COVID-19 Effect: कोरोना वायरस ने नींद की हराम! लोगों को आ रहे डरावने सपनों की विशेषज्ञों ने बताई वजह

विशेषज्ञों का मानना है कि उठते वक्त हमारी स्थिति और रात को देखे गए सपनों का हमारी सेहत से सीधा संबंध है. (प्रतीकात्मक)
विशेषज्ञों का मानना है कि उठते वक्त हमारी स्थिति और रात को देखे गए सपनों का हमारी सेहत से सीधा संबंध है. (प्रतीकात्मक)

COVID-19 Effect : विशेषज्ञों का मानना है कि उठते वक्त हमारी स्थिति और रात को देखे गए सपनों का हमारी सेहत से सीधा संबंध है. कोरोनाकाल (Coronavirus) में विशेषज्ञों ने एक ऑनलाइन सर्वे में हालिया समस्याओं को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 19, 2020, 2:02 PM IST
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कोरोना वायरस (Coronavirus) ने दुनियाभर में लोगों की नींद-चैन छीन लिया है. कोविड-19 (COVID-19 Pandemic) महामारी की वजह से लोगों की जीवनशैली में अनचाहे बदलाव आए हैं. एक नए शोध के मुताबिक, कोरोना के कारण लोगों के सपनों में बड़ा असामान्य परिवर्तन देखने को मिला है. यह शोध हार्वर्ड मेडिकल स्कूल (Harvard Medical School) की एक मनोचिकित्सक प्रोफेसर ने किया है. यह एक ऑनलाइन सर्वे (Online Survey) था, जिसमें ढाई हजार लोगों के छह हजार सपनों पर अध्ययन किया गया है. अध्ययन के दौरान बहुत ही चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं.

उदाहरण के लिए मार्च में लॉकडाउन घोषित होने के दौरान टेलीकॉम प्रोफेशनल जीशन खान बेंगलुरु में अकेले थे. खान को शुरू में अपने सोने के तरीके में कोई खराबी नजर नहीं आई, लेकिन जैसे-जैसे लॉकडाउन की अवधि बढ़ती गई उन्हें समस्या होने लगी. उन्होंने बताया 'लॉकडाउन के दूसरे और तीसरे महीने तक मैं आइसोलेशन को महसूस करने लगा था, जैसे-जैसे लॉकडाउन की अवधि बढ़ी मैं परेशान होता गया और मुझे अजीब-अजीब से सपने आने लगे जो सपने असामान्य रूप से बहुत लंबे और डरावने थे, जब कभी रात में मेरी अचानक आंख खुलती तो मैं फिर सो जाता था, लेकिन जहां से मेरा बुरा सपना टूटता था दोबारा सोने पर वो वहीं से शुरू होता था, मेरे कुछ सपनों में लॉर्ड ऑफ द रिंग्स के राक्षस शामिल थे, यह मुझे बहुत डरा देने वाली स्थिति थी.'

वैज्ञानिकों ने जीशन की इस समस्या का बड़ा कारण कोरोना वायरस के जंजाल को माना है. उन्होंने कहा है कि कोरोना के कारण बदली जीवनशैली से लोगों के स्वास्थ्य पर बड़ा असर पड़ रहा है, जिसके कारण वह आरामदायक और तनावरहित नींद नहीं ले पा रहे हैं और यही कारण है कि वह रात में सोते समय बुरे-बुरे सपनों का शिकार हो रहे हैं.

हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में मनोचिकित्सा विभाग में मनोविज्ञान के सहायक प्रोफेसर देयर्रे बैरेट ने लॉकडाउन के दौरान और उसके बाद पनपे माहौल पर एक ऑनलाइन सर्वे को अंजाम दिया. उन्हें मई तक आनलाइन 2,500 लोगों का रिस्पॉन्स मिला जिसमें उन्हें 6 हजार लोगों के अलग-अलग सपनों के बारे में पता चला. बैरेट ने इस सर्वे के आधार पर ही यह निष्कर्ष निकाला है.



शोधकर्ता बैरेट ने अपने अध्ययन के आधार पर बताया कि कोरोना के डर के कारण लोगों के सपनों में असामान्य बदलाव महसूस किए गए हैं. जब हम जागते हैं और रात में हम जो सपने देख रहे होते है उसमें और हमारे बीच एक सहसंबंध होता है. उन्होंने कहा कि बुरे सपने (Nightmares) अंतर्निहित तनाव के संकेतक हो सकते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना के कारण लोगों में 'रेस्टलेस स्लीप साइकल' (Restless Sleep Cycles) की समस्या घर कर गई है जिसके कारण उन्हें गहरी नींद नहीं आ रही और वे बुरे सपने के शिकार हो रहे हैं.

व्यवहार स्वास्थ्य शोधकर्ता और आघात चिकित्सक रुचिता चंद्रशेखर ने बताया कि 2020 में लोगों के तनाव के एक आधारभूत स्तर में असामान्य चीज महसूस की गई है, जिसका बड़ा कारण कोरोनाकाल में सोशल डिस्टेंसिंग और आइसोलेशन की प्रकिया है.
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