सावधान! अब छोटे शहरों-कस्बों में आ रहा है कोरोना, पढ़ें ये रिपोर्ट

जिन 10 राज्यों में कोरोना के ज्यादा मामले आए हैं और जहां सेंटर की टीम गई है.

जिन 10 राज्यों में कोरोना के ज्यादा मामले आए हैं और जहां सेंटर की टीम गई है.

Coronavirus Outbreak in India: स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों में बताया कि महाराष्ट्र के अमरावती में 7 वार्ड में कभी कोरोना के मामले ज्यादा थे. अब उनमें न के बराबर मामले आ रहे हैं. नए 7 वार्ड में अब केस बढ़ने लगे हैं.

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नई दिल्ली. बेशक देश के कुछ राज्यों और खासकर शहरों में कोरोना के केस (Covid Cases in India) ज्यादा मामले हो. लेकिन ऐसा सोचकर निश्चित न हो जाएं कि छोटे शहरों या कस्बों में केस नही बढ़ेगा. स्वास्थ्य मंत्रालय (Health Ministry) में उच्च सूत्रों में बताया कि कोरोना वायरस का एरिया शिफ्ट हो रहा है. जहां पुराने वक्त में ज्यादा एक्सपोजर हुआ है, वहां कम मामले हैं, मगर जहां कहीं भी कम एक्सपोजर हुआ है; वहां अब कोविड मामले बढ़ रहे हैं. इसका मतलब ये हुआ कि अभी तक जिन इलाकों में कोरोना के मामले कम हैं, वहां केस में बढ़ोतरी का खतरा है.

स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों में बताया कि महाराष्ट्र के अमरावती में 7 वार्ड में कभी कोरोना के मामले ज्यादा थे. अब उनमें न के बराबर मामले आ रहे हैं. नए 7 वार्ड में अब केस बढ़ने लगे हैं. इसी तरह मुंबई में जिन वार्ड में अभी ज्यादा मामले आ रहे हैं, वहां पहले एक्सपोजर ही कम हुआ था. जहां ज्यादा हुआ था वहां मामले कम हैं.

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खास एरिया में टेस्टिंग पर जोर
जिन 10 राज्यों में कोरोना के ज्यादा मामले आए हैं और जहां सेंटर की टीम गई है, वो रोजाना राज्य सरकार और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट भेज रहे हैं. कोरोना को फैलने के लिए क्या उपाय किए जाने चाहिए, इसपर भी सुझाव दिए जा रहे हैं. जिन राज्यों में उनके अलग अलग इलाकों से ज्यादा मामले आ रहे हैं, उन्हीं इलाकों में टेस्टिंग और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग बढ़ाने पर जोर देने की बात कही गई है.

कोरोना के मामले बढ़ने के पीछे मुख्य कारण :

>>Susceptible Population (अतिसंवेदनशील आबादी): वो लोग जो कोरोना वायरस के संपर्क में नहीं आए, लेकिन उसकी चपेट में आ रहे हैं.



>>Disproportionate Exposure (गैरअनुमानित एक्सपोजर): उदाहरण के तौर पर अमरावती में पहले 10% से ज्यादा आबादी वायरस के संपर्क में आई नहीं थी. पहले वो कोरोना से बचने के लिए सुझाए प्रोटोकॉल को अपना रहे थे. जैसे ही ढीला रवैया अपनाया दिक्कत सामने आने लगी.

>>Testing Exposure: टेस्टिंग बढ़ा भी दिए गए और जहां ज्यादा एक्सपोजर हो चुका है, तो टेस्टिंग बढ़ाने से ज्यादा फायदा नहीं हुआ.

>>Negligence: बाकी राज्यों में ढिलाई बरती गई. सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क, सैनिटाइजर का ख्याल नहीं रखा गया.

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नए वेरिएंट का कितना असर?

अब तक वेरिएंट ने ज्यादा असर नहीं किया, पर जिन अलग अलग राज्यों में ये वेरिएंट गया, वहां आगे क्या हो सकता है ये बड़ा सवाल है. फिलहाल इसका पता लगाया जा रहा है कि नए वेरिएंट से कोई ट्रांसमिशन, हाई डिजीज रेट हुआ है या नहीं. ऐसे लेकर साइंटिफिक सबूत नहीं हैं.

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