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Coronavirus India: भारत में वैक्सीन बना रही कंपनियां सही दिशा में कर रही काम- ICMR

भारत में कोरोना की तीन 
वैक्सीन पर काम जारी है. ( कॉन्सेप्ट इमेज.)
भारत में कोरोना की तीन वैक्सीन पर काम जारी है. ( कॉन्सेप्ट इमेज.)

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के महानिदेशक बलराम भार्गव ने कहा कि कोरोना वायरस (Coronavirus) के लिए विकसित वैक्सीन का ह्यूमन ट्रायल का फर्स्ट फेज पूरा हो गया है और यह सेकेंड फेज में पहुंच गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 5, 2020, 8:02 AM IST
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नई दिल्ली. भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के महानिदेशक बलराम भार्गव ने मंगलवार को कहा कि कोरोना वायरस के लिए स्वदेश विकसित दो टीकों का ह्यूमन ट्रायल का फर्स्ट फेज पूरा हो गया है और यह सेकेंड फेज में पहुंच गया है. इन टीकों को भारत बायोटेक द्वारा आईसीएमआर और जायडस कैडिला लिमिटेड के साथ मिलकर विकसित किया गया है.

भार्गव ने कहा कि सुरक्षित और कारगर टीका विकसित हो जाने पर मुख्य ध्यान इसकी प्राथमिकता तय करने और इसके निष्पक्ष वितरण, इसे पेश करने और कोल्ड चेन की व्यवस्था, भंडारण तथा टीका लगाने के लिये लोगों को प्रशिक्षित करने पर होना चाहिए. भार्गव ने मंगलवार को कहा कि भारत में कोविड-19 वैक्सीन के तीन कैंडिडेट अच्छी प्रगति कर रहे हैं.

भार्गव ने कहा कि दुनिया भर में 141 टीकों पर अनुसंधान चल रहा है और इनमें से 26 क्लीनिकल परीक्षण के विभिन्न चरण में हैं. उन्होंने कहा, ‘अभी ऐसे तीन टीके हैं, जो भारत में क्लीनिकल परीक्षण के विभिन्न चरण में हैं. पहला इनएक्टीवेटेड टीका भारत बायोटेक ने विकसित किया है, जिसने 11 निर्धारित चिकित्सा संस्थानों में फर्स्ट फेज का ट्रायल पूरा कर लिया है और इसका सेकेंड फेज की स्टडी शुरू हो गई है. प्रथम और दूसरा चरण सुरक्षा तथा शुरुआती असर के बारे में है.’



महानिदेशक ने कहा, ‘इसी तरह जायडस कैडिला के डीएनए टीके ने भी 11 चिकित्सा संस्थानों में फर्स्ट फेज का अध्ययन पूरा कर लिया है और अपना सेकेंड फेज शुरू कर दिया है, जो प्रगति पर है. वहीं, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई),पुणे द्वारा रीकोम्बीनेंट ऑक्सफोर्ड टीके का उत्पादन किया जाना है. इस टीके के दूसरे और थर्ड फेज के क्लीनिकल ट्रायल को कल मंजूरी प्रदान की गई. यह 17 स्थानों पर एक हफ्ते के अंदर किया जाएगा. ’
कोविड से हो रही मौतों पर मंत्रालय ने क्या कहा?
वहीं स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव राजेश भूषण ने एक सवाल के जवाब में कहा कि देश में कोरोना वायरस संक्रमण से होने वाली सारी मौतें दर्ज नहीं किये जाने का दावा महज आधी-अधूरी जानकारी के आधार पर निकाला गया एक निष्कर्ष है. उन्होंने कहा कि महामारी के शुरुआती चरण में मंत्रालय ने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के परामर्श से और मौतें दर्ज किये जाने के तरीकों पर विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशानिर्देशों के मुताबिक स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किये थे.

उन्होंने कहा, ‘हमने महामारी के शुरूआती चरण में पाया कि ऐसे कुछ राज्य हैं जो पहले से अन्य बीमारियों से ग्रसित मरीजों के कोरोना वायरस से संक्रमण के बाद मौत होने पर कोविड-19 से मौत के रूप में नहीं दर्ज कर रहे हैं. इसलिए हमनें स्पष्ट किया कि कोई भ्रम की स्थित नहीं रहे और लिखित दिशानिर्देश जारी किये. ’ उन्होंने कहा कि इसके अलावा कुछ खास शहरी इलाकों में हुई ज्यादातार मौतें दर्ज की गई, जहां सामान्य दिनों में भी मृत्यु पंजीकृत करने की दर अधिक रहती है.

सचिव ने कहा, ‘महाराष्ट्र में सामान्य समय में (जब वहां कोविड-19 नहीं था) मृत्यु पंजीकरण की दर 93 प्रतिशत है. तमिलनाडु और दिल्ली में सामान्य समय में यह 100 प्रतिशत था. वहीं, राष्ट्रीय औसत 80 प्रतिशत है.' (भाषा इनपुट के साथ)
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