COVID-19: Sero-Survey से मिली बड़ी तस्वीर, दिल्ली के कुछ हिस्से हर्ड इम्यूनिटी के करीब- प्रोफेसर जयप्रकाश

COVID-19: Sero-Survey से मिली बड़ी तस्वीर, दिल्ली के कुछ हिस्से हर्ड इम्यूनिटी के करीब- प्रोफेसर जयप्रकाश
डॉक्टर मुलियाल ने कहा कि असली तस्वीर बहुत बड़ी है. Reuters/ News18.com

दिल्ली में सीरो-प्रेवलन्स स्टडी (Sero-Prevalence study ) से पता चला है कि राष्ट्रीय राजधानी की लगभग एक चौथाई आबादी कोरोनावायरस से संक्रमित हो चुकी है.

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निखिल घनेकर
नई दिल्ली. 
दिल्ली में सीरो-प्रेवलेंस स्टडी (Sero-Prevalence study ) से पता चला है कि राष्ट्रीय राजधानी की लगभग एक चौथाई आबादी कोरोनावायरस से संक्रमित हो गई है. इस संक्रमण के खिलाफ इम्यूनिटी भी डेवलप हो गई है. वैज्ञानिकों ने इसे हर्ड इम्यूनिटी (Herd Immunity) का अच्छा संकेत बताया है. News18.com ने स्टडी के रिजल्ट पर वैज्ञानिक सलाहकार समिति, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी के अध्यक्ष और क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज वेल्लोर के प्रिंसिपल रह चुके प्रोफेसर जयप्रकाश मुलियिल ( Professor Jayaprakash Muliyil) से बात की. बातचीत में डॉक्टर मुलियिल ने कहा कि 'ये सभी रैंडम सैंपल थे. जब आप रैंडम सैंपलिंग करते हैं तो यह पूरी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है. जब कुल जनसंख्या का औसत 23.5% है, तो इसका मतलब है कि 23.5% लोग जो संक्रमित हुए थे, अब उनमें कोरोना के खिलाफ इम्यूनिटी बन गई और मेरी राय में इम्यूनिटी लंबे समय तक चलेगी.'

डॉक्टर ने कहा कि 'आपको यह समझना होगा कि यह एक औसत है और औसत आपको कभी नहीं बताता कि वास्तव में क्या चल रहा है. इसलिए आपको यह पता लगाना होगा कि क्लस्टर कैसे हैं.क्लस्टर सैंपलिंग में, आप क्ल्स्टर्स को देख सकते हैं. अगर क्लस्टर का आकार बहुत बड़ा है, तो आ छ सकते हैं - क्या क्लस्टर में सीरो-पॉजिटिविटी का हाई और लो प्रेवलेंस है? वह अच्छी तरह से क्लस्टर के बारे में जानकारी देगा. क्लस्टर का आकार 100 से थोड़ा अधिक होना चाहिए.'

डॉक्टर मुलियिल  ने कहा कि 'क्लस्टर के तहत, कुछ 40% (पॉजिटिविटी दर) दिखाएंगे, कुछ 10% या 15% हैं और यह विविधता है. 30-40% पॉजिटिविटी दर वाले लोग तेजी से हर्ड इम्यूनिटी स्तर के करीब पहुंच रहे हैं जिस स्थिति में उन क्लस्टर्स में संक्रमण एक्टिव नहीं रहेगा और आप देखेंगे कि उन क्षेत्रों में नए मामले तेजी से कम आएंगे. तीसरा सर्वे यह दर्शाता है कि एक महीने पहले क्या हुआ था. लगभग दो सप्ताह के बाद केवल आईजीजी एंटीबॉडी अच्छी तरह से विकसित होते हैं. तो वर्तमान में वास्तविक संक्रमण प्रसार अधिक हो सकता है.'
'दिल्ली में हमें क्लस्टर टू क्लस्टर देखना चाहिए'


उन्होंने कहा कि 'मेरी राय में दिल्ली में नए केस की ओर से जाने के बजाय हमें क्लस्टर टू क्लस्टर देखना चाहिए. हर क्लस्टर पीक पर जाएगा और हर्ड इम्यूनिटी तक पहुंच जाएगा और मामले कम आना शुरू हो जाएंगे. इससे आखिरकार महामारी खत्म होगी.'

