तब्लीगी जमात : पिछले साल कोरोना 'फैलाने' को लेकर किए गए बदनाम, अब कोविड पीड़ितों के शव का कर रहे अंतिम संस्कार

तबलीगी जमात के कई सदस्‍य पिछले साल मार्च में कोरोना पॉजिटिव मिले थे, जिसके बाद राजधानी दिल्ली स्थित निजामुद्दीन मरकज़ अचानक से सुर्खियों में आया था. (प्रतीकात्मक)

तबलीगी जमात के कई सदस्‍य पिछले साल मार्च में कोरोना पॉजिटिव मिले थे, जिसके बाद राजधानी दिल्ली स्थित निजामुद्दीन मरकज़ अचानक से सुर्खियों में आया था. (प्रतीकात्मक)

Coronavirus In India: भारत में कोरोना वायरस की पहली लहर के दौरान बीते साल तब्लीगी जमात (Tablighi Jamaat) के लोगों की छवि खराब की गई.

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अमरावती. भारत में कोरोना वायरस (Coronavirus In India) की पहली लहर के दौरान बीते साल तब्लीगी जमात (Tablighi Jamaat) के लोगों की छवि खराब की गई. दावा किया गया कि इन्हीं के चलते संक्रमण फैला. हालांकि अदालतों ने तब्लीगी जमात के लोगों को रिहा किया. इसके साथ ही कहा कि उन पर गलत आरोप लगाए गए. अब आंध्र प्रदेश के तिरुपति (Covid19 In Tirupati) में कोरोना वायरस रोगियों का अंतिम संस्कार करने का बीड़ा उठाया है.

समाचार एजेंसी द न्यूज मिनट की रिपोर्ट के अनुसार महामारी के दौरान लोगों की मदद करने और समुदाय और धर्म की परवाह किए बिना कोविड -19 पीड़ितों का अंतिम संस्कार करने के लिए संगठन ने तिरुपति यूनाइटेड मुस्लिम एसोसिएशन के तहत COVID-19 जॉइन्ट एक्शन कमेटी (JAC) की स्थापना की है.

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अब लोग हमारे प्रयासों की सराहना कर रहे- गौस
तब्लीगी जमात के सक्रिय सदस्य जेएमडी गौस ने कहा कि पिछले साल उन्हें महामारी के लिए दोषी ठहराया गया था लेकिन अब लोग उनके प्रयासों की सराहना कर रहे हैं. महामारी की दूसरी लहर देश भर में तबाही मचा रही है. लोग बेड, ऑक्सीजन और दवाओं के लिए तरस रहे हैं. कोविड -19 पीड़ितों की मौतों में भारी वृद्धि के चलते श्मशान घाटों पर भी बोझ बढ़ गया है.

संकट की ऐसी घड़ी में, तब्लीगी जमात कोविड -19 पीड़ितों के सम्मानजनक अंतिम संस्कार में मदद करने के लिए आगे आया है. गौस ने कहा कि वह फोन पर मिलने वाले इनपुट्स और रिक्वेस्ट के आधार पर हर रोज 60 वॉलंटियर्स के साथ कोआर्डिनेट करते हैं. उन्होंने कहा कि वे पिछले एक महीने से रोजाना कम से कम 15 शवों का अंतिम संस्कार कर रहे हैं. गौस ने कहा, 'पहली लहर में बहुत कम मौतें होती थीं जिनमें ज्यादातर बूढ़े लोग थे, लेकिन अब युवा भी मर रहे हैं.'

उन्होंने कहा, 'अंतिम संस्कार करने से पहले लोगों को समझाने या उन्हें सांत्वना देना कठिन हो जाता है.' गौस ने कहा कि 60 सदस्यों को तीन टीमों में बांटा गया है. प्रत्येक टीम को कम से कम चार-पांच  शव सौंपे जाते हैं. उन्होंने कहा कि वे  धार्मिक परंपराओं के आधार पर अंतिम संस्कार करते हैं.



'कई युवा हमारे साथ आए'

गौस ने  कहा 'अगर पीड़ित हिंदू है, तो हम एक कपड़ा और फूल माला पहनाते हैं. अगर वे ईसाई हैं तो हम शरीर को ताबूत में रखते हैं और प्रार्थना की व्यवस्था करने के लिए एक चर्च से फादर को बुलाते हैं. अगर पीड़ित मुसलमान हैं जनाज़े की नमाज़ रखते हैं.'

उन्होंने आगे कहा कि वे तबलीगी जमात के सदस्यों की मदद से अपने दम पर पीपीई किट की व्यवस्था कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि पुलिस, नगरपालिका और अन्य विभागों के कर्मचारी भी उनकी मदद कर रहे हैं. टीम ने कहा कि उन्होंने अब 536 लोगों का अंतिम संस्कार किया है. इनमें से 134 लोगों का पहली लहर में जबकि 402 पीड़ितों को दूसरी लहर में अंतिम संस्कार किया गया.


गौस ने कहा कि टीम में स्वंयसेवक के तौर पर वह लोग साथ हैं जो या तो ऑटो चलाते थे या मजदूर हैं या रेस्तरां में काम करते थे. उन्होंने यह भी कहा कि कम से कम 6 लोग उनके साथ ऐसे हैं जो ना तो जमात के हैं और ना ही मुसलमान हैं. गौस ने कहा, 'यह सभी हमारे काम से प्रेरित होकर साथ आए हैं.'

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