकास दर एक से भी नीचे जा सकती है यानी आर्थिक संकट दरवाजे पर खड़ा होकर दस्तक दे रहा है.

जिंदगी बचाएं या अर्थव्यवस्था

संकट सिर्फ अर्थव्यवस्था पर होता, तो कोई बात नहीं. दुनियाभर के देश मिलकर इसे संभाल लेते, इससे पहले भी जब-जब आर्थिक संकट आया है, दुनिया उस दौर से बाहर निकली है. हां, यह अलग बात है कि इस संकट से निकलने में किसी देश को ज्यादा वक्त लगा है, तो किसी को कम. लेकिन वर्तमान में हालात ऐसे हो गए हैं कि दुनिया दोराहे पर खड़ी है. अर्थव्यवस्था को बचाने की कोशिश करती है, तो लोगों की जिंदगी खतरे में पड़ जाती है. अमेरिका ने अर्थव्यवस्था बचाने की कोशिश में अपने करोड़ों नागरिकों की जिंदगी खतरे में डाल दी. अमेरिका में अब तक करीब 4 हजार लोगों की मौत हो चुकी है. ये अमेरिका के 100 साल के इतिहास में सबसे खराब दौर है.



जिन देशों ने जिंदगी बचाने के लिए लंबे लॉकडाउन की घोषणा की है, वहां आर्थिक हालात खराब होने का अंदेशा होने लगा है. भारत भी उन्हीं देशों में से एक है. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के लोगों की जिंदगी को अर्थव्यवस्था से ज्यादा महत्व दिया और फिलहाल पूरा सिस्टम कोरोना के खिलाफ जंग में लगा है. देश के करोड़ों लोगों को फ्री राशन, फ्री इलाज जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं. इस बीच अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की कोशिशें भी जारी हैं, लेकिन कोरोना से लड़ना और अर्थव्यवस्था को काबू में रखना, फिलहाल मुश्किल दिख रहा है.



युवा पीढ़ी को बचाएं या अनुभव को

बात सिर्फ अर्थव्यवस्था और जिंदगी में से एक को चुनने की होती तो संकट बड़ा नहीं था. ज्यादातर देश भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरह जिंदगी ही चुनते. लेकिन कोराना का संकट इससे आगे बढ़ चुका है. इटली और स्पेन जैसे देशों में तो संकट और बड़ा हो गया है. दुनिया की सबसे अच्छी स्वास्थ्य सुविधाओं वाले देशों में से एक माने जाने वाले इन देशों में तो अब सवाल ये खड़ा हो गया है कि बुजुर्गों को बचाएं या जवानों को. बीमार लोगों को बचाएं या स्वस्थ लोगों का बचाव करें. खबरें तो यहां तक आईं कि इटली ने वरिष्ठ नागरिकों की बजाय युवा पीढ़ी को बचाने का फैसला किया है. किसी भी राष्ट्राध्यक्ष के सामने ये फैसला लेना मुश्किल होगा कि आखिर किसे बचाएं!

ये भी पढ़ें- UP में कोरोना वायरस से पहली मौत, गोरखपुर में 25 साल के युवक ने तोड़ा दम

Coronavirus: तबलीगी जमात के कारण 20 राज्यों में ऐसे बजी खतरे की घंटी

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: April 1, 2020, 1:18 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
corona virus btn
corona virus btn
Loading