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अगस्त-दिसंबर के बीच 2 अरब वैक्सीन डोज मिल पाना बेहद मुश्किल- वायरोलॉजिस्ट गगनदीप कांग

अभी देश में अभी तक केवल दो वैक्सीन- भारत बायोटेक की कोवैक्सीन और सीरम इंस्टीट्यूट आफ इंडिया (SII) द्वारा ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की बनाई जा रही कोविशील्ड ही मुख्यतौर पर इस्तेमाल में लाई जा रही है.

Covid-19 Vaccination in India: मनीकंट्रोल को दिए इंटरव्यू में गगनदीप कांग ने वैक्सीन की खुराकों को लेकर सरकार के प्लान पर शक जाहिर किया. उन्होंने कहा कि अब तक भारत बायोटेक की नेजल वैक्सीन और जाइडस कैडिला की डीएनए वैक्सीन की प्रभावी क्षमता को लेकर पर्याप्त आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं.

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    नई दिल्ली. देश एक तरफ कोरोना वायरस की दूसरी लहर का कहर झेल रहा है. सरकार ने ये भी साफ कर दिया है कि अगस्त से दिसंबर के बीच पांच महीनों में देश में दो अरब से अधिक खुराक उपलब्ध कराई जाएंगी, जो पूरी आबादी का टीकाकरण (Covid-19 Vaccination in India) करने के लिए पर्याप्त हैं. हालांकि, भारत के प्रख्यात वायरोलॉजिस्ट डॉक्टर गगनदीप कांग (Virologists Gagandeep Kang) ने कहा कि वह केंद्र के इस दावे को लेकर संशय में हैं कि अगस्त से दिसंबर तक वैक्सीन की 2 अरब खुराक मिल जाएगी.

    डॉक्टर गगनदीप कांग के मुताबिक सीरम इंस्टीट्यूट (SII) और भारत बायोटेक (Bharat Biotech) जैसे वैक्सीन निर्माताओं की उत्पादन क्षमता में अभी तक सुधार नहीं हुआ है. ऐसे में वैक्सीन की इतनी खुराक पाने में अभी वक्त लग सकता है.

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    मनीकंट्रोल को दिए इंटरव्यू में गगनदीप कांग ने वैक्सीन की खुराकों को लेकर सरकार के प्लान पर शक जाहिर किया. उन्होंने कहा कि अब तक भारत बायोटेक की नेजल वैक्सीन और जाइडस कैडिला की डीएनए वैक्सीन की प्रभावी क्षमता को लेकर पर्याप्त आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं. कांग के मुताबिक, 'मैं इस प्रोजेक्शन को संशय से देखती हूं. अगर आपको याद हो, तो हमें पिछले साल कहा गया था कि दिसंबर तक सीरम इंस्टीट्यूट 10 करोड़ से ज्यादा और भारत बायोटेक 1 करोड़ से अधिक डोज तैयार कर लेगी. लेकिन हमें पता है, ऐसा हुआ नहीं.'



    बता दें कि गगनदीप कांग वैक्सीन के रिसर्च और इस्तेमाल पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सलाहकार समिति की भी सदस्य हैं. डॉ. कांग ने सरकार की सूची में शामिल दूसरी वैक्सीन को लेकर भी सवाल उठाया और कहा कि अब तक उनके पास डेटा नहीं हैं. इससे पहले उन्होंने क्लीनिकल ट्रायल के दौरान ही भारत बायोटेक को मंजूरी देने पर भी सवाल उठाया था. हालांकि बाद में उन्होंने कहा था कि कोविशील्ड और कोवैक्सीन दोनों कोरोना वायरस के खिलाफ प्रभावी हैं.

    वैक्सीन की भारी किल्लत के बीच उत्तर प्रदेश और मुंबई के नागरिक निकायों के बाद 15 मई को चार और राज्यों ने कुल 121 करोड़ खुराक की खरीद के लिए ग्लोबल टेंडर जारी किए हैं. News18 ने तमिलनाडु, कर्नाटक, ओडिशा और उत्तराखंड की सरकारों द्वारा मंगाई गई टेंडर की कॉपी की समीक्षा भी की है.

    वहीं, तमिलनाडु ने टेंडर में तीन महीने के भीतर 50 करोड़ वैक्सीन खुराक की जरूरत का हवाला दिया है. ओडिशा के टेंडर में ऑर्डर के चार महीने के भीतर 38 करोड़ वैक्सीन खुराक की मांग की है, जबकि उत्तराखंड के टेंडर में 3 करोड़ व्यक्तियों के लिए टीके मांगे गए हैं. दूसरी ओर, कर्नाटक सरकार ने सप्लाई की कमी के कारण तीन करोड़ COVID-19 टीकों की खरीद के लिए एक ग्लोबल टेंडर जारी किया है.

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    बता दें कि अभी देश में अभी तक केवल दो वैक्सीन- भारत बायोटेक की कोवैक्सीन और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) द्वारा ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की बनाई जा रही कोविशील्ड ही मुख्यतौर पर इस्तेमाल में लाई जा रही है. पिछले शुक्रवार को स्पूतनिक-V वैक्सीन की शुरुआत भी की गई, लेकिन वैक्सीन डोज बड़े पैमाने पर उपलब्ध नहीं है.