कोरोना टेस्टिंग के नियमों में बड़ा बदलाव, अब डॉक्टर की पर्ची के बिना कोई भी करा सकता है कोविड-19 की जांच

कोरोना टेस्टिंग के नियमों में बड़ा बदलाव, अब डॉक्टर की पर्ची के बिना कोई भी करा सकता है कोविड-19 की जांच
(AP Photo/Ajit Solanki)

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के अनुसार, तीन सितंबर तक देश में 47,738,491 नमूनों की जांच हुई, जिनमें से 10,59,346 नमूनों की जांच शुक्रवार को हुई.

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  • Last Updated: September 5, 2020, 9:43 AM IST
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नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Coronavirus In India) संक्रमण को मात देने के लिए भारत सरकार ने अपनी टेस्टिंग रणनीति में बड़ा बदलाव किया है. अब तक देश में जिला चिकित्साधिकारी के आदेश, किसी डॉक्टर के पर्ची या इलाकों में प्रशासन द्वारा रैंडम जांच के दौरान ही कोविड का टेस्ट कराया जा सकता था, लेकिन अब कोई भी अपनी जांच करा सकता है. इसके लिए अब चिकित्साधिकारी का आदेश और किसी भी डॉक्टर की पर्ची की जरूरत नहीं होगी.

एक आदेश में कहा गया है कि कंटेनमेंट जोन्स में काम कर रहे हेल्थवर्कर्स का टेस्ट जरूर होना चाहिए. इस आदेश के बाद किसी में लक्षण हों या ना हों अब कोई भी अपनी जांच करा सकता है. इसके साथ ही कहा गया है कि जिन भी लोगों ने बीते 14 दिनों में कोई अंतरराष्ट्रीय यात्रा की है, उनमें सिम्प्टमैटिक के अलावा भी सभी की जांच होगी.

अस्पताल में इन बीमारियों से जूझ रहे लोगों की होगी जांच
वहीं अस्पतालों में गंभीर एक्यूट रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन (SARI) से पीड़ित सभी रोगियों की जांच होगी. इसके साथ ही  हेल्थकेयर सेंटर में मौजूद सभी लक्षण वाले लोगों की जांच होगी. किसी दूसरे राज्य या दूसरे देशों की यात्रा करने वालों के लिए कोविड-19 निगेटिव होना अनिवार्य है. कहा गया है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान स्वास्थ्य विभाग द्वारा कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और ट्रैकिंग की रणनीति अपनाई जानी चाहिए. बता दें ICMR द्वारा जांच की रणनीति में किए गए बदलाव की एडवाइजरी शुक्रवार को जारी की गई.
जांच पर WHO ने की सराहना


बता दें शनिवार तक देश में कोरोना के 40,23,179 मामले हैं जिसमें 8,46,395 एक्टिव, 31,07,223 लोग ठीक हो गए हैं और 69,561  लोगों की मौत हो गई है. वहीं भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के अनुसार तीन सितंबर तक देश में 47,738,491 नमूनों की जांच हुई, जिनमें से 10,59,346 नमूनों की जांच शुक्रवार को हुई.

बीते दिनों एक प्रेस वार्ता में स्वाथ्य मंत्रालय ने जानकारी दी थी कि उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में रोज 90 प्रतिशत से अधिक आरटी-पीसीआर जांच हो रही है, जबकि अन्य राज्यों में आरटी-पीसीआर जांच, ट्रूनैट और सीबीएनएएटी जांच क्षमता सीमित है.

वहीं आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने कहा था कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने समन्वित तरीके से रैपिड एंटीजन टेस्ट का उपयोग करने को लेकर भारत की सराहना की है.
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