क्लस्टर सैंपलिंग पर बात करते हुए डॉक्टर ने कहा कि 'आप जियोग्राफिक क्लस्टर चुनते हैं. यह सुविधाजनक है क्योंकि इसमें से कुछ अधिक समरूपता पैदा हो सकती है. फिर आप एक वार्ड में जाते हैं और इसे एक क्लस्टर मानते हैं. आपको दिल्ली के हर वार्ड को कवर करने की जरूरत नहीं है. महामारी की दिशा के बारे में जानने के लिए, वास्तव में क्लस्टर्स को फॉलो करना होगा. उदाहरण के लिए धारावी संक्रमण के पीक पर पहुंच गई और अब मामले कम आ रहे हैं.'

डॉक्टर ने कहा कि 'इसी तरह यदि आप क्लस्टर टू क्लस्टर  फॉलो करेंगे तो आप समझ जाएंगे कि क्या महामारी  खुद ही खत्म हो गई. हम हमेशा क्रेडिट ले सकते हैं, लेकिन यह शरीर की इम्यूनिटी का कमाल है. अगर इम्यून लोगों का घनत्व बढ़ता है तो वायरस का रास्ता खत्म हो जाता है.'

दिल्ली के अलावा चेन्नई और मुंबई में भी हो स्टडी?
दिल्ली के अलावा चेन्नई और मुंबई में ऐसी स्टडी करने के सवाल पर डॉक्टर ने कहा 'मैं इस तरह से प्रिस्क्रिप्शन नहीं दूंगा. एक बार जब संक्रमण पीक पर पहुंचता है और मामले कम आने लगे तो आप जानते हैं कि वे हर्ड इम्यूनिटी स्तर तक पहुंच रहे हैं. ध्यान अब स्क्रीनिंग पर नहीं बल्कि मुख्य रूप से उन लोगों पर होना चाहिए जिनके लक्षण मिल चुके हैं. उनकी जाँच होनी चाहिए क्योंकि कोविड -19  में निमोनिया की तुलना में थोड़ा अलग क्लिनिकल मैनेजमेंट है.'

सीरो प्रेवलेन्स स्टडी के व्यावहारिकता से जुड़े सवाल पर डॉक्टर मुलियिल ने कहा-  'स्टडी लोकलाइज्ड के साथ-साथ बड़ी हो. हालांकि हम सभी ने कहा कि बड़ी संख्या में लोग संक्रमित होते हैं और आप उन्हें नहीं देखते .  किसी ने भी इस सर्वेक्षण के होने तक इस पर विश्वास नहीं किया था. जब लोगों ने यह देखा तो उन्हें एहसास हुआ, 'ओह माई गॉड', इसलिए लाखों दिल्लीवासी संक्रमित हो गए.  हमें लगा कि हम इसे नियंत्रित कर रहे हैं. यह बकवास है और यह एक छोटे से अंश पर आधारित है. आप हिमखंड के सिरे को देख रहे थे और अब सर्वेक्षण के बाद हम हिमखंड के  पूरे आकार को देख सकते हैं.'

कब तक चलेगी इम्यूनिटी?
डॉक्टर ने कहा कि 'कोरोना से रिकवर हुए मामलों की संख्या के सभी मायने बिल्कुल बेतुके हैं क्योंकि असली तस्वीर बहुत बड़ी है. अब हमें संक्रमण फैलने की सही सीमा का पता चल गया है.'

इम्यूनिटी लेवल से क्या होगा यह पूछे जाने पर डॉक्टर ने बताया कि 'इस पर दो राय है. एक यह है कि अब हर कोई इस बात से सहमत है कि हमारे पास इम्यूनिटी है और इसके बारे में कोई भ्रम नहीं है.  हालांकि अभी भी एक विवाद है कि यह इम्यूनिटी कितने समय तक चलता है. कुछ का मानना है कि यह सीमित  समय तक चलेगा. मेरे जैसे लोगों का मानना है कि यह लंबे समय तक चलेगा.'

डॉक्टर ने कहा कि 'यह देखने के लिए की यह कितने लंबे समय तक सुरक्षा दे पाएगा इसके लिए आपको दो से तीन साल तक इंतजार करना होगा. इम्यूनोलॉजी एक बहुत ही जटिल विषय है और मैं इसे पूरी तरह से नहीं समझता लेकिन मैं एक आशावादी व्यक्ति हूं और मुझे लगता है कि यह हमारे लिए काफी अच्छा होगा. महामारी के संदर्भ में मुझे लगता है कि हम इस बात का सबूत देख रहे हैं कि कुछ क्षेत्रों में हर्ड इम्यूनिटी हो चुकी है.'
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