फेफड़ों में आ रही परेशानी! कोरोना से ठीक हुए मरीज फिर हो रहे अस्पताल में भर्ती, डॉक्टरों की बढ़ी चिंता

अस्पताल में भर्ती कोरोना वायरस से पीड़ित एक महिला. (पीटीआई फाइल फोटो)

Coronavirus Lungs Issue: डॉ. अविनाश सुपे ने कहा, 'कोरोना वायरस ने नए मरीजों की संख्या लगातार कम हो रही है, लेकिन बीमारी से ठीक हुए मरीजों के फिर से भर्ती होने के मामले बढ़ रहे हैं, खासतौर से बुजुर्ग.'

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    मुंबई. मुंबई में कोरोना वायरस से ठीक हुए मरीजों के फिर से अस्पताल में भर्ती होने की संख्या में इजाफे ने डॉक्टरों की चिंता बढ़ा दी है. जबकि इन मरीजों के नाम राज्य अपने पास रिकॉर्ड में नहीं रखता, विशेषज्ञ कहते हैं कि ऐसे मरीज जिन्होंने अस्पताल में 15 दिन से ज्यादा गुजारे हैं या फिर जिन्हें कोरोना वायरस के गंभीर लक्षण थे, उनके फिर से अस्पताल में भर्ती होने का खतरा सबसे ज्यादा है.


    केईएम अस्पताल के पूर्व डीन और राज्य सरकार कोरोना कार्यबल के सदस्य डॉ. अविनाश सुपे ने कहा, 'कोरोना वायरस ने नए मरीजों की संख्या लगातार कम हो रही है, लेकिन बीमारी से ठीक हुए मरीजों के फिर से भर्ती होने के मामले बढ़ रहे हैं, खासतौर से बुजुर्ग.' एक डॉक्टर ने याद करते हुए बताया कि कैसे 76 साल के एक बुजुर्ग मरीज जो कि पहली बार संक्रमित होने के बाद अस्पताल में 15 दिन से ज्यादा वक्त तक रह थे, को तेलंगाना स्थित अपने घर लौटने के बाद सांस लेने में गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ा. उन्होंने कहा, 'उन्हें स्थानीय अस्पताल के आईसीयू में तुरंत भर्ती कराया गया, लेकिन कुछ दिनों के बाद फेफड़ों में गंभीर सूजन की वजह से उनकी मौत हो गई.'


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    ऐसे मरीज सबसे कमजोर अथवा अतिसंवेदनशील होते हैं, जिन्हें कोरोना से ठीक होने के बाद घर पर शायद महीनों तक ऑक्सीजन की जरूरत होती है. मुलुंड के फोर्टिस अस्पताल में पोस्ट-कोविड क्लिनिक पर मई में ऐसे 170 नए मरीज देखे गए. फोर्टिस अस्पताल की संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ अनीता मैथ्यू ने कहा, 'सार्स-सीओवी -2 वायरस शरीर में ऊतकों की एक विस्तृत श्रृंखला को संक्रमित करने में सक्षम है. इसका प्रभाव ऐसा है कि उनके प्रारंभिक संक्रमण के महीनों बाद, कुछ कोविड रोगियों में लक्षणों की एक चौंकाने वाली संख्या होती है.'




    अनीता मैथ्यू ने कहा ने कहा कि पोस्ट कोविड क्लीनिक में आने वाले प्रत्येक 100 रोगियों में से कम से कम 70 में लंबे समय तक कोविड के कुछ लक्षण पाए जाते हैं. इसके साथ ही उन्होंने कहा, 'इनमें से लगभग 20% गंभीर लक्षणों वाले होतें हैं जिन पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत होती है.'

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