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OPINION: कोरोना के खिलाफ जंग में भारत ने पीएम मोदी की अगुआई में दुनिया के सामने रखी एक मिसाल

OPINION: कोरोना के खिलाफ जंग में भारत ने पीएम मोदी की अगुआई में दुनिया के सामने रखी एक मिसाल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (फाइल फोटो)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (फाइल फोटो)

India Fight Against Coronavirus: मोदी सरकार ने वुहान से कोरोना जैसी बीमारी के खतरे का सिग्नल पाते ही जनवरी 2020 से ही महामारी के खिलाफ जंग की शुरुआत कर दी थी.

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में मिली भारत की अद्भुत सफलता और दुनिया भर के अग्रणी देशों के बराबर भारत को ला खड़ा करना एक ऐसी मिसाल कायम कर गया है जिसे आने वाली पीढ़ियां याद रखेंगी. यहां तक कि संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) में इस सफलता का जिक्र करने से पीएम मोदी नहीं चूके. अब तो भारत फिर से वैक्सीन मैत्री की शुरुआत करने जा रहा है ताकि दुनिया भर के उन देशों को कोरोना की वैक्सीन भेजी जा सके जिन्हें इसकी जरूरत है. अचरज की बात तो ये भी है कि महामारी के फैलने के साथ ही कोरोना का टीका भी भारत के वैज्ञानिकों ने इतनी तेजी से विकसित किया कि दुनिया भर के देशों को दांतों तले ऊंगली दबानी पड़ी.

जब कोरोना की दूसरी लहर आयी और भारत को मुश्किलों को सामना करना पड़ा तो पीएम मोदी ने बंगाल में अपनी तमाम रैलियां रद्द कर दिल्ली में ही डेरा डाल दिया. ऑक्सीजन की कमी, अस्पतालों में बेड की कमी, दवा की मुश्किलों से जूझते हुए पीएम मोदी ने देश भर के तमाम रिसोर्सेस को सिर्फ कोरोना की लड़ाई में लगा दिया. पीएम केयर्स फंड से भारत में बनाए गए हजारों वेंटिलेटर देश भर के अस्पतालों में भेजे गए. साथ ही कोरोना के टीकाकरण का एक वृहद अभियान भी शुरू किया गया. शुरुआती मुश्किलों के बाद इस टीकाकरण अभियान की सफलता देखकर दुनिया भर के देशों ने दातों तले ऊंगली दबा ली. खास बात ये रही कि पहली बार भारत उन अग्रणी देशों में शामिल हो गया जिन्होंने किसी भी बीमारी के फैलने के साथ-साथ ही उसका टीका तैयार कर लिया था.

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इसका श्रेय भी पीएम मोदी को ही जाता है कि पिछले साल मार्च में ही अनुसंधान के लिए उन्होंने फंड आवंटित कर दिया था. साथ-ही-साथ टीका बनाने में लगी कंपनियों से लगातार फीड बैक लेते रहे. ऐसा कर मोदी सरकार ने दुनिया को दिखा दिया है कि कोरोना वायरस के एपिक सेंटर चीन के सबसे करीब होने के बाद भी भारत में ये महामारी क्यों नही फैली और भारत कोरोना को कैसे काबू करने में सफल रहा. हम आपको सिलसिलेवार बताते हैं कि कैसे पिछले साल यानि जनवरी 2020 से ही कोरोना के खतरे की घंटी बजने के पहले ही सरकारी तंत्र हरकत में आ गया.

कोरोना के खतरे की भनक मिलते ही हरकत में आ गया था सरकारी तंत्र
पीएम नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार कोरोना के खिलाफ जंग में खतरे की घंटी बजने से पहले ही हरकत में आ गयी थी. चीन के वुहान में इस बीमारी के फैलने की खबर आते ही भारत सरकार ने अलर्ट और एडवाइजरी जारी करनी शुरू कर दी थी. ये बात किसी से छुपी नहीं है कि कोरोना वायरस की आहट पाते ही पीएम मोदी ने एक ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स गठित कर दिया. पीएम हर रोज ट्वीट कर पूरे देश को कोरोना से जंग पर संदेश भी देते रहे. स्वास्थ्य मंत्रालय एडवाइजरी जारी करता रहा. होमियोपैथी, दवाओं और बचने के उपायों के बारे में देश भर में जागरूकता अभियान चलता रहा. आलम ये रहा कि जब तक विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) इसे महामारी घोषित करता भारत में पूरा सरकारी तंत्र और नागरिक सतर्क हो चुके थे.

