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अलर्ट! हवा में घंटों रह सकता है कोरोना वायरस, कर सकता है संक्रमित: नई स्टडी में दावा

स्टडी में अस्पतालों में तैयार किए गए कोविड-19 वॉर्ड्स में मौजूद हवा में कोरोना वायरस के सैंपल मिले हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
स्टडी में अस्पतालों में तैयार किए गए कोविड-19 वॉर्ड्स में मौजूद हवा में कोरोना वायरस के सैंपल मिले हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Corona Virus Study: स्टडी के अनुसार, जब कोविड-19 (Covid-19) के मरीज कमरे में ज्यादा समय गुजारते हैं, तो हवा में वायरस 2 घंटे से ज्यादा समय तक बना रह सकता है. इन कणों की दूरी मरीज से 2 मीटर से भी ज्यादा हो सकती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 6, 2021, 12:11 PM IST
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नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Corona Virus) हवा के जरिए भी फैल सकता है. यह चर्चा लंबे समय से जारी थी, लेकिन हाल ही में आई स्टडी (Study) में इसके सबूत भी मिले हैं. स्टडी में अस्पतालों में तैयार किए गए कोविड-19 वॉर्ड्स में मौजूद हवा में कोरोना वायरस के सैंपल मिले हैं. वहीं, दावा किया जा रहा है कि खुले में तैरने वाले ये कण 2 घंटों से ज्यादा समय तक हवा में बने रह सकते हैं. हालांकि, एसिम्प्टोमैटिक यानी बगैर लक्षणों वाले मरीजों के मामले में खतरा कुछ कम है.

सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलेक्युलर बायोलॉजी (Centre for Cellular and Molecular Biology) और सीएसआईआर इंस्टीट्यूट ऑफ माइक्रोबायल टेक्नोलॉजी (CSIR-Institute of Microbial Technology) की स्टडी में पता चला है कि आम वार्डों के मुकाबले कोविड वॉर्ड की हवा में कोरोना वायरस के कण मौजूद हैं.

वहीं, अंग्रेजी वेबसाइट द प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, ये कण हवा में 2 घंटे से ज्यादा समय तक बने रह सकते हैं. स्टडी के अनुसार, ये कण हवा के जरिए संक्रमण फैला सकते हैं. सीसीएमबी की तरफ से जारी बयान के मुताबिक, हवा में SARS-CoV-2 की चपेट में आने का सीधा संबंध कमरे में मौजूद मरीज, उनकी हालत और उनके संपर्क में आने से है.



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स्टडी के अनुसार, जब कोविड-19 के मरीज कमरे में ज्यादा समय गुजारते हैं, तो हवा में वायरस 2 घंटे से ज्यादा समय तक बना रह सकता है. इन कणों की दूरी मरीज से 2 मीटर से भी ज्यादा हो सकती है. हालांकि, स्टडी की अभी तक समीक्षा नहीं की गई है.

बगैर लक्षणों वाले मरीजों का क्या?
वहीं, ऐसे मरीजों के मामले में स्टडी से मिली जानकारी राहत देने वाली है. लक्षणों से जूझ रहे मरीज एसिम्प्टोमैटिक मरीजों की तुलना में ज्यादा खतरनाक हैं. स्टडी में कहा गया है कि बगैर लक्षणों वाले मरीजों के बैठने वाली जगह से वायरस नहीं फैलता है. जब तक कमरे में पंखे या एसी के जरिए हवा का बहाव न हो. स्टडी के लिए शोधकर्ताओं ने एयर सैंपलर के जरिए हवा से सैंपल इकट्ठे किए थे. फिर बाद में इन कणों का आरटीपीसीर के जरिए टेस्ट किया गया था. यह जानकारी सीसीएमबी ने दी है.
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