फिलहाल कोरोना जाने को तैयार नहीं, ऐसे में कब से फिर स्कूल जा सकेंगे बच्चे?

फिलहाल कोरोना जाने को तैयार नहीं, ऐसे में कब से फिर स्कूल जा सकेंगे बच्चे?
हर माता-पिता के दिमाग में यह सवाल है कि बच्चे कबसे स्कूल जा सकेंगे (सांकेतिक फोटो)

जानकार कहते हैं, "व्यक्तिगत तरह से दी जाने वाली स्कूली शिक्षा की कमी (lack of in-person schooling) बच्चे में सामाजिक कौशल (social skills) विकसित करने की क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित करती है."

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 19, 2020, 6:58 PM IST
  • Share this:
(एनसी सत्पथी)

नई दिल्ली. किसी भूमिका को छोड़ते हैं: हम कोरोना वायरस (Coronavirus) का प्रकोप शुरु होने के बाद पिछले आठ महीनों से अपने जीवन के सबसे अभूतपूर्व समय में कैसे जी रहे हैं; कैसे वैज्ञानिक समुदाय (Scientific Community) अभी भी विश्वास के साथ भविष्यवाणी नहीं कर सकता है कि इस सुरंग के अंत में प्रकाश कब होगा. और चलिए सीधे मुद्दे पर आते हैं, हर माता-पिता (parents) के दिमाग में सबसे पहली बात क्या है: स्कूल फिर कब से खुलेंगे? इस पर न्यूयॉर्क से नई दिल्ली (New Delhi) तक दुनिया भर में एक उग्र बहस हो रही है. कई शिक्षा विशेषज्ञों (education experts) का कहना है कि बच्चे महामारी (pandemic) से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं क्योंकि वे मार्च के मध्य से ही घरों में बंद हैं. वे कहते हैं, व्यक्तिगत तरह से दी जाने वाली स्कूली शिक्षा की कमी बच्चे में सामाजिक कौशल (social skills) विकसित करने की क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित करती है.

यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग में वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य (global public health) की अध्यक्ष प्रोफेसर देवी श्रीधर ने न्यूज 18 को एक हालिया साक्षात्कार (interview) में बताया, "स्कूलों को प्राथमिकता देनी होगी, बच्चों के बारे में पहले सोचना होगा... संदेश इससे पहले कि हम कुछ और खोलें, बच्चों को वापस स्कूल (school) भेजे जाने की जरूरत है. यह एक आर्थिक तर्क भी है, क्योंकि यह भविष्य की उत्पादकता से जुड़ा है.” लेकिन नई दिल्ली में, बाजार परिसरों (market complexes) में पहले से ही भीड़भाड़ हो चुकी है, जिससे कुछ दिनों से ट्रैफिक जाम हो जा रहा है.



बाहरी गतिविधियों से वंचित बच्चों के लिए मुश्किल हो रहा ऑनलाइन क्लासेज में ध्यान लगाना
बाहरी गतिविधियों से वंचित, पहले से ही ऊब चुके बच्चे का अपनी ऑनलाइन कक्षाओं के दौरान ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो रहा है. कुछ उदाहरणों में, माता-पिता का सारा समय ऑनलाइन कक्षाओं में भाग लेने और होमवर्क पूरा कराने में ही जा रहा है. निश्चित रूप से, भारतीय सामाजिक संरचना में असमानता के कारण ऑनलाइन कक्षाएं दीर्घकालिक समाधान नहीं हो सकती हैं, जहां अधिकांश घरों में लैपटॉप या स्मार्टफोन नहीं हैं, और फिर नेटवर्क कनेक्शन में आने वाली समस्याओं के तो कहने की क्या?

फिलहाल स्कूलों को खोले जाने में अभी लंबा समय लगेगा
कुछ अति उत्साही महामारी विज्ञानियों के पूर्वानुमानों से बनी लोकप्रिय धारणा कि गर्मी या तो कोरोना वायरस को मार देगी या शून्य के करीब ला देगी और हम सभी जल्द ही अपने साधारण जीवन में वापस चले जाएंगे, जो बाद में गलत साबित हुआ. कई लोगों ने सोचा कि अगर जुलाई में नहीं, तो भी ज्यादातर स्कूल गर्मी की छुट्टी के बाद फिर से खुल जायेंगे, या फिर अगस्त महीना या सितंबर सबसे अच्छा हो सकता है. लेकिन गर्मी लगभग बीत चुकी है और वायरस 27 लाख से अधिक भारतीयों को संक्रमित कर चुका है और अब तक 51,000 से ज्यादा लोगों को मार चुका है. और फिलहाल कोविड-19 के जल्द ही जाने का भी कोई संकेत नहीं है.

यह भी पढ़ें: छोटे कारोबारियों को सरकार देगी 20000 करोड़ रुपए, जानिए आप कैसे उठा सकते फायदा

बहरहाल केंद्र और राज्य सरकारें जो भी तय करें और जब से भी स्कूल खोले जा सकें लेकिन एक बात निश्चित है. स्कूलों के लिए फिर से पहले की तरह अपना काम करने में अभी बहुत समय लगेगा. इसमें अभी लंबा समय है, जब स्कूल की एक ही इमारत में सभी कक्षाएं एक ही निश्चित अवधि में साथ में चल सकेंगीं.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज