तेजी से फैल रहा कोरोना वायरस का डेल्टा वेरिएंट, अब तक दुनिया के 100 से अधिक देशों में पहुंचा

देश के कई राज्‍यों में कोरोना की स्थिति अभी भी खतरनाक बनी हुई है. (सांकेतिक तस्वीर)

Coronavirus Delta Variant: कोविड-19 के 'बी1.617.2' स्वरूप को डेल्टा वायरस के नाम से जाना जाता है. पहली बार भारत में अक्टूबर 2020 में इसका पता चला था.

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    नई दिल्ली. वैश्विक महामारी कोरोना वायरस का डेल्टा वेरिएंट 100 से अधिक देशों में फैल गया है और जिस तरह से यह अपना पांव पसार रहा है वह जल्द ही विश्व स्तर पर सबसे प्रमुख कोविड-19 स्ट्रेन बन जाएगा. सभी वेरिएंट्स ऑफ कंसर्न के मुकाबले डेलटा सबसे तेजी से फैलता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की दक्षिण-पूर्व एशिया की क्षेत्रीय निदेशक डॉ पूनम खेत्रपाल सिंह ने सोमवार को यह जानकारी दी. वायरस का डेल्टा स्वरूप, अपने पूर्ववर्ती अल्फा स्वरूप से 40-60 प्रतिशत ज्यादा संक्रामक है. कोविड-19 के 'बी1.617.2' स्वरूप को डेल्टा वायरस के नाम से जाना जाता है. पहली बार भारत में अक्टूबर 2020 में इसका पता चला था.


    इस बीच, 'सार्स-सीओवी-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम' के सह अध्यक्ष डॉ एन के अरोड़ा ने जानकारी देते हुए कहा कि देश में कोविड-19 की दूसरी लहर के लिए कोरोना वायरस का डेल्टा स्वरूप मुख्य रूप से जिम्मेदार था जिसके कारण संक्रमण के 80 प्रतिशत से ज्यादा नए मामले सामने आए. उन्होंने कहा कि अगर वायरस का कोई अधिक संक्रामक स्वरूप आता है तो संक्रमण के मामले बढ़ सकते हैं.


    कोरोना के 80 प्रतिशत से ज्यादा मामले डेल्टा की वजह से
    स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, डॉ अरोड़ा ने कहा कि 'डेल्टा प्लस' स्वरूप (एवाई.1 और एवाई.2) अब तक महाराष्ट्र, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश समेत 11 राज्यों में सामने आए 55-60 मामलों में पाया गया है. उन्होंने कहा कि अभी वायरस के इस स्वरूप की संक्रामक क्षमता और टीके के इस पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि आज कोविड-19 के 80 प्रतिशत से ज्यादा मामले डेल्टा वेरिएंट की वजह से सामने आ रहे हैं.


    क्यों घातक है कोरोना का डेल्टा वेरिएंट
    वायरस का यह स्वरूप यह महाराष्ट्र में पहली बार सामने आया था और पश्चिमी राज्यों से होते हुए उत्तर की ओर बढ़ा जिसके बाद मध्य और पूर्वी भारत में इसके संक्रमण के मामले सामने आए. डॉ अरोड़ा ने कहा, 'मानव कोशिका पर हमला करने के बाद यह तेजी से खुद को दोहराता है. इससे फेफड़े जैसे अंगों में सूजन आ जाती है. डेल्टा स्वरूप से उपजी बीमारी अधिक गंभीर है, इसके बारे में कहना कठिन है. भारत में दूसरी लहर के दौरान आयु वर्ग और मौत के आंकड़े लगभग उतने ही थे जितने पहली लहर में थे.'


    (इनपुट भाषा से भी)

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