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भारत इस जंग में 8 जनवरी से ही कूद पड़ा था, जबकि WHO ने इसका ऐलान 30 जनवरी को किया. राज्य सरकारों को इसकी रोकथाम की तैयारियों के लिए 17 जनवरी को ही सारे निर्देश दे दिए गए थे. देश में घुसने के तमाम ठिकानों हवाई अड्डों, बंदरगाहों और सीमाओं पर निगरानी और निरीक्षण 17 जनवरी से ही शुरू हो चुके थे. इंटर मिनिस्टेरियल कोऑर्डिनेशन का विशेष ध्यान भी रखा गया. बदलती परिस्थितियों के हिसाब से एयरपोर्ट्स पर भी निगरानी कड़ी होती गई. 17 मार्च तक कुल 12,726 विमानों की स्क्रीनिंग की गयी. जिसमें कुल 13,54,858 यात्री सवार थे. भारतीय नागरिकों के लिए समय-समय पर ट्रैवल एडवाइजरी जारी की गयी.

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30 जनवरी को सरकार ने कहा कि अगर जरूरी ना हो, तो भारतीय नागरिक चीन की यात्रा पर नहीं जाएं  और फिर 3 फरवरी को चीन जाने पर रोक लगा दी गयी. जिन्होंने चीन की यात्रा की उन्हें क्वारंटाइन करने की सलाह दी. इसके अलावा वीजा और पहले से जारी वीजा रद्द कर दिए गए. 22 फरवरी को अनावश्यक रूप से सिंगापुर जाने की मनाही की गई. काठमांडू, वियतनाम, इंडोनेशिया, मलेशिया से आने वालों की स्क्रीनिंग शुरू कर दी गयी. 26 फरवरी को अनावश्यक इटली, कोरिया, ईरान न जाने का निर्देश दिया गया. 3 मार्च को एक बड़ी एडवाइजरी जारी कर भारतीयों को बचाने की एक बड़ी मुहिम छेड़ी गयी. इटली, ईरान, दक्षिण कोरिया, जापान और चीन के वीजा रद्द कर दिये गए. इन देशों से आने वालों के लिए स्क्रीनिंग अनिवार्य की गई.

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4 मार्च को सभी अंतराष्ट्रीय फ्लाइटों से भारत आने वालों की स्क्रीनिंग अनिवार्य कर दी गयी. देश के 12 बड़े और 65 छोटे बंदरगाहों पर आइसोलेशन वार्ड बनाए गए. 17 मार्च तक 829 जहाजों और 20,050 यात्रियों की स्क्रीनिंग की गयी है. 31 मार्च तक क्रूज जहाजों के आने पर रोक लगा दी गई. नेपाल से लगी सीमाओं पर हाथ से इस्तेमाल होने वाले स्कैनर्स इस्तेमाल किए जा रहे हैं. सभी यात्रियों से घोषणा पत्र लेना अनिवार्य कर दिया गया है. नेपाल की सीमाओं से लगे 21 जिलों मे ग्राम सभाएं आयोजित की गई हैं, केंद्र सरकार की 8 टीमें इनके साथ मॉनिटरिंग में लगी हैं.

सरकार का सामुदायिक सर्विलांस पर जोर
18 जनवरी से ही सरकार ने सामुदायिक सर्विलांस का काम शुरु कर दिया था. इसके तहत राज्य और जिलों के सर्विलेंस ऑफिसर रैपिड रिस्पॉन्स टीम के साथ मिलकर मॉनिटर करने में लगे रहे. 17 जनवरी को केंद्र ने राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को एडवाइजरी जारी कर कहा कि सांस की गंभीर बीमारियों (एसएआरआई) वाले मरीजों को निरीक्षण में रखें. राज्यों के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल बनाया गया, ताकि नाम के आधार पर सर्विलेंस हो सके. मार्च 2020 में देश भर मे 69,436 यात्री कम्युनिटी सर्विलांस में थे. इनमें से 5596 में कोरोना के लक्षण पाए जाने के बाद उन्हें जांच के लिए भेजा गया. इनमें 652 अस्पतालों में भर्ती थे. ग्राम और जिला पंचायतों से अपील की गई कि कोरोना से पीड़ित लोगों को पहचान कर उन्हें इलाज के लिए सामने लाएं.

जांच केंद्रों, किट की कमी से निपटने की तैयारी
बीमारी की शुरुआत में तो देश भर में सिर्फ 15 लैब कार्यरत थे और जांच किट भी महज 25 हजार के आस पास थी. पुणे का एनआईआईवी पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों का एकमात्र रेफरल लैब था, लेकिन बाद में केंद्र सरकार ने नोडल अधिकारी नियुक्त किए. सैंपल जमा करने के लिए. कुल 49 लैब सैंपल जमा करने के केंद्र बने. 49 अतिरिक्त लैबों में कामकाज शुरू हो चुका था. मार्च तक सिर्फ 70,000 जांच किट उपलब्ध थे, लेकिन सरकार ने आश्वस्त किया कि लगभग 10 लाख जांच किट जल्दी ही उपलब्ध हो जाएंगे. कोरोना की जांच के लिए निजी क्लिनिकों के लिए भी गाइडलाइंस जारी किए गए हैं.

