कोरोना पर नहीं काबू! केंद्र का कमियां गिनाते हुए महाराष्ट्र, पंजाब और छत्तीसगढ़ को चिट्ठी

स्वास्थ्य मंत्रालय ने तीनों राज्यों से आई रिपोर्ट को लेकर कोरोना पर काबू पाने में नाकाम रहे जिलों का नाम उजागर करके कमियों का जिक्र किया है, जिससे कि सुधार लाया जा सके. फाइल फोटो

स्वास्थ्य मंत्रालय ने तीनों राज्यों से आई रिपोर्ट को लेकर कोरोना पर काबू पाने में नाकाम रहे जिलों का नाम उजागर करके कमियों का जिक्र किया है, जिससे कि सुधार लाया जा सके. फाइल फोटो

Coronavirus Vaccination: केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने कहीं कंटेनमेंट जोन को लेकर कहीं टेस्टिंग को लेकर सवाल खड़े किए हैं. इसके साथ ही कहीं अस्पताल के इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 11, 2021, 7:01 PM IST
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नई दिल्ली. महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और पंजाब में कोरोना वायरस (Coronavirus) संक्रमण को काबू करने में हो रही कमियों पर सवाल खड़ा करते हुए केंद्र सरकार ने तीनों राज्यों को पत्र लिखा है. ये पत्र राज्यों के जिलों में तैनात सेंट्रल टीमों के मूल्यांकन के आधार पर लिखा गया है. केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राज्यों में टेस्टिंग, कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग, कंटेनमेंट ऑपरेशन, अस्पताल और इंफ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धता को लेकर सवाल खड़ा किया है. बता दें कि इन तीन राज्यों के अलग-अलग जिलों में अलग-अलग समस्याएं देखने को मिली हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने कहीं कंटेनमेंट जोन को लेकर कहीं टेस्टिंग को लेकर सवाल खड़े किए हैं. इसके साथ ही कहीं अस्पताल के इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं.

दरअसल महाराष्ट्र के तीस जिलों में सेंट्रल टीमों की तैनाती की गई है, छत्तीसगढ़ में 11 टीमें तैनात हैं, तो पंजाब में 9 टीमें जमीन पर काम कर रही हैं. ये टीमें राज्यों को जमीनी हालात पर काबू पाने और सुझाव देने को लेकर भेजी गई हैं. प्रत्येक जिले में दो लोग सेंट्रल टीम में हैं, जो रोजाना मिनिस्ट्री के द्वारा नियुक्त अलग-अलग राज्यों के लिए नोडल ऑफिसर को अपनी रिपोर्ट भेजती हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय ने इन तीनों राज्यों से आई रिपोर्ट को लेकर कोरोना पर काबू पाने में नाकाम रहे जिलों का नाम उजागर करके कमियों का जिक्र किया है, जिससे कि सुधार लाया जा सके.

पंजाब

केंद्र सरकार की सेंट्रल टीम ने पटियाला और लुधियाना जैसे जिलों में कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग औऱ सर्विलांस ट्रेसिंग के उपायों पर जोर दिया है. टीम ने कहा है कि SAS नगर में मैनपावर की कमी से व्यवस्था प्रभावित हो रही है. प्राथमिकता के आधार पर कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग के लिए अतिरिक्त मैनपावर तैयार की जाए. केंद्रीय टीम ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पटिलाया में टेस्टिंग कम है और रूपनगर में कोई आरटी-पीसीआर टेस्टिंग लैब भी नहीं है. इसके अलावा रूपनगर और साहिबजादा अजीत सिंह नगर में कोरोना मरीजों के लिए समर्पित कोई अस्पताल भी नहीं है. ऐसे में मरीजों को चंडीगढ़ रेफर किया जा रहा है. इसके साथ ही टीम ने पटियाला और लुधियाना में 45 बरस से ऊपर के मरीजों के टीकाकरण की रफ्तार धीमी होने की बात भी कही है.
छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ के जिलों में तैनात केंद्रीय टीमों ने रायपुर और जशपुर में कंटेनमेंट जोन में कमियों को रेखांकित किया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसा लगता है कि कंटेनमेंट जोन में लोगों की आवाजाही पर कोई रोक नहीं है. ऐसे में आवश्यक है कि माइक्रो लेवल पर कड़ाई के साथ कंटेनमेंट जोन बनाए जाए. कोरबा जिले में कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग के प्रयासों पर जोर देने की जरूरत है. कंटेनमेंट जोन में गतिविधियों और कोरोना टेस्टिंग को लेकर पब्लिक के विरोध पर लगाम लगाने की जरूरत है, इसे प्राथमिकता के आधार पर किए जाने की जरूरत है. टीम के मुताबिक कोरबा, दुर्ग, बलोद जिले में आरटी-पीसीआर टेस्टिंग फैसिलिटी की कमी है, टेस्टिंग को बढ़ाना समय की मांग है. इसी तरह आरटी-पीसीआर टेस्टिंग क्षमता को बलोद में भी बढ़ाने की जरूरत है. राज्य सरकार आरटी-पीसीआर टेस्टिंग को बढ़ाने के लिए मोबाइल टेस्टिंग लैब का सहारा ले सकती है.

महाराष्ट्र



केंद्र की टीम ने महाराष्ट्र में कोरोना वायरस संबंधी व्यवहार के पालन में गड़बड़ी, ऑक्सीजन और वेटिंलेटर की कमी के साथ ही सर्विलांस और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग में कमियों पर सवाल खड़े किए हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि सतारा, सांगली और औरंगाबाद में कंटेनमेंट ऑपरेशंस बहुत कम हैं, जिन्हें संतोषजनक नहीं कहा जा सकता है. बुलढाणा, सतारा, औरंगाबाद और नांदेड़ में भी यही हालत है. टीम ने कहा है कि बुलढाणा में ज्यादातर मामले कंटेनमेंट जोन के बाहर से आ रहे हैं. ऐसे में कंटेनमेंट जोन का क्षेत्रफल बढ़ाए जाने की आवश्यकता है.

दूसरी ओर सतारा, भंडारा, पालघर, अमरावती, जालना और लातूर जिले में टेस्टिंग क्षमता पर भारी दबाव है, रिपोर्ट्स आने में देरी हो रही है. नांदेड़ और बुलढाणा में आरटी-पीसीआर टेस्ट की संख्या बेहद कम है. इसके साथ ही बुलढाणा में टेस्टिंग को लेकर पब्लिक का विरोध भी देखने को सामना आ रहा है. केंद्र को भेजी गई रिपोर्ट में स्थानीय टीम ने कहा है कि ज्यादातर मरीज होम आइसोलेशन में हैं, जिनके लिए लगातार फॉलो अप की जरूरत है. हालांकि अभी ऐसा नहीं हो रहा है.

टीम ने कहा है कि अहमदनगर, औरंगाबाद, नागपुर और नंदूरबार में मेडिकल सप्लाई के साथ ऑक्सीजन और वेटिंलेटर्स की बहुत ज्यादा मांग है. अस्पतालों में बिस्तर भरे पड़े हैं. अहमदनगर जिले के मरीजों को पास के अस्पतालों में भेजा जा रहा है. भंडारा, पालघर, उस्मानाबाद और पुणे में मेडिकल सप्लाई की समस्या है. सतारा और लातूर जैसे जिलों में वेटिंलेटर्स ठीक से काम नहीं कर रहे हैं. अस्पतालों के स्तर पर और जिला प्रशासन के स्तर पर ऑक्सीजन की आपूर्ति बनाए रखने के लिए तत्काल कदम उठाए जाने की आवश्यकता है.
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