कोरोना की मार और पैसों की किल्लत, खाली हाथ खाड़ी देशों से केरल लौट रहे प्रवासी कामगार

बात केरल की करें, तो यहां अनुमानित 2.5 मिलियन केरलवासी कोरोना वायरस महामारी होने से पहले खाड़ी देशों में काम कर रहे थे. (PTI)
बात केरल की करें, तो यहां अनुमानित 2.5 मिलियन केरलवासी कोरोना वायरस महामारी होने से पहले खाड़ी देशों में काम कर रहे थे. (PTI)

कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus Pandemic) और तेल की कीमतों में गिरावट से खाड़ी देशों (Persian Gulf) में बड़े पैमाने पर मजदूरों की छंटनी हुई है. इसकी ज्यादातर मार प्रवासी मजदूरों (Migrant Workers) पर ही पड़ी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 6, 2020, 7:06 AM IST
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कोच्चि. खाड़ी देशों में काम करने वाले प्रवासी भारतीय (Migrant Workers) अब देश लौट रहे हैं. कोरोना वायरस (Coronavirus Lockdown) के बाद लगे लॉकडाउन और कामबंदी में उनकी नौकरी चली गई. कर्जा भी हो गया. खाने-पीने की दिक्कतों के कारण वो बीमार भी पड़ने लगे हैं, जिसके बाद उन्हें सब कुछ छोड़ भारत लौटने को मजबूर होना पड़ रहा है. यहां लौटने पर उन्हें होटल या फिर हॉस्टल में रखकर क्वारंटीन किया जा रहा है. इसके बदले उनसे फीस वसूली जा रही है. केरल में श्रमिक संगठन इसका विरोध कर रहे हैं.

लंबे वर्षों तक अपने परिवार के लिए उनसे दूर रहकर खाड़ी (Persian Gulf) में मजदूरी करने वाले रामकृष्णन अथेकातिल ने कल्पना जरूर की थी कि भारत वापस बसना कैसा होगा? लेकिन उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि इस तरह लौटना पड़ेगा... कर्ज में डूबा हुआ, बीमार और खाली हाथ.

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रामकृष्णन भारत के दक्षिण-पश्चिमी तट पर नारियल और ताड़ के पेड़ों से घिरे एक छोटे से गांव से आते हैं. उनके पिता गरीबी के कारण काम की तलाश में फारस की खाड़ी के लिए रवाना होने वाले पहले व्यक्ति थे. बाद में 47 वर्षीय रामकृष्णन और उनके चार भाई भी रोजी-रोटी के लिए खाड़ी देश चले गए.
रामकृष्णन ने कहा- 'जब से मैं छोटा था, तब से ही जाना चाहता था. मैंने अपने पिता से कहता रहता था कि मुझे अपने साथ लेकर जाए.' बाद में चारों भाई एक साथ खाड़ी के लिए रवाना हुए. वहां उन्हें जल्द ही कंस्ट्रक्शन साइट पर काम भी मिल गया. प्रवासियों ने रेगिस्तान में शानदार शहर बसाया, स्कूल-अस्पताल और बिजली संयत्रों का निर्माण किया. बंदरगाह बनवाएं और अरब देश को आधुनिक में बदलने में मदद की. लेकिन, अब हालात बदल चुके हैं.


तेल की कीमतों में गिरावट से हुई छंटनी
कोरोना वायरस महामारी और तेल की कीमतों में गिरावट से खाड़ी देशों में बड़े पैमाने पर मजदूरों की छंटनी हुई है. इसकी ज्यादातर मार प्रवासी मजदूरों पर ही पड़ी है. पैसों की किल्लत, कोरोना महामारी के डर और खाने-पीने की दिक्कत के कारण अब हजारों श्रमिक वापस अपने देश लौट रहे हैं.

भारत प्रवासी श्रम का सबसे बड़ा स्रोत

दुनियाभर में कोरोना वायरस के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं. अब तक कोई कारगर वैक्सीन भी नहीं मिल पाई है, जो आम लोगों तक आसानी से पहुंचे. ऐसे में इस बात की बहुत कम संभावना है कि दुनिया के 164 मिलियन प्रवासी कामगारों के लिए जल्द आने वाला समय सामान्य हो जाएगा. खाड़ी देशों में काम करने वाले प्रवासी श्रमिकों में एक तिहाई दक्षिण एशिया से आते हैं. भारत दुनिया में इस तरह के प्रवासी श्रम का सबसे बड़ा स्रोत है.

साल के अंत तक लौटेंगे 5 लाख श्रमिक
अगर बात केरल की करें, तो यहां अनुमानित रूप से 25 लाख केरलवासी कोरोना वायरस महामारी होने से पहले खाड़ी देशों में काम कर रहे थे. विशेषज्ञों का कहना है कि रिकॉर्ड संख्या में महामारी उन्हें वापस अपने देशों की तरफ धकेल रही है. एक अनुमान के मुताबिक, 5 लाख प्रवासियों और उनके परिवारों के साल के अंत तक वापस लौटने की उम्मीद है.

केरल सरकार की एजेंसी द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, मई के बाद से लगभग 4 लाख लोग पहले ही खाड़ी से अपने राज्य लौट चुके हैं. कम से कम आधे लोगों ने उनकी नौकरी चली गई और पैसों की किल्लत हो गई थी, इसलिए उन्हें मजबूरन लौटना पड़ा.


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इस बीच, कोरोना महामारी ने कुछ देशों को विदेशी प्रवासियों पर उनकी निर्भरता को कम करने के लिए राष्ट्रीयकृत योजना बनाने के लिए प्रेरित किया है. ऐसे में साफ है कि महामारी के खत्म होने के बाद भी अब इन प्रवासी मजदूरों का खाड़ी जाकर वापस नौकरी करना आसान न होगा.
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