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राज्यों को कहा गया है कि मास्क और सुरक्षा किट जमा करें और उपलब्ध कराएं. केंद्रीय बफर स्टॉक के लिए 5 लाख सुरक्षा किट और 10 लाख एल-95 मास्क खरीदने का आदेश जारी किया गया. मास्क और हैंड सैनिटाइजर को एसेंशियल कमोडिटी एक्ट के तहत लाया जा चुका है, ताकि इसकी कीमतों पर नियंत्रण किया जा सके. केंद्र और राज्य सरकार की सभी इकाइयों के आंकड़ों के मुताबिक देश भर में कुल लगभग 37,326 क्वारंटाइन बेड की सुविधा है. बचाव में लगे कर्मियों का प्रशिक्षण और साथ-साथ एयरपोर्ट व इमीग्रेशन के अधिकारियों की ट्रेनिंग भी शुरू की गई.

पीएम मोदी लगातार समीक्षा करते रहे
पीएम मोदी शुरुआत से ही कोरोना के खिलाफ उठाए जा रहे कदमों की मॉनिटरिंग करते रहे. हर कैबिनेट की बैठक में इसका रिव्यू चलता रहा. 7 मार्च को भी पीएम मोदी ने एक विस्तृत रिव्यू किया. पीएम मोदी के प्रिंसिपल सेक्रेटरी भी 31 जनवरी से मार्च, 2020 तक 6 बैठकें ले चुके हैं. 3 फरवरी को एक मंत्रिमंडल का समूह बनाया गया था, जिसके सदस्य स्वास्थ्य, नागरिक उड्डयन, शिपिंग, विदेश और गृह मंत्री हैं. 27 जनवरी से मार्च तक कैबिनेट सेक्रेट्री 22 अहम मंत्रालयों की 22 बैठकें ले चुके थे. 27 जनवरी से 13 मार्च से अब तक केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव की राज्यों के स्वास्थ्य सचिवों और मंत्रालयों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए 16 बैठकें हो चुकीं थी. 8 जनवरी से मार्च तक तकनीकी ज्वाइंट मॉनिटरिंग ग्रुप की 8 बैठकें हो चुकी हैं. ये डीजीएचएस के तहत आता है और WHO इसका हिस्सा है. पीएम मोदी ने कोरोना के चलते हुए लॉकडाउन को खोलने का अध्ययन करने के लिए भी आधे दर्जन इमपावर्ड ग्रुप बना दिए थे जिनसे वो हर रोज फीडबैक लेते रहते थे.

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जब प्रवासी मजदूरों ने वापस अपने गांवों की तरफ पैदल लौटना शुरू किया, तो पीएम मोदी ने राज्य सरकारों से बात कर उन्हें सुविधाएं देने और उन्हें वापस जाने से रोकने के लिए कई योजनों का ऐलान भी किया. लेकिन जब उन्हें लगा कि मजदूर अपने गांव पहुंच कर सुरक्षित महसूस करेंगे, तो पिछले साल ही उन्होंने देश भर में प्रवासी मजदूरों के लिए मुफ्त अन्न योजना का ऐलान कर दिया. गरीब लोगों के लिए शुरू की गई ये योजना अब भी जारी है. 80 करोड़ गरीब लोग जिनके पास राशन कार्ड हैं वो इस योजना से लाभ उठा रहे हैं. साथ ही उध्योग धंधे और व्यापार चौपट होने पर भी चिंता जताते हुए पीएम मोदी ने अर्थव्यवस्था के रिवाइवल के लिए दो बड़े राहत पैकेज का ऐलान भी किया.

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पीएम मोदी जानते थे कि कोरोना एक देश या क्षेत्र तक सीमित नहीं है, इसलिए इस महामारी से लड़ना है तो दुनिया भर के देशों को साथ आना पड़ेगा. इसलिए अमीर हो या फिर पिछड़े देश सबकी परेशानी को भांपते हुए पीएम मोदी ने इस लड़ाई में सबको साथ ले कर चलने का ऐलान किया और वे दुनिया के पहले ऐसे राजनेता बन गए हैं, जिन्होंने कोरोना वायरस के खिलाफ दुनिया के देशों से पारस्‍परिक सहयोग का आह्वान किया है. मोदी ने सार्क देशों को एक होकर लड़ने का आह्वान किया ताकि पूरे भारतीय उपमहाद्वीप को इस महामारी से बचाया जा सके. पीएम मोदी ने कहा कि हम सभी वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के जरिये अपने नागरिकों को सुरक्षित रखने के रास्ते तलाश सकते हैं. उन्होंने अपील की कि ये सभी देश हाथ मिलाकर दुनिया के सामने उदाहरण प्रस्तुत कर सकते हैं. शुरुआती दौर में पीएम मोदी दुनिया के शीर्ष देशों के नेताओं से संपर्क में भी रहे. इज़रायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू का फोन कॉल आया, तो ब्रिटेन के पीएम बोरिस जॉन्सन से भी पीएम मोदी ने कोरोना को काबू करने के मुद्दे पर बात की.

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ये पीएम मोदी की दुनिया भर के शासनाध्‍यक्षों के साथ दोस्‍ती का असर है कि भारतीय परंपरा दुनिया के कोने-कोने में असर दिखा रही है. कोरोना के हमले के बाद अब भारतीय परंपरा का हर देश पालन कर रहा है. नमस्ते का भारतीय स्टाइल कोरोना के हमले के बाद दुनिया भर में इस्तेमाल होने लगा है ताकि किसी भी सामने आए व्यक्ति के सीधे संपर्क से बचा जा सके. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने केंद्र की तारीफ की और रीजनल डायरेक्टर पूनम खेत्रपाल ने भी भारत सरकार के कामकाज को सराहते हुए कहा कि यहां जो भी कदम उठाए जा रहे हैं वो सही हैं. कुल मिलाकर पीएम मोदी एक ऐसे ग्लोबल लीडर बन कर उभरे जिनकी तरफ कोरोना के खिलाफ लड़ाई में सब की नजर है.

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21 मार्च 2020 को जब रात 8 बजे पीएम मोदी ने देश को संबोधित करने का फैसला लिया था, तो इसका इंतजार पूरे भारत को था. सस्पेंस इस बात का था कि आखिरकार पीएम मोदी कोरोना के खिलाफ जंग में क्या ऐलान करने वाले हैं. ऐसे सस्पेंस में जब पीएम मोदी बोले तो साफ हो गया कि कोरोना के खिलाफ जंग में उन्हें जन भागीदारी की कितनी चिंता है और साथ ही चिंता इस बात की भी है कि इससे अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे असर को कम कैसे किया जाए. उन्होंने कोरोना संकट में 24 घंटे और 7 दिन जूझ रहे स्वास्थ्य कर्मियों की सराहना की और इन अनाम सेवाकर्मियों को सैल्यूट करने के लिए पीएम मोदी ने अपील की कि रविवार यानी मार्च 22 को शाम 5 बजे हर घर में लोग अपनी बालकनी या छत पर आकर ताली बजाएं या फिर थाली बजाएं. यही उन्हें सच्चा धन्यवाद होगा.

ये पुरानी बातें मैंने ये बताने के लिए दोहराईं हैं कि मोदी सरकार ने वुहान से कोरोना जैसी बीमारी के खतरे का सिग्नल पाते ही जनवरी 2020 से ही जंग की शुरुआत कर दी थी. 8 जनवरी से पहली बैठक भी शुरु हो गयी थी. आज भारत इस मुकाम पर खड़ा है कि 7 अक्टूबर को जब पीएम के किसी भी संवैधानिक पद पर रहते हुए 20 साल पूरे होंगे तो देश भर में 100 करोड़ वैक्सिनेशन लगाने का काम भी पूरा हो जाएगा. महामारी की शुरुआत में किसी ने भी नहीं सोचा था कि जिस देश के पास बीमारों के लिए मास्क न हो या फिर जांच के लिए किट न हो, वो चंद महीनों में पूरी दुनिया को कोरोना से लड़ने में मदद करने के लिए आगे आकर सबके लिए एक मिसाल बन जाएगा. भारत दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सिनेशन अभियान भी सफलता से पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ जाएगा.

इसका श्रेय जाता है पीएम मोदी को, जिन्होंने न सिर्फ इस कोरोना नाम की अनजानी जानलेवा बीमारी को गंभीरता से लिया, बल्कि फ्रंट से लीड भी किया. पीएम मोदी ने इससे लड़ने की ऐसी व्यूह रचना तैयार की कि मुश्किलों का सामना करते हुए भी देश जीत का दम भरने लगा. दुनिया के बड़े-बड़े अमीर देशों में स्वास्थ्य का बुनियादी ढांचा चरमरा गया, लेकिन पीएम मोदी ने इन डेढ़ सालों में इतना सुनिश्चित कर दिया है कि स्वास्थ्य का एक बुनियादी ढांचा पूरे देश में खड़ा हो गया है.

Tags: Coronavirus, India, Narendra modi

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