फाइजर और मॉडर्ना वैक्सीन से लोकल ट्रायल की शर्त हटाने से क्या होगा फायदा? यहां समझें

अब जिन विदेशी वैक्सीन को विश्व स्वास्थ्य संगठन या अमेरिकी एफडीए से आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी मिल चुकी होगी, उन्हें भारत में ट्रायल से नहीं गुजरना होगा.

अब जिन विदेशी वैक्सीन को विश्व स्वास्थ्य संगठन या अमेरिकी एफडीए से आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी मिल चुकी होगी, उन्हें भारत में ट्रायल से नहीं गुजरना होगा.

Covid Vaccination in India: भारत सरकार ने 31 दिसंबर 2021 तक सभी नागरिकों को वैक्सीनेट करने का लक्ष्य रखा है. ऐसे में आइए जानते हैं कि फाइजर और मॉडर्ना वैक्सीन के भारत आने के बाद अब कोरोना से लड़ने में कितनी और कैसी मदद हो पाएगी:-

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Covid Vaccination in India: कोरोना वायरस की दूसरी लहर देश में अब ढलान पर है, लेकिन तीसरी लहर से बचने के लिए सरकार तेजी से वैक्सीनेशन (Covid-19 vaccines) कर रही है. इस बीच फाइजर और मॉडर्ना (Pfizer and Moderna) जैसी विदेशी वैक्सीन का भारत आने का रास्ता अब साफ हो गया है. ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने फाइजर और मॉडर्ना जैसी विदेशी वैक्सीन पर अलग से लोकल ट्रायल कराने की शर्तों को हटा दिया है. इसका मतलब ये हुआ कि अगर किसी विदेशी वैक्सीन को विश्व स्वास्थ्य संगठन या अमेरिकी एफडीए से इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी मिल चुकी है, तो भारत में ट्रायल से नहीं गुजरना होगा.

भारत सरकार ने 31 दिसंबर 2021 तक सभी नागरिकों को वैक्सीनेट करने का लक्ष्य रखा है. ऐसे में आइए जानते हैं कि फाइजर और मॉडर्ना वैक्सीन के भारत आने के बाद अब कोरोना से लड़ने में कितनी और कैसी मदद हो पाएगी:-

  • अब कैसी होगी आगे की लड़ाई?

    ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने कहा कि विदेशी कंपनियों के लिए 'पोस्ट-लॉन्च ब्रिजिंग ट्रायल' करने और भारत में अपने टीकों की गुणवत्ता का परीक्षण करने की आवश्यकता को खत्म कर दिया है, अगर उनके पास विशिष्ट देशों या स्वास्थ्य निकायों से अप्रूवल है. डीजीसीआई प्रमुख वीजी सोमानी ने एक चिट्ठी में कहा है कि यह निर्णय भारत में कोविड मामलों की बढ़ोतरी और टीकों की उपलब्धता बढ़ाने की आवश्यकता के मद्देनजर लिया गया है.

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    सरकारी सूत्रों ने संकेत दिया है कि भारत अमेरिका के फाइजर और मॉडर्ना की क्षतिपूर्ति पर विचार करने के लिए तैयार है. फाइजर ने विशेष रूप से इसकी मांग की है. फाइजर ने ये भी कहा है कि अधिकारियों को ध्यान में रखना होगा कि अन्य देशों ने क्या छूट दी है. सीधे शब्दों में कहें तो इस तरह के कदम से कंपनियों को उनके टीकों के उपयोग से उत्पन्न होने वाले मामलों में कानूनी कार्रवाई से सुरक्षा मिलेगी. ये केवल तभी होगा, जब वे भारत में आपातकालीन उपयोग प्राधिकरण के लिए आवेदन करेंगे.

  • क्या होंगे बदलाव?

    क्षतिपूर्ति के मामले में तुरंत कुछ भी नहीं होगा. हालांकि, यह सुझाव अपने आप में महत्वपूर्ण है. संबंधित कंपनियों के लिए ये एक स्वागत योग्य कदम होगा. 'पोस्ट-लॉन्च ब्रिजिंग ट्रायल' के संदर्भ में इस तरह के अध्ययनों से एक नए क्षेत्र के बीच पुल बनाने का विचार है, जहां एक टीका/दवा पेश की गई है और विदेशी जगह जहां यह पहले से उपयोग में है.

    DCGI के मुताबिक, ‘आपात स्थिति में सीमित इस्तेमाल के लिए भारत में टीकों को स्वीकृति दिए जाने का फैसला किया जाता है. ऐसे टीकों की मंजूरी दी जाती है जो अमेरिकी एफडीए, ईएमए, यूके एमएचआरए, पीएमडीए जापान द्वारा स्वीकृत हैं या डब्ल्यूएचओ के आपात इस्तेमाल सूची में सूचीबद्ध हैं और जिनका इस्तेमाल पहले ही लाखों लोगों पर किया जा चुका है. सीडीएल, कसौली द्वारा टीके की जांच करने और ब्रिजिंग ट्रायल से छूट दी जा सकती है.’


  • ये इतना अहम क्यों है?

    ब्रिजिंग ट्रायल को खत्म करने और क्षतिपूर्ति का कदम फाइजर और मॉडर्ना द्वारा व्यापक रूप से इस्तेमाल किए जाने वाले वैक्सीन खुराकों के भारत आने की प्रक्रिया में तेजी ला सकता है. ये वक्त की जरूरत भी है. क्योंकि 31 दिसंबर 2021 तक भारत के सभी नागरिकों को वैक्सीनेट करने के लिए हमें ज्यादा से ज्यादा टीकों की जरूरत होगी. ये कदम भारत के महत्वाकांक्षी टीकाकरण कार्यक्रम को मजबूत कर सकता है और टीकों की समग्र आपूर्ति में वृद्धि कर सकता है.


  • फाइजर, मॉडर्ना के टीके कब आ रहे हैं?

    फाइजर की कोविड -19 वैक्सीन जुलाई तक भारत में उपलब्ध हो सकती है. मई के अंतिम सप्ताह में न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, फाइजर 2021 में पांच करोड़ शॉट्स देने के लिए तैयार है, लेकिन यह क्षतिपूर्ति सहित महत्वपूर्ण नियामक छूट चाहता है.

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